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बोबो से दूध पिलाते हुए - sex ke bare me - bobos ke bare me

दूध पिलाना * स्तनपान शुरू करने के लिए कैसे / 05 - YouTube

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Sep 11, 2015 - दूध पिलाना * स्तनपान शुरू करने के लिए कैसे / 05 बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान कराना अमृत के समान होता है। बच्चे के शरीर का विकास तथा समय के अनुसार शरीर में पर...

जवान लड़की दूध पीने - YouTube

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Jul 22, 2009 - BREASTFEEDING BABY WALKING IN WILD NATURE PARK ☆ दूध पिलाना - Duration: 1:44. Mama Pyjama ☆ Breastfeeding Channel 380,611 views · 1:44 · अरे बाप रे तुम गजब सुन्दर दिखती हो !! New Hindi Comedy Video Full Comedy - Duration: 12:14. Comedy Masala 1,777,602 views.

Hindi Love Story - LAJJA - YourStoryClub

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Apr 27, 2015 - न चाहते हुए भी पिलाना पड़ता था | कुछ बड़ा हुआ तो अपने आप पीना छोड़ दिया | ... ट्रेन किसी कारण से चार – पांच घंटे लेट हो जाती है | ओरत काफी हट्टी – कट्ठी है | उसके स्तन में दूध धीरे – धीरे भरने लगता है और उसकी बेचैनी भी साथ – साथ बढ़ने ...

Apr 6, 2013 - (दूध पिलाने की अवधि दो वर्ष है). आदरणीय शैख मुहम्मद बिन इब्राहीम रहिमहुल्लाह। “फतावा शैख मुहम्मद बिन इब्राहीम” (11/188). तथा प्रश्न संख्या (47721) का उत्तर देखिए। और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है। इस्लाम प्रश्न और उत्तर.

May 16, 2017 - आपने अक्सर मां को अपने बच्चों को अपना दूध पिलाते देखा होगा लेकिन क्या कभी ऐसा सोचा है की कोई लड़की अपने बॉयफ्रेंड को अपना स्तनपान करवाए। चौंक गए ना आप! लेकिन ये सच है, जेनिफर मलफॉर्ड अपने बॉयफ्रेंड को ब्रेस्टफीड कराने के ...

स्तनपान - विकिपीडिया

https://hi.wikipedia.org/wiki/स्तनपान

एक नवजात शिशु स्तनपान करते हुए. मां द्वारा अपने शिशु को अपने स्तनों से आने वाला प्राकृतिक दूध पिलाने की क्रिया को स्तनपान कहते हैं। ... ये तत्व एक विशेष नलिका थोरासिक डक्ट से सीधे मां के स्तन तक पहुंचते हैं और दूध से बच्चे के पेट में। इस तरह ...

दुग्धपायन - विकिपीडिया

https://hi.wikipedia.org/wiki/दुग्धपायन

दुग्धपान या दुग्धस्रवन या लैक्टेशन, स्तन ग्रंथि से दूध निकलने, उस दूध को बच्चे को पिलाने की प्रक्रिया तथा एक माँ .... न चाहते हुए भी दूध का रिसाव होने लगता है या उस वक्त भी दोनों स्तनों से दूध निकल सकता है जब शिशु किसी एक स्तन से दूध पी रहा ...

Jan 16, 2017 - जैसे ही नवजात शिशु का जन्म होता है, यदि उसके होने के बाद थोड़ी देर बाद ही बच्चे को दूध पिला दिया जाएँ तो वो बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होता है, और बच्चे को कम से कम छह महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए, उसके अलावा बच्चे ...

जब महिला ने ट्रेन में स्तनपान कराया | मनोरंजन | DW ...

www.dw.com/hi/जब-महिला-ने...स्तनपान.../a-18971144

Jan 11, 2016 - एक सामाजिक प्रयोग के तहत इस वीडियो को शूट किया गया. देखिए लंदन की ट्यूब में जब एक महिला ने बच्चे को दूध पिलाया तो क्या हुआ... default. मां का बच्चे को दूध पिलाना बेहद रूढ़िवादी और संकीर्ण मानसिकता वाले समाज में भी ...

Jump to बच्चे को ठीक से दूध पिलाने के कुछ टिपिकल तरीके - कुछ महिलाओं को निचे दी गयी दूध पिलाने की स्थितियां और तरीके आराम दायक लग सकते हैं। ... यदि आप की सी-सेक्शन डिलीवरी हुई है या आप के स्तन बहुत बड़े हैं या आप के निप्पल उल्टे या ...

दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है.. इसलिए आपको अपने बारे में बता दूँ.. मैं एक अमीर घराने से हूँ और मेरी शादी को चार साल हो चुके हैं। शादी से पहले भी मैं दो-तीन बार चुदाई कर चुकी हूँ.. मगर जो वाकिया मेरे साथ मेरी ‘गोल्डन नाईट’ में हुआ.. उसे शेयर करने के लिए मैं बहुत बेक़रार थी।
लिहाज़ा अपना अनुभव आप सभी की खिदमत में पेश कर रही हूँ।
बात 4 साल पहले की है, शादी के लिए हर लड़की की तरह मैंने भी ख्वाब संजो कर रखे थे, फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई, मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत है, मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समां रही थी, उनका घराना भी बहुत ऊँचा है।
फिर वह दिन भी आ गया.. जिसका हर चूत को इंतजार होता है।
मैं सुहागरात की सेज पर छुईमुई सी सजी बैठी.. अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी।
वो आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे।
मुझे इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं.. मगर मैं कैसे पहल कर सकती थी।
सो मैंने एक आईडिया सोचा और धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपना दुपट्टा सीने से हटा दिया।
मेरे सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर मेरे पति की जुबान रुक गई। उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठा कर अपनी गोद में घसीटा और मेरे लिपस्टिक से रंगे होंठ बिना लिपस्टिक के कर दिए।
मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनकी गर्दन पर फिराने लगी। मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब मुझे नंगी कर दिया।
मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक..’ से मेरे चूतड़ों में एक चपत सी महसूस हुई।
मैंने बिलबिला कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ सवालिया निगाहों से देखा.. तो वो मुस्कुरा रहे थे, बोले- माफ़ कर देना.. मुझे सेक्स करते समय मुझे कुछ भी होश नहीं रहता।
मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा- कोई बात नहीं.. मैं सब सहन कर लूँगी।
मगर मुझे पता नहीं था कि आगे जो होगा.. वो सहन कर पाना सबके बस की बात नहीं है।
मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ.. मैंने अपने हाथ उनके सीने पर टिका रखे हैं।
मैं पूरी नंगी.. अपने शौहर की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता-पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लण्ड देखने की चाहत अभी बरक़रार थी।
मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- तुम मुझे पामेरियन कुतिया की तरह लगती हो.. एकदम मासूम सी..
मैंने भी कहा- और तुम मुझे देसी कुत्ते के जैसे लग रहे हो..
वो हंस दिए।
वो फिर मुझे चुम्बन करने लगे और मेरी चूचियों को पकड़ कर मींजने और सहलाने लगे।
उन्होंने फिर से मेरी गांड में एक चपत मारी.. फिर मुझे अपनी गोद से उतार कर बिस्तर पर ही खड़े हो कर अपना कुरता उतारने लगे.. फिर बनियान और पायजामा उतार कर बोले- लो.. अब तुम्हारी बारी..
मैं शर्मा गई.. मेरा सर उनकी जाँघों के पास था।
मैं बोली- आज नहीं.. ये सब कल..
उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़ कर अपने लण्ड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया।
मेरे दिमाग में अजीब सी गंध भर गई. मैं भी मदहोश सी होने लगी, मैंने उनका अंडरवियर पकड़ कर नीचे किया.. तो मेरे होश उड़ गए।
सिकुड़ा हुआ भी उनका लण्ड करीब 5 इंच का था।
मेरे शौहर और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है.. मगर उनका लण्ड एकदम भुजंग काला था।
मैं उनका लौड़ा देख कर हल्के से चिल्ला पड़ी- हाय अल्लाह.. ये क्या है?
वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लन्ड पर रगड़ने लगे।
मैंने जोर लगाने की कोशिश की.. मगर वो ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लन्ड पर फिर रहे थे।
एक मिनट बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया।
तभी उन्होंने मेरे बाल जोर से खींचे तो मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला वैसे ही उन्होंने अपना लण्ड अन्दर करके मेरा सर अपने लण्ड पर दबा लिया।
मुझे लगा कि जैसे मेरा पूरा मुँह भर गया हो।
तभी उनके लण्ड ने अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दिया.. मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा.. मैं छटपटा उठी.. हाथ-पांव पटकने लगी.. मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा!
अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लण्ड मेरे गले से होता हुआ सीने तक चला गया है।
मेरी आँखों से आंसुओं की धार निकल पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी.. नाखून गड़ा रही थी.. मगर उन पर कोई असर न हुआ।
वो मेरा सर दबाये हुए थे।
मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लण्ड निकालने के लिए विनती वाली नजरों से देखा।
मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। इतने में मेरे गाल पर एक झन्नाटेदार तमाचा पड़ा।
मैंने तिलमिला कर ऊपर देखा तो मेरे पति आँखों में कठोरता लिए मुस्कुरा रहे थे।
वो बोले- अब बता.. जैसे बोलूँगा.. वैसे ही करेगी न?
मैंने तुरंत आँखों से हामी भरी।
उन्होंने मेरा सर छोड़ दिया..
मैं बिस्तर पर गिर पड़ी, मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं एक दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी।
इतने में पति बोले- हाँ.. अब तू पूरी कुतिया लग रही है।
वो मेरे दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर घुटने रख कर मेरे सीने पर बैठ गए और कहा- इस लण्ड को हड्डी समझ और चाट।
अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था.. तो उनका हलब्बी लण्ड देख कर मेरी आँखें फ़ैल गईं।
करीब आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा काला.. लौकी जैसा लण्ड.. मेरे मुँह पर रखा हुआ था।
मैं लण्ड देख के हक्की-बक्की थी।
मेरे पति का लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लण्ड को देख कर हैरान थी, इतने में मेरे गाल पर फिर एक जबरदस्त चांटा पड़ा, मेरे पति बोले- चाट इसे जल्दी।
मैंने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया।
वो बोले- हाँ.. अब तू पूरी कुतिया बनी।
मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे।
बीच बीच में वो लण्ड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर मार देते थे, मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लण्ड मुक्के की तरह पड़ रहा था।
लगभग पांच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठा कर गोद में बिठा लिया।
बोले- अपनी चूचियों से मेरे चेहरे पर मसाज कर..
मैं एक गुलाम की तरह महसूस कर रही थी, मैंने अपनी चूचियाँ पकड़ कर उनके क्लीन शेव चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया।
उनका लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था, अब तक दर्द थोड़ा कम हो गया था।
तभी उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा.. मैं उछल पड़ी.. तब तक मगर उनका टोपा मेरी चूत में फंस चुका था।
मैं जैसे किसी लोहे की सलाख पर बैठी हुई थी। उन्होंने जोर लगाया तो मैं चिल्ला पड़ी। उन्होंने मुझे खिलौने की तरह उठाया और खड़े हो कर एक और झटका दिया।
मुझे लगा कि मैं मर जाऊँगी, इतना अधिक दर्द मुझे कभी नहीं हुआ था, मैं बेहोश सी होने लगी।
तभी वो मुझे ले कर बैठ गए और मेरे होंठ चूसने लगे, लगभग दो मिनट तक वो ऐसे ही बैठे रहे, दो मिनट बाद मुझे थोड़ा आराम मिला.. तो वो बोले- चूत को ऊपर-नीचे कर..
मैं रोते-रोते अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी, बीस-पच्चीस बार ऊपर-नीचे करने के बाद मुझे अच्छा लगने लगा।
मेरे पति मुझे ही देख रहे थे, वो बोले- जब दर्द ख़त्म हो जाए तो बताना।
मैं बोली- अब दर्द हल्का हो गया है।
बस यह सुनते ही उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर मुझे हल्का सा ऊपर उठाया और नीचे से जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।
मेरे बड़े-बड़े कोमल मम्मे किसी फुटबॉल की तरह उछाल मार रहे थे। चूत भी अब गीली हो गई थी।
मेरे पति बोले- चल.. अब कुतिया बन जा।
मैं उनके ऊपर से उठ कर हाथ-पैरों के बल झुक गई। उन्होंने पीछे आकर लण्ड को चूत पर रख कर जोर से झटका मारा और एक ही बार में पूरा लण्ड अन्दर डाल दिया।
मैं अब किसी कुतिया की तरह चुद रही थी।
मैं अब झड़ने वाली थी।
उन्होंने कहा- बोल.. तू मेरी कुतिया है।
मैं चुदाई के नशे में मशगूल थी, उन्होंने एक करारा चांटा मेरे चूतड़ों पर मारा।
‘हाँ.. मैं आपकी कुतिया हूँ। मुझे कुतिया बना दो.. चोद-चोद के..’
मुझे जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा था। मैंने ढेर सारा पानी उनके लंड पर छोड़ दिया.. दो-तीन झटकों बाद उन्होंने भी अपना लण्ड निकाल लिया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर आ गए।
अपना लण्ड पकड़ कर मेरे मुँह के पास हिलाने लगे, बोले- मुँह खोल कर लेट जा।
जैसे ही मैंने मुँह खोला.. उनका भी छूट गया.. जो निकला.. वो मुझे पीना पड़ा।
उस रात के बाद मुझे वो हमेशा अकेले में कुतिया ही बुलाते हैं.. और मुझे उनकी कुतिया बनने में बड़ा मज़ा आता है।

