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मेडिकल स्टोर वाली आंटी ने छुटाई कंडोम की आदत - मेरे लंड पर चढ़कर बैठ गयी

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आज मैं आपको शिपला, इंडियन आंटी की देसी चुदाई की दास्तान सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे मकान के नीचे ही कुछ दुरी पर अपनी मेडिकल की दूकान चलाया करती थी | उनका पति चल बस चूका था और और इसीलिए अब न उनका कोई बच्चा न कोई कोई सगा और इसीलिए अपना पेट पालने के लिए दूकान से ही काम चला लिया करती थी | दोस्तों मेरी भी गन्दी आदत है की कंडोम पहनकर मुठ मारने का मज़ा ही कुछ और आता है और उस दिन जब मैं जल्द बाज़ी में दूसरे नगर से कंडोम लेना भूल गया तो आज आंटी की दूकान पर गया और दो कंडोम मांगे जिसपर आंटी बस खुले मुंह से मेरी तरफ देखती ही रह गयी |

 

आंटी ने कहा, बड़ी जवानी फुट रही है . .!! और मैं भी हंसकर चल दिया | अब मैं भी कुछ पल के लिए आंटी की उस बता पर सोच विचार करने लगा और सोचेत सोचते घर जाकर मैंने शिपला  आंटी के नाम का मुठ भी मार लिया | अगले दिन मैं फिर उनकी दूकान पर गया और जब कंडोम मांगे तो उन्होंने कहा और अंदर खुद आकार ले लो | मैं जब अंदर गया तो देखा की आंटी ने इतने में अपनी दूकान को बंद कर लिया और फिर आँख मारने लगी, थोड़ी जवानी के दर्शन इधर भी तो देते जायो . .!! मैं सुनते ही जोश में फ़ौरन अपने सारा कपड़े उतार दिए और आंटी को भी पलभर में नंगी बैठ कर दिया |

 

मैं इंडियन आंटी को जकड़ते हुए मैंने उनके होठों को चूसना शुर कर दिया और मैंने अपने हाथों से कसके उनकी चुचों को दबा रहा था | मैंने लंड अब खड़े हुए आंटी के सामने कर दिया और वो भी अपने हाथ में मुठी भरते हुए लंड को मसलने लगी और कभी अपने मुंह में भरकर चूसने लगती और मैं बस मज़ा ले रहा था | मैं यूँही झड गया और और आंटी के साथ फिर चुम्मा चाटी करने लगा | अब जब फ्री नया जोश आया तो मैं आंटी की चुत पर अपनी उँगलियाँ मसलते हुए उसपर थूक लगाकर उसपर अपने लंड को रगड़ने लगा | मैंने ज़ोरों से उनकी चुत में अपनी तीन उँगलियों को रौन्धाना चालू कर दिया और फिर उनकी चुत में अपने लंड का धक्का मारा जिससे कुछ पल में ज़ोरदार तरीके उनकी चुत चोद रहा था |

 

इंडियन आंटी भी जोश में मेरे लंड पर चढ़कर बैठ गयी और नीचे से लंड को अपने चुत में उछलती हुई लेती हुई सिसकियां भर रही थी | आंटी की सिसकियाँ सुन मेरा जोश बढ़ने का नाम ले रहा था और मैं नीचे से भी आंटी की चुत में गहराई तक लंड को पार करा रहा | इसी तरह आंटी २० मिनट तक मेरे लंड पर ही कूदती रही और हम दोनों एक ही पल झड भी पड़े | आंटी मुस्काती हुई मुझे चूम रही थी और उस दिन के बाद से मुझे कंडोम की ज़रूरत नहीं पड़ी क्यूंकि मुट्ठी तो मैं अंत की चुत में मारता हूँ तब से |