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मेरी मकान मालिक अंकल से चुदवाने की सच्ची कहानी

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मेरी मकान मालिक अंकल से चुदवाने की सच्ची कहानी

मेरी मकान मालिक अंकल से चुदवाने की सच्ची कहानी : हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम शवेता है और घर पर सभी लोग मुझे प्यार से शिखा बुलाते हैं। दोस्तों आज में आप सभी को मेरी मकान मालिक से चुदवाने की कहानी बताने जा रही हूँ। वैसे यह कुछ समय पुरानी बात है और में उस समय 12वीं में पढ़ता थी। में जिस मकान में रहता थी, उस  मकान मालिक की उम्र करीब 36 साल थी, लेकिन वो इतनी उम्र होने के बाद भी एक बहुत ही सेक्सी मर्द था और में उन्हे अंकल कहकर बुलाती थी  और उन अंकल का नाम अरुण था और मुझे लगता था की वो मेरी सुन्दरता के दीवाने है, मुझे जब भी मौका मिलता था, में उनसे बात ज़रूर करती और इसी बहाने में उन्हें अपने गोरे गोरे बूब्स को निहारने का मौका देती और अंकल मेरे बूब्स को देखकर एकदम पागल हो जाते , क्योंकि इतनी कम उम्र में भी मेरे बूब्स बहुत बड़े बड़े थे.. फिर वो बातों के बीच में मेरे बड़े साईज़ के बूब्स, गांड को देखते|

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में भी कभी कभी अपने गहरे गले के टॉप को जानबूझ कर निचे कसका देती जिससे गहरे गले के टॉप से गोल गोल बूब्स दिख जाते|  फिर एक बार मेरे माता-पिता दस दिन के लिए हमारे एक करीबी रिश्तेदार के घर दूसरे शहर गये हुए थे और मुझे खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए अंकल ने कहा कि में उन्ही के घर पर खाना खा लिया करूँ। फिर में उनकी यह बात सुनकर बहुत खुश थी और मेरी चूत में भी खुजली होने लगी थी की अब तो मुंगे मोका मिल ही गया अंकल के काले नाग के दर्शन करने का और वैसे भी इतना अच्छा मौका कौन गँवाना चाहेगा, तो में 8 बजे उनके घर जाती थी और खाना खाने के बाद वापस अपने कमरे में चली जाती थी, फिर में उस रात को भी हर रात की तरह 8 बजे अंकल के घर पहुची, अंकल ने दरवाज़ा खोला और हर बार की तरह वो मुझे  सेक्सी नज़रो से देखते रह गए|

मैंने सेक्सी गहरे गले का टॉप और जालीदार सलवार पहन राखी अंकल  गहरे गले के टॉप में से मेरे सुंदर बूब्स को निहार रहे थे, में जब मूड कर जाती तो वो मेरे जालीदार टॉप से मेरी काली ब्रा और पीठ को देखते, मेरा तो मन कर रहा था कि उन्हे पकड़ लूँ और अंकल से कहू की माँ आप से चुदना चाहती हु आज आप मुझे बजा डालो आज तो जैसे मेरे चुदाई के अरमान सातवे आसमान पर थे| फिर मुझे अंकल बहुत खुश नज़र आ रहे थे, शायद उनको भी मेरे दिल की इच्छा का पता चल गया था और वो भी मेरे साथ बैठकर खाना खाने लगे और फिर खाना खाते-खाते अचानक से मेरा टॉप नीचे सरक गया और उन्हें मेरे  बड़े-बड़े बूब्स दिखने लगे और में तिरछी नजर से उनको देखती रही, अंकल को भी मज़ा आ रहा था

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फिर खाना खा लेने के कुछ देर बाद मैंने चुदाई के लिये अंकल को सेट करने के लिये अंकल से बोला कि अंकल मुझे रात को अकेले में डर लगता है तो जब तक तुम्हारे माता-पिता नहीं आ जाते, तुम मेरे घर पर ही रात को रुक जाया करो। फिर में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन खुशी से झूम उठी और में अपनी कुछ किताबें अंकल के घर ले गई जिसमे कुछ सेक्स से समबंदी भी थी| में समज गयी थी की जिस चुदाई की आग में में जल रही हु अंकल भी उस चुदाई की आग में बुरी तरह से जल रहे है |