कोठे की कुतिया में आपने पढ़ा कि मौसी ने किस तरह से मुझे एक रंडी बना दिया था।
अब पढ़िए कि किस तरह से मौसी ने मेरी चूत और गांड का भोंसङा बना दिया।
मैं और मोनी मौसी के साथ एक पारदर्शी मैक्सी पहन कर ऊपर की तरफ चले गए जहा मोंटी अंकल हमारा इंतजार कर रहे थे। अंकल को देखकर मौसी बोली- डार्लिंग मस्त लोंडिया तुम्हरे लिए बचाकर रखी हुई है, छूते ही मस्तिया जाओगे और तुम्हारा चेला कहाँ है? मोनी को उसके लिए बचाकर रखा है।
अंकल बोले- टीनू आ रहा है, वो जरा दारू का इंतजाम कर रहा है।
मौसी ने पहले ही मुझे काफी बातें सिखा दी थी कि ग्राहक की सेवा कैसे की जाती है। मैं अंकल के पास जाकर बेठ गई और उनके लौड़े को जींस के ऊपर से रगड़ने लगी।
अंकल मेरे चूतड़ मसलते हुए बोले- मौसी, तुम यह झबले क्यों पहना लाती हो ?
मौसी के इशारे पर मैंने अपनी मैक्सी उतार दी।
अंकल मुस्कराए और बोले- समझदार है !
उन्होंने आगे से मेरी उभरी हुई चूत पर हाथ फेर कर कहा- साली की पाव रोटी तो बड़ी चकाचक है ! ज्यादा चुदी भी नहीं लगती है !
मौसी बोली- बिलकुल ताजा माल है ! पीछे से तो पूरी कुंवारी है आगे से भी लंड छुली हुई है बस। आज तुम्हें इसकी चूत का भोंसड़ा बनाना है।
अंकल गरम हो रहे थे उन्होंने जींस में से लौड़ा निकाल कर मेरे हाथ में पकड़ा दिया। थोड़ा सहलाने के बाद मैंने अंकल का लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मेरी चूत चुदने को पगला रही थी। मौसी बाहर जाने लगीं और मुझसे बोली- अंकल जैसे कहें वैसा करना ! अगर अंकल खुश नहीं हुए तो तेरी चूत और गांड की भोंसड़ी तो बनाउंगी ही, साथ ही साथ चेहरा भी इतना सुंदर कर दूँगी कि कोई तुझे चोदने के दो रुपए भी नहीं देगा।
मौसी मोनी को लेकर बाहर चली गई और बोली- अंकल, मौज करो ! टीनू को दूसरे कमरे में बैठा दूँगी।
अंकल का लंड बहुत सुंदर था। आट इंच लम्बा लंड किसी भी औरत की चूत चोद चोद कर फाड़ने के लिए काफी था।

मैं अंकल का लंड मुँह में आगे पीछे करते हुए मस्ती से चूस रही थी। सच मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। अंकल ने मेरे चूतड़ थपथपाते हुआ कहा- थोड़ा अपनी चूत चुसवा ! बहुत मस्त लग रही है।
उन्होंने मेरी टाँगें खींच कर अपने मुँह की तरफ कर ली अब मैं और अंकल 69 कि अवस्था में एक दूसरे के ऊपर थे, अंकल नीचे से मेरी चूत के होंठ चूस रहे थे और मेरे मुँह में उनका लौड़ा गरम हो रहा था। मेरी बुर पानी छोड़ने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे से बुरी तरह चिपके हुए चूत और लंड की चुसाई का मज़ा ले रहे थे।
थोड़ी देर बाद अंकल ने मुझे ऊपर से हटा दिया और सीधे पलंग पर लेटा दिया और अपने तने हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी चूत पर फिराने लगे। मैं चुदने के लिए बुरी तरह से पगलाने लगी। मेरे मुँह से ऊह आह आह आह अंकल चोदो मुझे चोदो जैसी आवाजें निकलने लगी।
अंकल ने थोड़ी देर में अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी दोनों चूचियां दबाकर कर एक जोर का झटका दिया। मैं एकदम से बुरी तरह से चिल्ला उठी। अंकल का लंड मेरी चूत में अंदर तक घुस चुका था। मेरी चीख निकल गई- उईऽऽ मर गई ! मर गई ! मर गई, छोड़ो ! बहुत दुःख रही है छोड़ो !
अंकल ने मेरे दूध भोंपू की तरह दबाते हुए मेरी चुदाई शुरू कर दी। थोड़ी ही देर में मुझे चुदने में मजा आने लगा। अब मैं मस्त होकर चिल्ला रही थी, मेरे मुँह से ऊ ऊहं ऊहं ओह आह आह अहह बड़ा मज़ा आया और चोदो चोदो आह आह बहुत मज़ा आ रहा है जैसे आवाजें निकलने लगी।
अंकल चोदने में बहुत माहिर थे, कभी धीरे धीरे लंड अंदर-बाहर करते थे और कभी तेज कर देते थे। बराबर वो चूचियां और चुचक भी मसल रहे थे और होठों पर भी काट रहे थे। उनकी चुदाई में एक मज़ा था। मेरे होठों में अपने होंठ डालते हुए अंकल बोले- कुतिया थोड़ी गांड हिला हिला कर लंड अंदर ले ! बहुत मज़ा आयेगा।
मैं अपनी गांड धीरे धीरे हिलाने लगी। अब मेरी चुदने की मस्ती बढ़ गई थी, चुदने का मज़ा दुगना हो गया था। थोड़ा चोदने के बाद अंकल ने मुझे तिरछा कर दिया और मेरी टांग उठाकर पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया और पीछे से मेरी चूत में धीरे धीरे धक्के मारने लगे।

मैं इस समय चरम सीमा का अनुभव कर रही थी, मेरी चूत बहुत तेज धार से पानी छोड़ रही थी। अंकल ने भी अपना वीर्य छोड़ दिया। मेरी चूत पूरी वीर्य से भर गई थी। मुझे आज चुदाई में एक चरम सीमा का आनंद आया।
बहुत दिनों के बाद मैं चुदी थी, चुदने के बाद मैं मस्तिया कर लेट गई। अंकल उठे और उन्होंने डीवीडी पर एक नग्न मूवी लगा दी और कमरे में रखे फ़्रिज से दारू की बोतल निकाल ली और दारू का ग्लास बना लिया। मूवी में दो हब्शी एक लड़की की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे। अंकल अपना लौड़ा सहलाने लगे, थोड़ी देर में अंकल का लंड फिर खड़ा हो गया था। उन्होंने मुझे इशारा किया, मैं उठकर अंकल के पास आ गई। अंकल ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।

उनका लौड़ा पूरा तन गया था। उन्होंने दारू का ग्लास मुझे पकड़ा दिया और मेरी टांगें चौड़ी कर थोड़ा नीचे को फिसलते हुए अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। अब मैं अंकल के लौड़े पर बैठी हुई थी। एक हाथ से अंकल दारू का ग्लास पकड़े हुए थे और एक हाथ से कभी मेरी चूत का दाना सहला देते और कभी चुचक दबा देते। ब्लू फिल्म मैं भी बड़े प्यार से देख रही थी अंकल ने मेरी चूत में अपना लौड़ा फिट कर रखा था। बीच बीच में वो एक दो धक्के मुझे उचका के मार देते थे। मेरा बदन एक बार फिर गरम होने लगा था।
हम दोनों सोफा कुर्सी पर बैठे थे जिसके हत्थे नहीं थे। अंकल ने मेरी चुचकों पर चुटकी काटी और मेरे स्तन दबाते बोले- जरा साइड में देख !

