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साली ने खुद चूत चुदवाने की पहल की – Indian Sex Bazar

साली ने खुद चूत चुदवाने की पहल की – Indian Sex Bazar : दोस्तो, आज मैं अपनी साली की चुदाई का किस्सा लेकर आया हूँ कि किस तरह मैंने अपनी साली को कुतिया बना के चोदा जो अभी महीने भर पहले की बात है। दोस्तो, यूँ तो सब कहते हैं कि साली आधी घरवाली होती है और यह भी कहते हैं कि जिस तरह पेट की भूख मिटाना जरूरी है, उसी तरह तन की भूख मिटाना भी जरूरी होता है।यह किस्सा भी कुछ इसी तरह का है दोस्तो… मैं शादीशुदा हूँ तो मेरी बीवी ने मुझे उसके बारे में बताया था। वो मेरे दूर के रिश्ते में मामा ससुर की लड़की है, नाम है रिंकी, उसकी शादी को अभी पूरा एक साल भी नहीं हुआ कि उसका रिश्ता बिगड़ गया और कोर्ट में केस चल रहा है और वो पिछले 6 महीने से अपने मायके में है।

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मैंने मेरी बीवी को कहा- यार जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ। रिंकी के ऊपर क्या बीती होगी वो ही जानती है। हालाँकि मैंने कभी मैंने उसको देखा नहीं था। फिर मैं और मेरी बीवी महीने भर पहले अपनी बुआ सास के बच्चों की शादी में गये थे। वहाँ रिंकी भी आई हुई थी, जिसका हम दोनों को पता नहीं था कि शादी में वो भी आएगी। मेरे फूफा ससुरजी ने मेहमानों के रुकने के लिए अच्छी व्यवस्था की हुई थी, उन्होंने एक पूरी धर्मशाला किराये पर की हुई थी, जिसमें करीब बीस कमरे थे, हम दोनों को भी एक अलग कमरा दिया।

मैं सफ़र से थका हुआ था तो फ्रेश होकर मैं वहाँ शामियाने के नीचे कुर्सी लगाकर बैठ गया और अपना मोबाइल निकाल कर गेम खेलने लग गया।
करीब आधे घंटे बाद एक लड़की मेरे पास आई और मुझसे बोली, जीजाजी…

मैंने उसे देखा तो तो मैं तो उसे देखता ही रह गया।
क्या तारीफ करूँ दोस्तों उसकी… वो तो अपने आप में खूबसूरती की मिसाल थी।
बड़ी बड़ी काली आँखें, भरा भरा गदराया बदन, 36-32-36 के भरे भरे उसके मम्मे थे जिन्हें देखते ही मेरे मुँह में पानी आ गया कि अभी इन्हें मसल कर इनका दूध पी जाऊँ, और होंठ तो गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पतले थे जिन्हें एक बार चूसो तो छोड़ने का मन न करे।

खैर, फिर मैंने अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए उससे उसका परिचय पूछा तो मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी।

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली कुछ नहीं और वो हंसने लगी।
शायद वो मेरे मन की स्थिति जान चुकी थी, वो बोली- मेरा नाम रिंकी है और मैं आपके मामा ससुर की लड़की हूँ।

फिर मैं बोला- ओह तो आप है रिंकी, हाँ आपकी दीदी ने बताया था आपके बारे में।

मैंने उससे पूछा- मैंने तो आपको पहले कभी देखा नहीं तो अपने मुझे कैसे पहचाना?

वो बोली- इससे पहले जब आप दिनेश (छोटे मामा ससुर का लड़का) की शादी में आये थे तो मैंने आपको वहाँ देखा था लेकिन हम मिल नहीं पाए थे।

मैं बोला- कोई बात नहीं, अब मिल लिए न।

वो बोली- जीजाजी बहुत तारीफ सुनी आपकी।

मैं बोला- वो क्या?