फिर मैंने अंकल ने कहा कि क्यों अंकल मेरे साथ सोने में तुम्हे क्या कोई आपत्ति है? प्लीज तुम मेरे साथ ही सो जाओ ना, फिर में अंकल के पास में सोने के ख्याल से बिल्कुल पागल हो रही थी, क्योंकि मैंने आज तक जिससे केवल बात की थी, मुझे आज उनके साथ सोने का मौका भी मिल रहा था और उस समय गर्मी बहुत ज़्यादा थी, इसलिए अंकल ने मुझसे कहा कि बेटी तुम अपनी टॉप उतार दो और ब्रा में ही सोजाओ अँधेरे में कुछ नहीं दिखेगा में अंकल के चुदाई से इरादे साफ साफ समझ रही थी की अंकल मुझे चुदाई के लिये नंगा कर रहे है और में मन ही मन में कुश भी हो रही थी मेरी चुदाई की मनोकामना जो पुरी होने जा रही थी। अंकल बोले बेटी तुम इतनी गर्मी में केवल ब्रा और चड्डी में भी रह सकती हो|

फिर अचानक से अंकल के मुँह से ‘ब्रा’  चड्डी जैसे शब्द सुनकर में बहुत रोमांचित हो गई और फिर क्या था, में अपना टॉप खोलने लगी और में जैसे जैसे हुक खोलती जाती मेरे उभरे हुए बूब्स बाहर आ जाते। फिर आख़िर में मैंने टॉप खोल दिया और उसे एक तरफ फेंक दिया, ज़ालिम   बड़े बड़े कसे हुए बूब्स उस काली ब्रा में दबे हुए थे, उन्हे देखकर कर शायद अंकल का मन कर रहा था कि मेरे बूब्स को मसल दूँ और जीभ से चाट लूँ और चूस लूँ, लेकिन मुझे संयम बनाए रखना था।

फिर जैसे तैसे मैंने पढ़ाई में ध्यान लगाना शुरू किया और थोड़ी ही देर बाद अंकल बोले कि   मेरी कमर में दर्द हो रहा है, अगर तुम बुरा ना मानो तो तेल से इसकी मालिश कर दो? तो यह बात सुनकर मेरे बूब्स धीरे धीरे तन्ने लगे। फिर मैंने अपनी ब्रा को ठीक किया और अंकल के करीब पहुँच गयी। फिर मैंने कहा  आपको जो भी काम हो करवा लीजिए, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। फिर क्या था? मैंने अंकल की कमर की मालिश शुरू कर दी| फिर मैंने अंकल के शरीर को जैसे ही हाथ लगाया वो बोले हाँ कितना अच्छा लग रहा है, मेरे बदन की थकान जैसे कि तुमने खत्म कर दी। फिर वो बोले कि थोड़ा और नीचे दबाना और मेरी चड्डी को भी उतार दो।

इससे तुम्हे मालिश करने में आसानी होगी और मुझे भी आराम मिलेगा। दोस्तों मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने कुछ नहीं किया तो इस पर अंकल बोले कि सोच क्या रही हो मेरी चड्डी को उतार दो और फिर दोबारा ऐसा सुनते ही मैंने अंकल की चड्डी एक झटके में खींच कर निकाल फैकी अंकल की चड्डी में से बहुत बुरी साड्डान और  आ रही थी। फिर अंकल की कली और गोल-गोल गांड मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उनकी गांड के आस पास मालिश शुरू कर दी और में उनकी गांड को धीरे-धीरे मसल रही थी और अंकल भी सिसकियाँ ले रहे थे, उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था। में मालिश करे करे अंकल के पैर पर बेठ गयी फिर अंकल बिल्कुल