साइड में एक बड़ा शीशा लगा हुआ था, मैं नंगी शीशे में देखकर शरमा गई। अंकल ने मुझे बैठे हुए ही कुर्सी मोड़ दी अब मैं शीशॆ के सामने थी और नंगी उनके लंड पर बैठी हुई अपने को देख रही थी। मैं पूरी रंडी बनी हुई थी अंकल ने अपनी टाँगें चौड़ी कर दी।मेरी चूत और उसमें घुसा हुआ लंड अब साफ़ दिख रहा था। अंकल मुझे कमर से पकड़ कर धीरे धीरे उछालने लगे और बोले- थोड़ा लौड़े पर कूद ले ! मौसी की रंडियां इतनी शर्माती तो नहीं हैं ! मस्ती से चुदवा, नहीं तो मौसी से शिकायत करनी पड़ेगी।

मौसी का नाम सुनकर मैं डर गई और उनके लौड़े पर उछल-उछल कर खुद चुदने लगी। आज तक मैं अपने पति से कभी रौशनी में नहीं चुदी थी। अब यहाँ चूत चौड़ी कर खुद चुद रही थी और अपनी चुदाई शीशे में देख रही थी। अंकल भी अब अपना लौड़ा गांड हिला हिला कर तेजी से पेल रहे थे, लेकिन मुझे चुदाई में जन्नत का मज़ा आ रहा था। मैं चुदाई की मस्ती में नहा रही थी। अंकल ने कुछ देर बाद मुझे सोफे के नीचे बैठा दिया और अपना मोटा लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया और अपना सारा लंड रस मेरे मुँह में उतार दिया। मेरा मुँह अंकल के लंड रस से भर गया जिसे मुझे अपने अंदर लेना पड़ा इसके बाद अंकल ने मुझे छोड़ दिया। मैं पेशाब करने बाथरूम में चली गई बाथरूम में दरवाज़ा नहीं था केवल पर्दा पड़ा था।

रात के तीन बज़ रहे थे, अंकल ने दूसरी ब्लू फ़िल्म लगा ली और मुझे बगल में बैठा लिया। उन्होंने मेरे गले में हाथ डाल लिया और थोड़ी देर बाद बोले- जा जरा मेरी पैंट की जेब में एक थैली पड़ी होगी, उसे लेकर आ।
मैं थैली लेकर आ गई। उसमें एक गोली का पत्ता था और एक ट्यूब रखी थी। अंकल ने एक गोली निकाल कर खा ली और ट्यूब साइड में रख ली। ब्लू देखते हुए अंकल मेरी चूचियां दबा रहे थे और चूचक नोच रहे थे। मैं अब थक रही थी और मेरी चूत की प्यास शांत हो चुकी थी।

थोड़ा इतरा कर मैं बोली- डार्लिंग, नींद आ रही है, सोने जाने दो न !
अंकल बोले- बस अभी से? अभी तो तुम्हरी गांड भी नहीं मारी है। अच्छा एक काम करो इस ट्यूब से क्रीम निकाल कर मेरे लौड़े पर मलो, मरती क्या नहीं करती ! मैं झुककर अंकल के लौड़े पर क्रीम मलने लगी। अंकल ने क्रीम से सनी दो ऊँगली एक साथ मेरी गांड में अंदर तक घुसा दी। मैं अनमने मन से उई उई करते हुए अपनी गांड में ऊँगली घुसवा रही थी और अंकल के लौड़े और सुपाड़े पर क्रीम की मालिश कर रही थी। थोड़ी देर बाद अंकल ने मुझे लौड़ा चूसने के लिए बोल दिया। अब अंकल का क्रीम लगा चिकना लौड़ा मैं मुँह में चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि सेक्स मस्ती की जगह मैं जैसे कोई सेक्स की मजदूरी कर रही हूँ।
अंकल अब ऊँगली की जगह अपने पैन को मेरी गांड में आगे पीछे कर रहे थे। मुझे लग रहा था कि अब मेरी गांड फाड़ी जाएगी। थोड़ी देर बाद अंकल ने मुझे फिर बगल मैं बैठा लिया। अंकल का लंड तनतना रहा था। लेकिन अब मेरा चुदने का मन नहीं हो रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे पेशाब आने लगी। मैं उठी और मुस्करा के बोली- अंकल पेशाब कर के आती हूँ !

अंकल कुटिलता से मुस्कराए और बोले- ठीक है !
मैं उठी और बाथरूम में चली गई।
जब मैं पेशाब कर के उठी तो देखा अंकल पीछे खड़े थे और उनका लंड उछाल मार रहा था। अंकल ने पीछे से कमर से मुझे पकड़ लिया और बोले पीछे का माल तो तेरा बड़ा मस्त है, चल झुक जरा तेरी गांड तो चोद दूँ ! क्या मस्त दिख रही है !

अंकल की पकड़ बड़ी मजबूत थी, मुझे कुतिया की तरह झुकना पड़ा। मैंने अपने हाथ इंग्लिश टोइलेट सीट पर लगा दिए। उन्होंने अपनी दो उंगलियाँ मेरी गांड में डाल दी और कस कस के गोल गोल गांड के अंदर घुमा दी। मैं ऊई ऊई कर के कराह उठी। अंकल ने ढेर सारा थूक मेरी गांड पे डाल कर अपना सुपारा मेरी गांड के मुँह पर रख दिया और एक तेज झटका मारकर सुपारा मेरी गांड में घुसा दिया। मेरी चीख निकल गई और मैं चिल्ला उठी- उई उई मर गई मर गई !

लेकिन रंडी तो बजने के लिए ही बनी है, अंकल अब अपना लंड मेरी गांड में घुसा रहे थे, चिकना लंड मेरी गांड में अंदर तक घुसता जा रहा था। मेरी आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा था। अंकल ने अपना पूरा लंड मेरी गांड में ठूस दिया था मुझे ऐसा लगा कि मैं बेहोश हो जाउंगी। मैं चीख कम और रो ज्यादा रही थी। मेरे दोनों चूतड़ फाड़ दिए गए थे। अगले दो मिनट बाद ही में बहुत तेजी से चिल्ला उठी। अंकल ने पूरा लंड बाहर खींच कर फिर दुबारा एक झटके में अंदर डाल दिया था। मेरी चीख बहुत तेज थी। पूरी नीचे गली तक गई होगी क्योंकि रात के तीन बज़ रहे थे और एक शांति सी थी। लेकिन यहाँ तो रोज लड़कियां बजती थीं इसलिए मुझे उम्मीद नहीं थी कि कोई मुझे बचायेगा अब कोठे की कुतिया के दोनों छेद फट गए थे, अंकल ने मेरी गांड बजाना शुरू कर दी थी। वाकई चुदाई तो मेरी अब हो रही थी, अभी तक तो मैं चूत लौड़े की मस्ती ले रही थी जो शरीफ औरतें रोज़ अपने पति से लेती हैं। चुदाई क्या होती है यह तो बस रंडी ही जानती है।

वाकई मौसी ने मुझे कुतिया बनाकर कोठे पर चुदवा दिया था। मेरे मुँह से बार बार उई मर गई फट गई बचाओ छोड़ो मुझे छोड़ो ऊ मर गई ऊ ओई ऊ ओई ऊ ओई फट गई की आवाजें निकल रही थीं अंकल ने दस मिनट तक मेरी गांड बुरी तरह से ऐसे चोदी जैसे कि सड़क की कुतिया की कुत्ते चोदते हैं। उसके बाद उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। मैं बाथरूम में ही लेट गई थी। अंकल ने मुझे उठाकर पलंग पर डाल दिया।
अब मेरी गांड और चूत दोनों फट गई थीं। अंकल मेरी बगल में लेट गए थे।

आधे घंटे बाद मौसी एक आदमी और एक रंडी जिसका नाम शोभा था, के साथ अंदर आई और बोली- अंकल, क्या हुआ ? ठंडे पड़ गए?
अंकल मुस्कराए और बोले- तीन राउंड निपटा चुका हूँ, तेरी कुतिया ठंडी पड़ी है।
अंकल उठकर पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।
शेष दूसरे भाग में !