उसने कहा- आप किस तरह दीदी का पूरा पूरा ख्याल रखते हो, उनकी हर विश पूरी करते हो, उन्हें किसी तरह की कोई कमी महसूस होने देते। वो बहुत खुश है आपके साथ। परिवार में सब आपकी तारीफ करते नहीं थकते। मेरी बहुत इच्छा थी आपसे मिलने की।
मैं बोला- साली जी, वो तो हर पति का कर्तव्य है और वैसे भी बीवी की सेवा नहीं करेंगे तो मेवा कैसे मिलेगा।

मेरे इस जवाब से वो थोड़ी शरमा गई।

मैं बोला- चलो आपको शरमाना भी आता है।

वो बोली- जीजाजी, सचमुच दीदी बड़ी लकी है जो आप उसे मिले।

इतने में मेरी बीवी वहाँ आ गई और बोली- मिल लिए रिंकी से?

मैंने कहा- मैं तो इसे जानता तक नहीं था, इसी ने पहचाना मुझे।

फिर हम काफी देर तक वहाँ बैठकर बातें करते रहे लेकिन मेरा पूरा ध्यान रिंकी पर था।

मैं बार बार उसे और उसके वक्ष उभारों को देख रहा था।

वो भी समझ चुकी थी कि जीजाजी की नज़र कहाँ है और वो मुझे हल्की हल्की मुस्कान दे रही थी।

मैं भी मन ही मन बड़ा खुश हो रहा था।

फिर हम शाम को निकासी में मिलने को कह कर अपने अपने कमरे में चले गये।

शाम को निकासी में जाने के लिए सब तैयार होकर नीचे धर्मशाला के चौक में इकट्ठे हो रहे थे लेकिन मेरी नज़र तो सिर्फ रिंकी को खोज रही थी।

काफी देर के बाद वो भी आई, क्या क़यामत लग रही थी दोस्तो, वो नीले रंग की साड़ी में और ब्लाउज तो काफी खुला था जिस कारण उसके मम्मों की गहराई बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी।

रिंकी के मम्मों को देख कर तो मुझे पता नहीं क्या हुआ जो मैं उन्हें ही ललचाई नजरों से देख रहा था।

रिंकी मुस्कुराते हुए बोली- जीजाजी, क्या हुआ?

एकदम से मैं बोला- कुछ नहीं कुछ नहीं।

वो हंसते हुए भाग गई और मैं उसे देखता रह गया।

थोड़ी देर के बाद निकासी धर्मशाला से लड़की वाले के घर के लिए रवाना हुई, चूँकि लड़की भी वहीं की थी।

सब नाच रहे थे, मैं भी नाच रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान रिंकी पर था।

मैं नाचते हुए उसे देख रहा था और वो मेरी पत्नी के साथ नाचने में मगन थी।

फिर तो मैं अपनी मस्ती में नाचने में मशगूल हो गया।

आधे घंटे के बाद मेरी बीवी मेरे पास आई और साइड में ले गई जहाँ रिंकी उल्टियाँ कर रही थी।

मैंने भी पूछा- क्या हुआ?

वो बोली- घबराहट के कारण ऐसा हुआ।

रिंकी ने कहा- जीजाजी मुझे तो आप धर्मशाला में छोड़ आओ, मेरी तबियत बिगड़ रही है।

मेरी पत्नी ने कहा- आप इसे हॉस्पिटल दिखा कर इसे इसके कमरे पर छोड़ आओ।

मैंने कहा- ठीक है।

फिर वो वहाँ से चली गई।

उसके जाने के बाद रिंकी ने कहा- जीजा जी, मुझे हॉस्पिटल नहीं जाना, आप मुझे सीधा रूम पर छोड़ दो।

मैंने कहा- ठीक है, चलो।

फिर भी नजदीक के मेडिकल से एक दवा ली और पैदल ही धर्मशाला पहुँच गये।

वहाँ वेटर को चाय की बोलकर रिंकी को लेकर उसके रूम में पहुँचा।

उसको टेबलेट खिलाई और थोड़ी देर के बाद वेटर आया और चाय देकर चला गया।

मैं उठा और दरवाजा बंद करके वापस उसके पास आकर बैठा और बोला- अब कैसा