हाई दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन राजपूत हैं और मैं छपरा का रहने वाला हूँ. मैं चूत मारने का बड़ा सौखीन हूँ और जहाँ चांस मिले वहाँ चूत चोदने के लिए तैयार होता हूँ. मित्रो यह बात पिछले साल की एक सत्य घटना के उपर आधारित हैं. जिसमे मैंने थोडा मसाला मिला के आप लोगो के समक्ष पेश कर रहा हूँ. लेकिन कथा का मूल आधार एक चुदाई की सच्ची कहानी हैं.
लास्ट इयर जून के अंत में बहुत बारिश हुई और मैंने और मेरा दोस्त कल्लू उसके गाँव हरियादपुर गए हुए थे. उसकी मंगनी की रसम थी और कुछ ही दिनों में प्रोग्राम था. बाकी के सभी दोस्त एकाद हफ्ते में आने वाले थे.
लेकिन मेरा काम कम था इसलिए मैं उसके साथ चल पड़ा. हरियादपुर के छोटा गाँव हैं और उसकी बस्ती 1000 से भी कम हैं. कुछ पक्के मकानों को छोड़ के सभी कुटिया में रहते हैं. गाँव के लोगो की आमदनी मुख्यरूप से खेती से आती हैं. कल्लू का बाप यहाँ एक सरकारी मुलाजिम था और गाँव की एक रूम की स्कुल का वो कर्ताधर्ता था. कल्लू का मकान पक्का था. वैसे वो तो साल के 11 महीने छपरा में ही बिताता था. अगले दिन सुबह हम लोग हरियादपुर के पास आये एक बांध को देखने गए और वापस आने के समय मुझे बहुत प्यास लगी थी. रास्ते में मैंने एक कुटिया के बहार पानी का मटका देखा और दरवाजे को ठोक के अंदर आवाज दी, “कोई हैं.?”
अंदर से एक 28 साल की उम्र की औरत बहार आई, उसने हलके रंग की साडी पहनी हुई थी. पता नहीं क्यूँ कल्लू मुझे पीछे से बार बार कपडे खिंच के जाने को कह रहा था. औरत के आते ही मैं उसे कहा, “पानी मिल सकता हैं थोडा, मेरा गला सुख रहा हैं.”
इस औरत ने हंस के कहा, “क्यों नहीं, अभी देती हूँ.” उसने मटके को खोल के पानी निकाला और मुझे दिया. पानी पिते पीते मेरी और उसकी नजर एक हो गई. वो मेरे बदन को उपर से निचे तक देख रही थी. मुझे थोडा अजीब लगा लेकिन मैंने पानी पी के वहाँ से उसे थेंक्स कह के रास्ता नापा. वहाँ से निकलते ही कल्लू ने मुझे कहा, “साले पांच मिनिट रुक नहीं सकता था. क्या वही पानी पीना जरुरी था. “
मैंने कल्लू की तरफ कतराती नजर से देखा और कहा, “अबे साले वहाँ पानी पिने से क्या आफत आ गई. और मुझे बहुत प्यास लगी थी यार.”
“अबे वो एक धंधेवाली का घर था. वो लंड और चूत के व्यापार में हैं.” कल्लू बोला.
मैंने एक पल के लिए उसे कुछ नहीं कहा और फिर बोला, “तो उसमे क्या हर्ज हैं. पानी तो कही भी पी सकते हैं. साले तो शहर में रह के भी देहाती सोच रखता हैं.”
कल्लू बोला, “अरे यह देहात हैं और यहाँ देहाती नहीं बने तो लोग जबान से ही गांड मार लेते हैं.”
मैंने कल्लू को कुछ नहीं कहा और हम लोग घर की और चल दिए. मुझे पता था की उससे मैं कितनी भी बहस कर लूँ लेकिन उसने अगर मेरी बात नहीं माननी हैं तो वो पूरी जिन्दगी नहीं मानेगा. लेकिन मेरे दिमाग में अब वो औरत घूम रही थी. अब मुझे पता चला की क्यों वो मुझे बारबार देख रही थी. अब मेरे मन में भी उसकी छायाकृति उभरने लगी, बड़ी आँखे, भरे हुए गाल, मस्त सुड़ोल शरीर और बड़े चुंचे अब जैसे की मेरे दिमाग से बहार आ रहे थे. वैसे पानी पिने के समय तो मैंने उसे इतने ध्यान से नहीं देखा था.
मैं  कुटिया पर पहुँच गया
अब मुझे तो रात में सोते समय भी उस औरत के विचार आने लगे थे. मैं सोच रहा था की अगर उसकी चूत चोदने को मिल जाए तो हरीयादपुर का सफ़र रंगीन बन जाएगा. कल्लू मेरी इसमें मदद करे इसके चांसिस ना के बराबर थे. गाँव के सरपंच का होने वाला दामाद और मास्टरजी का बेटा यह सब काम छपरा में करता हैं, यहाँ पर तो वो एक सुशिल और सज्जन इंसान हैं. मैं शाम को उठा और मोबाइल नेटवर्क का बहाना कर के बाइक ले के निकला. मैंने कल्लू को बोला वो घर पर ही रहे क्यूंकि महेमान आ जा रहे थे. कल्लू मेरी बात मान गया. मैंने बाइक को गाँव के बहार पीपल के निचे पार्क की और मैं फिर उस रंडी के घर की तरफ निकल पड़ा. मैंने देखा की अभी वो बहार बैठी सब्जी क़तर रही थी. उसने मेरी तरफ देखा और मैंने आँखों आँखों में ही उसे इशारा किया. उसने मुझे इशारे से घर में आने को कहा. वो उठ के घर में घुसी और दरवाजे को थोडा टेढ़ा कर दिया. मैं उसके पीछे पीछे इधर उधर देखता हुआ अंदर घुसा. अंदर जा के मैंने लकड़े के पलंग में बैठा और उड़ने दरवाजे को पूरा बंध किया. वो पीले रंग के ड्रेस में सज्ज थी. उसकी कथ्थई आँखे और भरे हुए चुंचे बहुत मादक लग रहे थे. उसने मेरी तरफ देख के पूछा,
“क्या हुआ बाबूजी, क्यों आना हुआ.”
मैंने शायरी वाले अंदाज में कहा, “प्यासा कुँए के पास नहीं आएगा तो कहा जाएंगा.”
उसने मस्तीवाली अदा से कहा, “पानी तो बहार ही हैं, ला दूँ.”
मैंने हँसते हुए उठ के उसे गले से लगा लिया और उसके चुंचे मसलते हुए कहा, “मुझे प्यार का पानी पिला दे अपनी चूत से जानेमन. बोल क्या लेगी.”
वो भी बड़ी चालाक थी, उसने मुझे उकसाते हुए कहा, “आप की प्यास बुझाने की क्या कीमत देंगे आप.”
मैंने जेब से 100 100 के तिन नोट निकाल के उसके हाथ में थमा दिए. उसने अपने बूब्स के उपर रखे हुए पर्स को निकाला और उसमे पैसे रख दिए. वो अपने कपडे उतारने जा रही थी, लेकिन मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया. मुझे औरतो के कपडे खुद उतारने में बड़ा मजा आता हैं. मैं खुद पहले अपने कपडे उतार के पूरा नंगा हो गया और उसकी तरफ बढ़ा. उसके पास जा के मैंने उसके भरे हुए चुंचो को हाथ में लिया और जोर से दबाया. उसने भी मेरे लंड को हाथ में ले के उसे मसल दिया. मेरे लंड को उसका हाथ लगते ही अजब सी खुमारी हुई. मैंने उसके स्तन को दबाते हुए पीछे की डोरी खोली. उसके ड्रेस को उसके हाथ ऊँचे करा के मैंने उतारा और बोला, “दिखने में तो बड़े मस्त बूब्स हैं आप के डार्लिग. वैसे तुम्हारा नाम क्या हैं.”
उसने लौड़े को हाथ से हिलाते हुए अपने सेक्सी आवाज में कहा, “मेरा नाम प्रिया हैं.”
मैंने अब उसके पीछे हाथ डाल के ब्रा का हुक खोला. उसके भारी स्तन तुरंत बहार झूलने लगे. ब्रा की साइज़ तो मैंने नहीं देखि लेकिन वो कम से कम 36D जरुर होगी. मैंने उसके चुंचो को अपने मुहं से चुसना चालू किया और साथ ही मैंने एक हाथ उसकी चूत के उपर भी रख दिया.वो कराहते हुए मेरे लौड़े को हिलाने लगी. कुछ 5 मिनिट में ही मैंने उसकी सलवार भी उतार डाली और उसने अंदर पहनी हुई सस्ती पेंटी उतार के उसकी हलकी हलकी झांटो वाली चूत को अपने हाथ से छू लिया. उसकी चूत पानी निकाल रही थी. क्यूंकि मैंने उसके स्तन चुसे थे उसकी चूत को भी अब लंड की जरुरत आन पड़ी थी. मैंने उसे निचे बिठाया और जैसे ही मैं अपना लंड उसके मुहं में देने जा रहा था, उसने कहा, “एक मिनिट बाबु जी.”
उसने बिस्तर के निचे हाथ डाला और सरकारी खाते से फ्री में मिलता कंडोम निकाला. उसने मेरे लंड के उपर कंडोम पहनाया और मुखमैथुन के लिए लंड को खिंचा.
पुरे लंड का मस्त मुखमैथुन
प्रिया ने अब लंड को मुहं में लिया और उसे पूरा के पूरा जोर जोर से चूसने लगी. मुझे उसके लौड़े को चूसने से बहुत मजा आ रहा था. वो लंड के निचे गोलों को हाथ से मसाज दे राही थी और लंड को मस्त चूस्सा लगा रही थी. मैंने उसके माथे को हाथ में लिया और मैं उसके मुहं को जोर जोर से चोदने लगा. उसके मुहं से ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग जैसे आवाज आ रही थी. लेकिन प्रीया थी बहुत अनुभव वाली क्यूंकि उसके मेरे लंड के अंदर जाने को आसन बनाने के लिए अपने गले का मार्ग खोल दिया था जैसे. वरना 8 इंच का लंड मुहं के अंदर पूरा के पूरा घुसना संभव ही नहीं था. मैंने उसके ऐसे ही 2 मिनिट तक भरपूर चोदा और फिर मैंने अपने लंड को मुहं से बाहर किया. प्रिया के दोनों होंठो पे बहुत सारा चिकना थूंक लगा हुआ था.
वो अब पलंग में अपनी टाँगे फैला के लेट गई. मैं उसकी टांगो के बिच में आ गया और उसकी चूत के होंठो के उपर लंड को रख दिया. प्रिया ने अपने हाथो से लंड को चूत के अंदर लिया और उसके सेट होते ही मैंने एक झटका दे दिया. लंड अंदर आधा घुस गया. प्रिया की चूत मस्त चिकनी थी और अंदर से गरम गरम भी. मैंने जैसे ही लंड को अंदर झटके दिए; प्रिया आह आह ओह ओह करने लगी. वैसे एक रंडी चुदवाते समय नहीं मोन करती हैं लेकिन मेरा लंड था ही इतना बड़ा के अच्छी अच्छी चूत इसके आगे पानी भरती थी. मैंने प्रिया को जोर जोर से ठोका और ठोकता ही रहा. उसकी चूत से 10 मिनिट की चुदाई के बाद झाग आने लगा और वो भी अपनी गांड को उठा उठा के मुझ से मजे लेने लगी. मैंने झुक के उसके स्तन फिर से मुहं में लिए और कस के उन्हें चूसने लगा. उसके निपल्स मस्त अकड चुके थे और वो मुझे बहुत ही स्वादिष्ट लग रहे थे. प्रिया उछल उछल के लंड के मजे ले रही थी. मैंने भी कस कस के उसकी चूत को ठोके रखा.
कुतिया बना के चूत ठोक दी.
मैंने अब अपना लंड प्रिया की चूत से बहार निकाला. लंड के उपर लगा कंडोम प्रिया ने बदला. मैंने उसे इशारा करते हुए उल्टा किया. वो अब कुतिया बन के अपनी गांड उठा के लेट गई. उसकी चूत से टपकता हुआ पानी मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. मैंने पीछे से उसकी चूत के अंदर लंड दिया और जोर जोर से उसके उपर उछलने लगा. प्रिया की चूत में पुरे का पूरा लंड घप घप होक ठेल रहा था मैं. उसको भी बहुत मजा आ रहा था, तभी तो वो भी अपनी गांड उठा उठा के लंड को और भी अंदर लेती जा रही थी. मैंने उसकी गांड के कुलो को हाथ से चौड़ा किया और उसकी चूत के अंदर बाहर होते हुए अपने लंड को देखने लगा. तभी मुझे लगा की अब मैंने झड़ने वाला हूँ. मैंने लंड के झटके और भी तीव्र कर दिए और पप्रिया भी मेरे लंड को अंदर के मसल खिंच के दबाने लगी. तभी मेरे लंड से 50 ग्राम जितना वीर्य निकला और पुरे का पूरा कंडोम भर गया. मैंने लंड की तह से कंडोम को पकड़ा और धीरे से लंड को बहार किया. प्रिया को मुझ से चुदाई का बहुत ही मजा आया.
उसने हँसते हुए कहा, “क्यों, बाबूजी प्यास बूझी के नहीं.”
मैंने कहा, “आज के लिए काफी हैं इतना, प्यास बूझी लेकिन कल इसी वक्त और प्यास लगेगी तो हम फिर कुँए के पास आएँगे.”
प्रिया बोली, “बाबूजी जब मन करे कुँए के अंदर अपना लोटा डाल के प्यास बुझा लेना.”
मेरे लिए उसने चाय बनाई और मैं चुपके से उसके वहाँ से निकल गया. पप्रिया की चूत का मजा मैंने फिर तो पुरे 4 दिन और लिया. 3 दिन के बाद दुसरे दोस्त भी आ गए और उन में से राकेश को भी मैं प्रिया के पास ले के गया. अब मैं इसी ताक में हूँ की कल्लू जल्द शादी करे और मुझे फिर से हरीयादपुर जाने का अवसर मिले……!!!!

हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब.. मैं आप सबके लिए अपनी सच्ची कहानी लिख रहा हूँ.. आशा करता हूँ.. आप सबको पसंद आएगी।
मेरा नाम सन्तोष कुमार.. मैं आग़रा से हूँ मेरी उम्र 23 साल है.. मैं दिखने में काफ़ी आकर्षक हूँ.. मेरा रंग गोरा और कद 170 सेंटीमीटर का है। मेरा लण्ड काफी लंबा और 3 इंच मोटा है। मुझे सेक्स की बहुत भूख है.. मैं अब तक 5 लड़कियाँ.. 4 आंटियों और 2 भाभियों को चोद चुका हूँ। अब भी मेरी 2 गर्लफ्रेंड हैं जो गाहे बगाहे मुझसे चुदती रहती हैं।
यह कहानी 2012 की है। एक दिन हमारे सामने वाली आंटी के यहाँ मैंने एक सेक्सी हॉट आन्टी देखी, वो चेहरे से ज़्यादा दिलकश नहीं थी.. लेकिन थी बड़ी सेक्सी, उसे देखते ही चोदने का मन करने लगता था।
उन सामने वाली आंटी के यहाँ हमारा काफ़ी आना-जाना था.. क्योंकि वो मेरी मम्मी की सहेली थीं।
उस चोदने लायक औरत को देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैं आंटी के पास पता करने चला गया कि यह कौन है।
आंटी ने बताया- ये नए किराएदार हैं।
मुझे उसकी गाण्ड बहुत ही मस्त लगती थी और मेरे मन में उसकी उठी हुई गाण्ड मारने के और भी अरमान जाग गए। वो ऊपरी मंजिल पर रहती थी.. अब मैं बस उसे ही पटाने में लग गया। सुबह और शाम को अपने दरवाजे पर खड़े होकर उसे ही देखता रहता और दोपहर को आंटी के घर जाकर उससे बात करने की कोशिश करता।
कुछ दिन बाद वो भी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी। मेरे अरमान और भी मचलने लगे थे, अब तो मैं उसकी गाण्ड के बारे में सोच सोच कर मुठ्ठ भी मारने लगा था।
एक दिन दोपहर को मैं आंटी के पास बैठ कर आंटी से बातें कर रहा था.. तो वो भी हमारे पास आकर बैठ गई.. और आंटी से बात करने लगी।
तब पहली बार उसकी आवाज़ सुनी.. उसकी आवाज़ बड़ी ही सेक्सी और मीठी थी। वो तो मेरे दिल में ही उतर गई।
फिर कुछ देर आंटी और वो बात करती रहीं। मैं उसको देखता रहा और सोचता रहा कि कैसे चोदा जाए।
कुछ देर बाद आंटी चाय बनाने चली गईं। अब मुझे भी उससे बात करने का चांस मिल गया, मैंने मौका न गंवाते हुए.. उनसे उनके बारे में बात करने लगा और वो भी जबाव देती रही.. और मुस्कराती रही।
उसका नाम विनीता शर्मा था.. उसकी उम्र करीब 22 साल थी.. उस को अभी कोई बच्चा नहीं हुआ था। अभी उसके जिस्म का कटाव करीब 34-32-34 रहा होगा। उसका पति एक कंपनी मैं जॉब करता था। वो इतना पतला था कि अगर तेज हवा भी आए.. तो ऐसा लगता था कि उड़ ही जाएगा।
मैं विनीता से बात करता रहा और मेरे मन ही मन लड्डू फूट रहे थे, आंटी चाय बना कर आने ही वाली थीं.. तो मैंने विनीता से पूछा- क्या आप मुझसे दोस्ती करेंगीं?
तो वो चुप हो गई.. कुछ नहीं बोली।
तब तक आंटी आ गई थीं.. फिर हम सबने चाय पी और बात करते रहे। चाय पीने के बाद आंटी कप रखने गईं तो मैंने दुबारा से पूछा.. अबकी बार वो मुस्कुरा कर चुप हो गई थी।
जब मैंने कई बार पूछा तो बोली- सोचकर बताऊँगी.. और फिर कटीली मुस्कान देकर अपने कमरे में चली गई।
मैं भी उम्मीद लिए अपने घर आ गया। अब मैं बस उसके जवाब का इन्तजार कर रहा था.. लेकिन दो दिन तक कोई जबाब नहीं आया था। अब तो मुझे उसे चोदने का सपना टूटता सा नज़र आ रहा था। मैं बहुत परेशान रहने लगा था.. कुछ भी अच्छा नहीं लगता था और अब वो दिखाई भी नहीं देती थी.. तो मुझे लगा कि शायद वो मेरी बात से नाराज़ हो गई है।
दो दिन बाद अचानक रात को करीब 11 बजे मेरे फ़ोन पर किसी नए नम्बर से मिस कॉल आई.. मैं तब टीवी देख रहा था।
मैंने कॉल बैक की.. तो दूसरी तरफ जो आवाज़ थी उसे सुनते ही शॉक्ड हो गया और मेरे दिल में बहुत ही खुशी होने लगी, यह विनीता ही थी।
फिर उनसे दोस्ती का जबाव माँगा.. तो विनीता ने ‘हाँ’ कर दी।
अब तो बस मैं पागल सा होने लगा और मेरी कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.. कि क्या करूँ! फिर हम दोनों ने करीब 3 घंटे फ़ोन पर बात की.. उसने बताया कि वो भी यही चाहती थी.. लेकिन कह नहीं पा रही थी। उसने बताया कि उसके पति का लण्ड बहुत छोटा सा है.. उसे उसके साथ चुदाई करने में मजा नहीं आता… उसे तृप्ति नहीं मिलती.. वो वासना की आग में जलती रहती है।
अभी उसके पति की नाइट ड्यूटी चल रही थी तो अब हम रोजाना फ़ोन पर रात को बात करते थे। कई दिन बाद.. उससे रोमान्टिक बातें करने लगा, उसे फ़ोन पर ही चुम्बन करने लगा, उसकी पोपो (दूध) और उसकी चूत के बारे में पूछता रहा।
अब वो गरम हो गई थी और मेरा लण्ड भी कड़क हो गया था। मैं अपने लण्ड को हाथ से सहला रहा था।
मैंने उससे मिलने के लिए कहा तो वो मना करने लगी.. लेकिन जब मैंने ज़्यादा कहा तो वो मान गई..
मेरे और उसके घर सब सो चुके थे तो मैं फोन कट किया.. मैंने कमरे की लाइट और टीवी बंद करके बाहर आया और धीरे से अपने कमरे दरवाजा खोला, मैं बाहर सड़क पर निकल आया और घर का दरवाजा बाहर से ही बंद कर दिया जिससे बाद में वापस आने में परेशानी न हो।
अब मैं आंटी के दरवाजे के सामने खड़ा हो गया.. करीब 10 मिनट बाद आंटी का दरवाजा धीरे से खुला और बिना आवाज किए मैं अन्दर चला गया, उसने धीरे से दरवाजा बंद किया और मैं उसके साथ उसके कमरे की तरफ चलने लगा।
सब लोग अपने-अपने कमरों में सोए हुए थे तो हमको ज़्यादा परेशानी नहीं हुई।
हम दोनों कमरे में पहुँच गए.. कमरे में जाते ही कमरे को अन्दर से बन्द कर लिया। विनीता मुझसे लिपट गई.. उसने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और दबाने लगी, मैंने भी उसे अपनी बाँहों में ले लिया और उसके गुलाबी होंठों को चूसने लगा।
मुझे बहुत मजा आ रहा था.. ऐसा लग रहा था.. जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया होऊँ, मुझ पर एक नशा सा छाता जा रहा था।
करीब 10 मिनट तक मैं उसके रसीले होंठों को चूसता रहा.. उसके बड़े-बड़े मम्मों को उसके ब्लाउज से ऊपर से भींचता रहा.. उसके मम्मे तो ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए मचल रहे थे।
अब मैंने उसे उल्टा खड़ा किया.. अपनी तरफ पीठ करके.. और अपने दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबाने लगा। मैं उसकी गर्दन पर.. कंधे पर.. पीठ पर.. चुम्बनों की बौछार कर रहा था। वो अब गरम हो रही थी और मेरा लण्ड भी खड़ा हो रहा था। जब मैं ज़ोर से उसकी रसभरी चूचियों को दबाता.. तो उसके मुँह से सिसकारी की आवाज़ निकल जाती.. ये मादक दर्द की आवाज़.. हम दोनों को मदहोश कर रही थी।
अब मैंने जल्द ही उसका ब्लाउज और ब्रा उतार फैंके.. उसके लॉन-टेनिस की बॉल की तरह के सख्त और गोल.. गोरे-गोरे मम्मे बड़े मस्त लग रहे थे।
मैंने उसको अपनी तरफ घुमा कर देखा तो उसकी चूचियों देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मैं उसके एक सन्तरे को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को.. दबाने लगा, वो भी अपने हाथों से मेरी पीठ और चूतड़ों को सहला रही थी..
उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी थी- आअहह.. ऊऊहह.. आअहह सस्स्स्स्स्.. ईईई..
मुझे बहुत मजा आ रहा था.. उसकी रसीली चूचियों को पीने और चूसने में..
फिर उसने एक-एक करके मेरे सारे कपड़े खोल दिए और मैंने उसके पेटीकोट और पैन्टी को भी उतार दिया। उसका फोम जैसा मुलायम जिस्म मुझे मदहोश कर रहा था। अब उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी, उसने कहा- मैंने इतना बड़ा लण्ड कभी नहीं देखा है.. आज मैं इससे अपनी चूत की प्यास बुझवाऊँगी।
अब हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे।
मैं एक हाथ उसकी चूत पर ले गया तो देखा.. उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा। कभी चूत में ऊँगली डाल देता और अन्दर-बाहर करता।
वो मेरे लण्ड को खींच कर अपनी चूत के छेद पर लगाने की कोशिश कर थी, यह देख कर मैंने उसे मेरा लण्ड चूसने को कहा.. तो वो बैठ गई और मेरा लण्ड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
वो मेरा लवड़ा चूसने के साथ ही एक हाथ से मेरे गोटियों को भी दबाने लगी.. जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था, मेरी मादक आवाज़ निकलने लगी- आआअहह.. आहहुउऊ.. उउफफ्फ़..
फिर मैंने उसके बाल पकड़े और पूरा लण्ड उसके मुँह में पेल दिया.. मेरा लौड़ा उसके गले तक जा रहा था.. एक तरह से मैं उसके मुँह को चोद रहा था।
वो लण्ड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन मैं निकालने नहीं दे रहा था.. और तेज-तेज उसके मुँह को चोद रहा था।
कुछ मिनट बाद ‘आआहह.. आआआआ..’ करके मेरे लण्ड का रस निकल गया। मेरा पूरा माल उसके मुँह में ही झड़ गया और वो भी मेरे लण्ड का सारा रस पी गई।
अब मैंने उसे खड़ा किया और पलंग के किनारे पर लिटा दिया। मैं एक बार उसके पूरे जिस्म को चूमने लगा.. फिर चुम्बन करते-करते उसकी चूत तक पहुँच गया। उसकी चिकनी की हुई गुलाबी चूत बड़ी मस्त लग रही थी.. मेरा मन कर रहा था कि उसकी चूत को खा जाऊँ।
अब मैं उसकी चूत को चुम्बन करने लगा उसकी चूत से पानी निकल रहा था.. मैं उसे चाटने लगा और वो ‘आहें’ भरने लगी, वो चुदास की मस्ती में मदहोश होने लगी और तेज-तेज मादक आवाजें निकाल रही थी- आअहह.. ऊऊहह.. आआहह.. मैं अपनी जीभ से ही उसे चोदे जा रहा था। मैं कभी-कभी उसकी चूत पर प्यार से काट भी लेता था.. वो चिहुंक जाती थी।
अब उसने अपनी चूत को चिपका कर छुपा सा लिया। वो अकड़ सी गई और ज़ोर-ज़ोर से ‘आहें’ भरी.. और झड़ गई।
मैं उसकी चूत का सारा पानी पी गया.. उसकी चूत के पानी कुछ अजीब सा स्वाद था.. लेकिन मजा आया था।
चूत पीने के बाद मैं अब उसके ऊपर लेट गया और उसे होंठों पर.. उसके गालों पर.. चुम्बन करने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा।
वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी। कुछ देर की इस तरह की मस्ती के बाद मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। अब हमने फिर से 69 की अवस्था बनाई और वो मेरे लण्ड को चूस कर खड़ा करने लगी। मैं उसकी चूत को चाट कर गरमा रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद हम दोनों गरम हो चुके थे।
अब हम दोनों का रुकना मुश्किल हो रहा था तो उसने नशीली सी आवाज में कहा- अब डाल भी दो.. या मेरी जान लेके रहोगे।
फिर मैं उठा और बिस्तर से नीचे खड़ा हो गया और उसे बिस्तर के किनारे खींच लिया। मैंने उसकी टाँगों को फैला कर उसकी चूत पर अपना लण्ड रगड़ने लगा।
वो मचलने लगी- आअहह.. ऊहह..ओह..
उसने बेकाबू होकर मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ कर चूत में घुसेड़ने की कोशिश करने लगी.. पर उसकी चूत टाइट थी तो मैंने सुपारे को चूत की दरार में फंसा कर एक ज़ोर से धक्का लगाया.. 3 इंच लण्ड चूत में घुस गया।
वो मेरे मोटे लौड़े के दर्द से बैचेन होने लगी.. लेकिन मैं जरा भी नहीं रुका और एक और तगड़ा धक्का लगा दिया। मेरा आधा लण्ड घुस चुका था और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। वो मुझे हटाने की कोशिश कर थी।
फिर मैं उसे परेशान देख कर जरा रुका और उसकी चूचियों को दबाने और सहलाने लगा। कुछ देर में वो थोड़ी शांत हुई.. तो मैं एक और करारा धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में समा गया।
इस बार उसकी चीख निकल गई.. तो मैंने अपने हाथ से उसका मुँह दबा लिया, मैं रुक गया और उसे चुम्बन करने लगा.. उसकी चूचियों को दबाने लगा.. ताकि उसे मजा आने लगे और दर्द कम हो जाए।
दो मिनट चुम्बन करने के बाद मैं अब धीरे-धीरे धक्का मारने लगा और उसे चोदने लगा।
कुछ देर चुदने के बाद उसे भी मजा आने लगा और वो नीचे से चूतड़ों को उछाल कर धक्का लगाने लगी।
अब मैं बहुत तेज-तेज धक्के मार रहा था। वो दर्द से भरी मीठी-मीठी आवाजें निकाल रही थी.. जो मेरा जोश बढ़ा रही थी- आअहह.. ओहह.. और जोर से..
वो एकदम से इठ गई और कुछ निढाल सी हो गई.. पर मेरी धकापेल चालू थी। उसे आधा घंटा चोदने के बाद अब मैं झड़ने वाला था.. मैंने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ..
तो उसने कहा- मैं भी आने वाली हूँ।
उसने अपनी चूत को टाइट किया और मुझे चुम्बन करने लगी।
फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए ‘आआअहह ऊहह..ऊओ.. अहह..’
मैंने सारा पानी उसकी चूत मैं निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेट गया।
हम चुम्बन करने लगे।
थोड़ी देर बाद हम दोनों फिर से गरम होने लगे और अब मैं उसे गाण्ड के लिए कहने लगा.. तो उसने मना कर दिया.. फिर किसी और दिन चुदवाने का वादा किया।
कुछ देर आराम करने के बाद मैंने उसे कुतिया की तरह उल्टा करके दो बार और चोदा..
इस चुदाई का दोनों ने भरपूर मजा लिया। सुबह के 4 बजे मैं अपने घर आ गया और सो गया।
अब उसके पति की जब भी नाइट-ड्यूटी होती है तो हम मिलते हैं और चुदाई का आनन्द लेते हैं। मैं उसे बहुत बार चोद चुका हूँ।
अब उसके पेट में मेरा बच्चा भी है। अब विनीता की गाण्ड की चुदाई कैसे की.. आगे फिर कभी मौका मिला तो मैं आप सबको बताऊँगा।
दोस्तो.. अपनी राय देना मत भूलिएगा कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी।

 

एक सुखद सेक्‍स लाइफ के लिए मर्द और औरत दोनों का एक समान भावना का होना बहुत ही आवश्‍यक होता है। लेकिन कभी-कभी सेक्‍स की पूरी जानकारी न होने के कारण दोनों से कुछ न कुछ चूक हो जाती है और दोनो ही एक बेहतर सेक्‍स लाइफ से वंचित रह जाते है। किसी भी मर्द के लिए एक औरत को उत्‍तेजना के चरमोत्‍कर्ष पर पहुंचाना बहुत ही आसान होता है बशर्ते मर्द को इसके सभी तरीकों के बारें में पूरी जानकारी है।

सेक्‍स के दौरान दोनों का आपस में मिलन करना एक दूसरे के अंगो को छूना, चुम्‍बन आदी शामिल होता है। लेकिन क्‍या आप जानते है कि, एक औरत को बगैर छुए ही आप पूर्णरूपेण उत्‍तेजित कर सकते है। यह सुनकर आपको थोड़ी हैरानी जरूर हुई होगी। लेकिन यह सच है इस लेख में हम आपको बताऐंगे क‍ि किसी भी औरत को बगैर छुए कैसे उत्‍तेजित करें। इसके लिए बस आपको थोड़े से नये तरीकों को अपनाना होगा।

कैसे करे औरत को उत्‍तेजित?

1.फूलों का प्रयोग: सुगंध का एक सेक्‍स लाईफ में बहुत ही महत्‍व होता है, और किसी फूल से बेहतर सुगंध का कोई दूसरा बेहतर विकल्‍प नहीं हो सकता है। इस दौरान आप अपने पार्टनर के शरीर को उसके पसंद के किसी फूल से आहिस्‍ते-आहिस्‍ते स्‍पर्श करें, ध्‍यान रखें इस दौरान आपका हाथ उनके शरीर को न छुए। फूल का मुलायम स्‍पर्श आपके पार्टनर को मादकता का अहसास करायेगा और उन्‍हे धीमें-धीमें उत्‍तेजित करेगा।

2.बगैर स्‍पर्श के करीब आयें: फूलों के प्रयोग के बाद धीमें से पार्टनर के करीब आयें लेकिन ध्‍यान रहें इस दौरान आपका शरीर उनसे स्‍पर्श न करें। उसके बाद उनके गले और बालों के महक को महसूस करें, अपने पार्टनर को अपनी तेज सांसो से ऐसा अहसास करायें कि आप उनके बहुत ही करीब हो और किसी भी वक्‍त उन्‍हें स्‍पर्श कर सकतें है लेकिन स्‍पर्श न करें। ऐसा करने के बाद धीमें-धीमें उनसे दूर जायें लेकिन एक अमिट अहसास छोड़ जायें कि आप अभी भी उनके करीब है।

3.अंगूर और स्ट्रॉबेरी का प्रयोग: पार्टनर के इच्‍छा के अनुरूप उन्‍हे उत्‍तेजित करने में फल भी आपको पूरा सहयोग करेंगे। इसके लिए आप अंगूर या फिर स्ट्रॉबेरी को अपने होंठो से दबाकर उनके शरीर पर धीमें से स्‍पर्श करें। इस दौरान फल को पार्टनर के होठों के पास ले जाना न भूलें। लेकिन ध्‍यान रहें शरीर स्‍पर्श न होनें पाये। इसके अलावा आप चॉकलेट या क्रीम का भी प्रयोग कर सकतें है।

4.पंखो से अहसास: पंख का प्रयोग भी किसी भी औरत को बहुत ही प्रिय होता है। इसके लिए आप बेहद ही मुलायम पंख का प्रयोग करें। पंख से धीमें-धीमें पार्टनर के शरीर को स्‍पर्श करें। इस दौरान पार्टनर के गले, चेहरे, होंठ, पैर, और पीठ पर आसानी से बहुत ही प्‍यार से पंख को घुमाऐं।
बात-चीत: ये सारे नुस्‍खें अपनाने के दौरान अपने पार्टनर के कानों के पास आकर धीमीं आवाज में प्‍यार का इजहार करें। याद रखें कि इस वक्‍त सिर्फ आप प्‍यार की बातें ही करें अपने दैनिक जीवन से जुड़ी बातें न करें। इस दौरान आपके प्‍यार के अहसास को पाकर आपकी पार्टनर पूरी तरह उत्‍तेजित हो जायेंगी।

इंडियन किशोरी के कमरे का और मेरे कमरे का एक ही काँमन बाथरूम था जिसका एक दरवाज़ा मेरे तरफ खुलता था और दूसरा उसके कमरे की तरफ. जब मैं अपने कमरे में गया तो बाथरूम से किसी के गाने की आवाज़ आ रही थी, वो कोई और नहीं किशोरी थी मुझे जोरों की पेशाब लगी थी मैं बाथरूम की तरफ गया पर दरवाज़ा अंदर से बंद था. मैंने नॉक किया तो इंडियन किशोरी अंदर से ही बोली-क्या बात है . मैंने कहा- मैं रोक नहीं सकता ,मुझे जोरों की पेशाब लगी है. थोड़ी देर कोई आवाज़ नहीं हुआ फिर दरवाज़ा खुला, मैं दरवाज़ा खुलते ही किशोरी को धकेलते हुए अन्दर भागा और लंड निकाल कर पेशाब करने लगा.
मुझे पेशाब इतने जोरों की लगी थी मुझे याद ही नहीं रहा की किशोरी वही खड़ी है. मेरा लंड बाहर देखते ही किशोरी चिल्ला कर बोली- क्या करते हो, कुछ तो शर्म करो मेरे सामने ही मूत रहे हो बिना दरवाजा बंध किये हुए. मैंने कहा- अरे यार पेशाब करने में शर्म की क्या बात है. किशोरी बोली –अरे ऐसे सब के सामने पेशाब करना शर्म की बात होती है,समझ गए.

अरे ऐसे मत देख चोद दूंगा
इंडियन किशोरी मुझे देख रही थी पर बाथरूम से बाहर नहीं निकल रही थी, मैं भी अपना 8 इंच का लंड हाथ में थाम कर पेशाब कर रहा था, पेशाब लगा हुआ होने के कारण लंड तना हुआ था. किशोरी कभी मेरे लंड को कभी मेरे चेहरे को देख रही थी, मेरा लंड तना हुआ था और चेहरे पर सुकून था जो पेशाब निकलने के कारण था. पेशाब कर लेने के बाद मैंने किशोरी से पूछा-तुझे अच्छा लगा या नहीं, वो बोली-क्या, मैंने नीचे अपने लंड की तरफ इशारा किया. इंडियन किशोरी ने नीचे देखा और शरमाते हुए कहा- इतना लम्बा, इतना लम्बा तो गधे का होता है. मैं अपने लंड के बारे में सुनकर खुश हो रहा था की तभी वो फिर बोली- मगर अपनी मौसेरी बहन को लंड दिखा कर तुम्हें शर्म भी नहीं आ रहा है. उसके मुंह से लंड सुनकर मैं जोश में आ गया और मेरा लंड भी झटके खाने लगा. मैंने कहा-तुम्हारे जैसी मस्त माल यदि बहन हो तो हर भाई का लंड हमेशा खड़ा रहेगा, मेरी बात सुनते ही इंडियन किशोरी हंसने लगी.

इंडियन किशोरी को चोद ही दिया मैंने
मैं आगे बढ़ कर इंडियन किशोरी को अपने बाँहों में भर लिया और उसके होठों को चूसने लगा फिर उसके हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. वो मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी. तभी किशोरी बोलती है -भाई तुम्हारा लंड तो बहुत गरम है और सख्त भी,मैंने कहा ये तेरे ही हुस्न का जादू है और वो नीचे झुक कर मेरे लंड को मुंह में भर कर चूसने लगी,वो काफी अच्छे तरीके से मेरा लंड चूस रही थी, लग रहा था की वो कई बार लंड चूस चुकी है. फिर मैंने उसकी गांड दबाते हुए उसकी पैजामी को नीचे कर दिया और फिर उसकी चूत को सहलाने लगा और चाटने लगा उसके चूत से पानी की धार बह रही थी. कुछ देर इंडियन किशोरी की चूत सहलाने और चाटने के बाद उसको दीवाल के सहारे झुका दिया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और धक्कों के साथ चोदने लगा. वो भी मस्त होकर अपनी गोल गांड पीछे धकेल कर चुदवा रही थी कुछ देर की चुदाई के बाद मैंने उसकी गांड पर अपना पानी छोड़ दिया. फिर उसने अपने चूत  को साफ किया और नीचे बैठ कर पेशाब करने लगी. उसके चूत से सीटी की आवाज़ आ रही थी. फिर हम दोनों अपने -अपने कमरे में जाकर सो गए.

मेरा नाम अंकित है में एक टीचर हूँ. उम्र 25 साल. 5”7 फीट लंबा, में आज आप लोगो को एक मस्त स्टोरी बताने वाला हूँ.
हुआ यू की मेरा एक दोस्त सुन्दर काफ़ी दिन से अपनी एक आंटी को फँसाये था उसे चोदने के लिए जगह खोज रहा था एक दिन मुझसे बोला यार अंकित कोई जुगाड़ कर यार मैने कहा अगर शाम के वक़्त वो आ सके तो में कमरे मे जुगाड़ करवा सकता हूँ रविवार को बाकी दिन तो में कोचिंग पढ़ने जाता हूँ वो बोला बात कर के बताऊंगा.
अगले दिन उसने कहा की आंटी जी रविवार को 8 बजे करीब आ जाएगी में तैयार हो गया रविवार को 8 बजे वो लोग आ गए. में कमरे से चला गया वो लोग चुदाई करते रहे 15 मिनट बाद प्रशांत का फोन आया की आ जाओ काम हो गया में आ गया तो वो आंटी बोली मुझे अपनी e-mail चेक करनी है. मैने अपना कंप्यूटर ऑन कर दिया.
वो सर्च करती रही में उनके बगल मे चेयर डाल के बेठा था. लेकिन उनको कंप्यूटर चलाना नही आता था वो बोली में तो मोबाइल मे चलाती हूँ उन्होने कहा की मुझे चलाना सीखा दो आप मैने अपने हाथ मे माउस लिया तभी उन्होने मेरे हाथ के उपर अपना हाथ रख दिया इस तरह से में सीखाने लगा इधर प्रशांत पिछे से मुझे इशारे कर के कह रहा था की रहने दो.
में भी तोड़ा बोर हो रहा था क्युकी उनको कुछ नही आता था लेकिन तभी मेरी नज़र उनके बोब्स की तरफ गई. मैने देखा की साड़ी का पल्लू नीची था ओर ब्लाउस का 1 बटन खुला था गोरे गोरे बोब्स थोड़े खुले थे. मेरा लंड फंनफना गया लेकिन फिर वो जाने के लिए रेडी हो गई लेकिन जाने के पहले वो मेरे सामने ही प्रशांत से लिपटने लगी. तब प्रशांत ने कहा आप जाओ अंकित बाइक से छोड़ देगा. मैने उनको बाइक पर बैठाया पतली गलियां सूनी थी रास्ते मे वो अचानक से मुझसे लिपट गई बोली की मुझको देख के आपका मन चंचल हो रहा था.
मैने महसूस किया है ये आप उस वक़्त मेरे बारे मे कुछ सोच रहे थे ना तभी उन्होने कहा बस बस यही रोक दो मैने बाइक रोकी वो उतर के मुझसे मेरा मोबाईल नंबर मागने लगी. मैने नंबर दिया रात मे 1 बजे करीब उनका फोन आया वो बोली क्या आप मुझसे मिलना चाहोगे. मैने कहा हा क्यू नही लेकिन प्रशांत को बुरा लगेगा वो बोली तो क्या आप दोनो एक साथ एंजाय नही कर सकते मुझे कोई प्रोब्लम नही है आप बात कर लो मैने साफ मना कर दिया की नही में अकेला ही मिलना चाहूँगा आप तो आज मज़ा ले गई हो तो वो बोली नही यार कुछ नही हो पाया.
मैने पूछा क्यू वो बोली प्रशांत तो अंदर ही नही जा पाया बाहर ही डिचार्ज हो गया हम तो सूखे ही लौटे वहा से प्रशांत कह रहा था की कई दिन से नही किया था ज्यादा जोश की वजह से नही कर पाया. मैने कहा ये तो गड़बड़ हो गई अगर में वहा होता तो ऐसा तो कभी ना होता तो अचानक बोली की में कल आ सकती हूँ वही 8 बजे मैने कहा हाँ बिल्कुल आपका स्वागत है.
अगले दिन शाम को 8 बजने के पहले ही वो आ गई फ़िरोजी कलर की साड़ी पहने सजी धजी एकदम मस्त लग रही थी 50 साल से कम नही थी लेकिन वो 35,36 साल की लग रही थी. मैने गेट लगाया ओर लाइट ऑफ कर दी नाइट बल्ब जलता रहा वो साड़ी उतारने लगी. मैने उनको नंगा करने मे हेल्प की वो ज़्यादा गोरी नही थी लेकिन बहुत सेक्सी लग रही थी उनका जिस्म गठीला था. मैने उनको लेटाया खुद उपर लेट गया ओर चूमना चालू कर दिया बड़े बड़े बोब्स चिकने मैने मूह मे लेकर चूसना शुरू किया वो मस्ती मे आने लगी मेरे लोवर मे हाथ घुसा के मेरे लंड को पकड़ के सहलाने लगी. मैने कहा में कपड़े उतार दू वो बोली हा तो मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए मेरा लंड देख के वो मुस्कुरा उठी बोली वाउ यार यह तो बहुत मजेदार है….
मैने कहा मुह मे लोगी वो बोली हा क्यू नही मुझे लिटा दिया ओर मेरे लंड को मुह मे भर के चूसने लगी उनके खुले बालो मे में हाथ फेरने लगा तभी उन्होने मेरी तरफ देखा उनकी आँखे लाल थी. एकदम एक पल को वो मुझे एकटक देखती रही साथ मे मेरे लंड को सहलाती रही फिर मैने कॉंडम दिया वो लंड मे लगा दिया वो उठी ओर मेरे दोनो तरफ अपनी टाँगे कर के लंड को चूत मे घिसने लगी ओर सिसकारने लगी इधर मेरी हालत खराब हो रही थी में चाह रहा था की वो अंदर घुसा ले तभी उन्होने लंड को अंदर कर लिया.
गीली चूत मे लंड सटाक से अंदर घुस गया तो वो आआआः सीसिसीसीसी आईियायाः बोली ओर मेरे सीने मे दोनो हाथ रख के उचकाने लगी चुदाई मे मज़ा आने लगा था. में उनकी पीठ ओर कुल्हो मे हाथ फेरने लगा वो झुकी ओर मेरे होंठ चूसने लगी वो जितना उचकती उतना ही होंठ चूसती थोड़ी देर बाद वो बोली अब में थक गई हूँ आप उपर आओ.. मैने उनको नीचे लिटा के उनकी चूत मे घुसाता गया एक ही बार मे पूरा लंड अंदर कर दिया वो आ अहहहः अहहा अहहा आहा असीसीसिस सीसीसी सीसिस अहहहहहह कहने लगी. में लगातार चोदने लगा वो मुझसे बोली यार बहुत मज़ा आ रहा आह आ आ मज़ा आ रहा है चोदो चोदो में ये सुन के चोदने मे स्पीड बड़ाने लगा.
अचानक से वो अकड़ने लगी में समझ गया वो झडने वाली है तभी वो मुझको ज़ोर से पकड़ के लिपटने लगी में बिना रुके लगातार चोदने मे लगा हुआ था वो अंत पड़ने लगी मुझे देखने लगी ओर बस बस आ आ कहती रही.. मेरा भी तभी निकल गया में लिपट गया वो भी मुझसे लिपट गई अभी उनके उपर ही लेटा रहा वो कान मे बोली यार मज़ा आ गया कितना चोदते हो तुम मज़ा आ गया यार कितना अच्छा चोदा आपने लगा पहली बार चुदवाया हो थोड़ी देर बाद हम अलग हुए में हाफ़ रहा था.
कुछ देर मे मेरा लंड फिर खड़ा हो गया मैने उनको कहा अब नीचे लेटो ना लेकिन वो बोली नही अब नही में लेट हो गई हूँ काफ़ी टाइम लग गया कल करुँगी इतना कह कर वो तैयार होने लगी. मैने कहा जाने से पहले एक पप्पी दे दो मेरी जान. वो मेरी तरफ देख के मुस्कुराई किस दिया. मैने कहा मुझे नही इसे. तो उन्होने लंड को किस किया बोली बहुत मेहनती है ये कितनी मेहनत की आज. फिर वो चली गई रात मे उनका फोन आया बोली यार बहुत मज़ा आया अब तक में जैसी चुदाई चाहती थी वैसी हुई में वादा करती हूँ आपके अलावा में अब किसी के साथ ये नही करूगी मैने उनसे कई बार कहा की गांड मारने दो लेकिन वो गांड नही मरवाती लेकिन जितना है वो ही बहुत है.
उसके बाद हम अक्सर मिल लेते है वो उम्र होने के बावजूद भी जवान लड़की की तरह मज़ा देती है तो दोस्तो ये थी मेरी कहानी.

 

मेरा नाम कोमल मित्तल है, मैं अठाईस साल की महिला हूँ, भगवान् ने भी गूंथ-गूंथ कर जवानी मेरे अन्दर भर दी थी और ऊपर से दिलफेंक मिजाज़ दिया, कामुक चालू किस्म का शबाब दिया है। सोलहवें साल में ही मेरा मन डोलने लगा था, मेरी उभरती हुई छाती जब मैं खुद भी आईने में देखती तो शरमा जाती, जब बाहर निकलती तो लड़कों की निगाहें वहाँ अटकती देखकर मेरे जवान होने पर मोहर लगा देतीं, छमक-छल्लो, नशे की बोतल सुन मैं कामुक हो जाती।
आखिर मैं एक लड़के को अपना दिल दे ही बैठी, पब्लिक प्लेस में मिलते हुए बात सिनेमा तक पहुंची, वहाँ वो मेरी जवानी को दिल खोल कर मसलता, क्रीम की तरह मेरी चिकनी जांघों पर हाथ लगते तो मैं सिकुड़ जाती।
सिनेमा से बात उसके घर तक पहुंची। एक दिन वो अकेला था और मुझे अपने बेडरूम तक ले गया वहां में बहक गई और अपनी जवानी लुटा बैठी। उसके बाद चुदाई का जो चस्का लगा, जो लगा कि बस फिर क्या बताऊँ ! कई लड़कों के साथ मेरा चक्कर चलने लगा और अपनी गूंथी जवानी में लुटाती रही, दबवाती रही।फिर एक दिन मेरी शादी एक बहुत बड़े घर में हुई। मेरे पति का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बहुत बड़ा कारोबार था। मैंने भी एम.कॉम कर रखी थी, जल्दी ही मैंने अपने पति के साथ उनका बिज़नस सम्भाल लिया लेकिन वो ज्यादातर घर से बाहर रहते, देश से बाहर भी जाना पड़ता, बिज़नस तो संभाल लिया लेकिन यह जवानी कैसे संभालती? चुदाई के बिना रहना मेरे लिए मुश्किल था, मर्द के बिना मैं नहीं रह पाती, शादी के बाद से वैसे ही सिर्फ एक लौड़े पर टिकी हुई थी। वो भी मुझे कभी संतुष्ट करता, कभी नहीं करता ! फिर भी ऊँगली, बैंगन से सार लेती(काम चला लेती) मेरे पति वैसे भी मुझे से बड़े उम्र के हैं। मैं एक मध्यम परिवार से उठ कर अमीर घर में आई थी।
एक दिन मैं अपने ऑफिस गई, वहां मेरी सहेली का फ़ोन आया, वो मुझे मिलने आ रही थी।
मैंने उसे कहा- ऑफिस ही आ जाओ !
मैंने बहुत आलीशान ऑफिस बनवा लिया था, पीछे एक आराम-कक्ष और एक छोटी सी लॉबी !
वो बोली- कोमल। ठण्डी बीयर मंगवा यार ! बहुत मन है !
मैंने अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा- बिना किसी को दिखाए बीयर और कुछ खाने को लेकर आओ !
हम दोनों ने बैठ कर बीयर की चुस्कियाँ ली और फिरफिर उसको कॉल आई, उसको जाना पड़ा। मुझे सरूर सा हो चुका था। मैंने अकेले बैठने की बजाये उसको अपने सेक्रेटरी विनोद को अन्दर बुला लिया और अपने साथ बैठाया, उसको बीयर पिलाई और उसके साथ थोड़ा खुलने सी लगी।
वो बहुत मर्दानगी वाला मर्द दिखता है और अन्दर से मैं उस पर फ़िदा थी। आज मौका था, मैं उठी और उसकी गोद में बैठ गई। वो एक दम चौंक सा गया लेकिन मैं कुछ और सोच चुकी थी। उसे भी समझते देर न लगी। उसने मुझे जकड़ कर अपने होंठ मेरे होंठों में डाल दिए। उसने भी अपना हाथ मेरे टॉप में घुसा दिया और मेरे चुच्चे दबाने लगा। उसका लौड़ा खड़ा हो चुका था, उसकी चुभन का एहसास होने लगा था मुझे !
उसने कहा- मैडम, थोड़ी बीयर और हो जाए ! मैं मंगवाता हूँ !
मैंने कहा- इस हालत में छोड़ कर ?
नहीं मैडम ! बाहर संजू है न ! अपना ही पट्ठा है, बहुत दमदार है वो भी !
मैं तो वासना की भूखी थी, नशे में थी ! हाँ कह दी ! उसी हालत में उसे अन्दर बुला लिया। मेरे निरावृत वक्ष देख उसकी आंखें चमक उठी।
जा चार चिल्ड-बीयर ले कर आजा !
उसके जाते ही उसने मेरी जींस भी उतार दी, खुलकर हाथ मेरी जांघों पर फिराने लगा।
वाह क्या माल हो !
उसने मुझे वहाँ से अपनी मजबूत बाँहों में उठा मेरे रेस्टरूम में बिस्तर पर फेंक दिया और मेरे ऊपर आते हुए उसने अपना मोटा लंबा लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया, मैंने हंसकर मुँह में डाल लिया। एक हाथ से वो मेरी चूत मसल रहा था और उधर लौड़ा चुसवा रहा था, उसने टाँगे खोल अपना लौड़ा चूत में डाल दिया, मुझे इतना मजा आया जब उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत के अन्दर बाहर होने लगा। कितने दिन बाद मर्द का सुख मिल रहा था।
इतने में संजू वहाँ आ पहुंचा, उसने बीयर मेज़ पर रख दी, वहीं खड़ा होकर चुदाई देखने लगा, साथ में अपना लौड़ा भी मसल रहा था।
मैंने वासना और नशे की झोंक में उसको अपने पास बुला लिया बीयर का मग मांगने के बहाने ! जैसे ही पास आया मैंने उसकी जिप खोल दी और उसका लौड़ा अब मेरी आँखों के सामने था। बहुत बढ़िया लौड़ा था उसका ! मैं घोड़ी बनी हुई थी, उसने अपनी पैंट उतार दी, मेरे सामने घुटनों के बल बैठ अपना लौड़ा मेरे होंठों पर रख दिया। मैंने झट से मुँह में भर लिया। मैं नशे में पागल थी।
इसी बीच वो उठा और बीयर का मग मेरे मुँह को लगा दिया, मैंने भी पूरा खींच लिया।
अब वो मेरे बाल पकड़कर लौड़ा चुसवाने लगा- साली, कमीनी, रांड चूस इसको !
बहनचोद ! साले ! चूस रही हूँ कुत्ते !
पीछे से झटके तेज़ हो गए और आगे से लौड़ा स्वाद था। अब मुझे नशा ज्यादा हो गया। विनोद ने अपना सारा माल मेरी चूत में उतार दिया था, वह हांफते हुए बगल में गिर गया, संजू पीछे गया और चूत मारने लगा, साथ साथ ऊँगली गांड के अन्दर बाहर करने लगा। उसने काफी थूक लगाया और गांड के छेद पर अपना लौड़ा रखकर झटका दिया। मैं पहले से तैयार थी उसके इस वार के लिए- अह अह थोड़ा प्यार से करो ! गांड है राजा !
उसने जल्दी ही पूरा अन्दर डाल दिया और मेरी गांड मारने लगा।
विनोद ने अपना लौड़ा फिर से मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उसको खड़ा करने के लिए हर अदा दिखा रही थी।
संजू तेज़ और तेज़ होता गया, गांड मार रहा था, कसी हुई थी, जल्दी उसकी पिचकारियाँ छूटने लगीं।
वाह मेरे लाला ! बहुत बढ़िया गांड मारता है तू !
दोनों मेरे ऊपर लुढ़क गिरे थे, दोनों के लौड़े हाथ में ले लिए, एक पक्की रांड की तरह उनके बीच नंगी लेटी हुई थी।
एक एक ग्लास बियर डकार कर बोला- मजा आया?
मैंने कहा- पूरा नहीं !
लेकिन फिर भी बोला- साली तू मालकिन नहीं आज रांड है अपने स्टाफ के मर्दों की !
समय देखा तो काफी हो चुका था, मैंने कहा- सालो, तुम दोनों से में अच्छी तरह ठंडी नहीं हो पाई !
मैडम फिर रुक जाओ, बाकी सबको भेज देते हैं ! साब कौन सा इंडिया में हैं !
मैडम आपके लिए दो और लौड़े तैयार हैं ! पीछे देखो !! पीछे कौन खड़ा है?
और मैंने क्या देखा ? फिर पूरी रात क्या हुआ ?
जानने के लिए इसका अगला भाग ज़रूर पढ़ना ! अभी आगे काफी कुछ है !
अनजान लड़की को रखेल बनाया
मेरा नाम रोशन है. मैं मुंबई का रहने वाला हु. मैं इस वेबसाइट का रेगुलर रीडर हु और मुझे इस वेबसाइट पर लिखी हुई सारे सेक्स अनुभव और सेक्स कहानिया बहुत पसंद है. जब भी मुझे टाइम मिलता है, मैं ये वेबसाइट खोल कर आप सबके सेक्स अनुभव और सेक्स कहानिया पढने बैठ जाता हु. मैं आज मैं आपको सच्चा अनुभव सुनाने जा रहा हु. बात उस समय की है. जब मुझे नई जॉब मिलने की वजह से दिल्ली आना पड़ा. दिल्ली में मेरा एक दोस्त रहता था. उसने मेरे रहने का बंदोबस्त किया. मेरे आने से पहले ही मेरे लिए ओने रूम सेट विथ किचन और बाथरूम बुक किया, रेंट पर.

अब मैं अपना सामान पैक कर जाने की तैयारी कर रहा था. ट्रेन का रिजर्वेशन किया और दिल्ली के लिए रवाना हो गया. मेरी सीट खिड़की के पास थी और ट्रेन काफी खाली थी. ज्यादा लोग नहीं थे और मैं टाइम पास करने के लिए दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया. तभी टीसी आया और उसने मेरा टिकेट चेक किया और आगे जाकर और टिकेट चेक करने लगा. तो मैंने देखा, कि एक २० से २२ साल की लड़की पुराने से कपड़े में उससे हलके आवाज़ में बात कर रही थी और टीसी टिकेट चेक किये जा रहा था. तब मैं वहां पर गया और उससे मेटर के बारे में पूछा. उसने बताया, कि उसके पास टिकेट नहीं है और टीसी उसे ट्रेन से उतरने को कह रहा है अगले स्टेशन पर. मुझे बहुत बुरा लगा और मैंने उसका टिकेट बनवाया और फाइन भी भर दिया. टीसी ने उसे मेरे बाजु वाली सीट दे दी और चले गया. अब मैं उससे बात करने लगा था. पहले तो वो मुझसे झूठ बोल रही थी. पर बाद में उसे पता नहीं क्या हुआ, वो मुझसे सच बोलने लगी और अपनी सच्ची स्टोरी बतानी शुरू कर दी.
उसने बताया, कि उसका बाप शराबी है और माँ मर चुकी है. उसका बाप उससे घर पर बहुत तंग करता है. वो घर से भाग कर आई है. उसके पास कोई पैसे भी नहीं है. बात करते – करते सफ़र कट गया और दिल्ली स्टेशन आ गया और मैं अपना सामान उठा कर उतर गया. वो लड़की भी चली गयी. मैं ऑटो स्टैंड पर पहुच गया. मैं पीछे मुड़कर देखा, तो वो मेरे पीछे ही खड़ी थी. मैंने उससे पूछा, कि अब वो क्या करेगी और कहाँ जायेगी.
वो बोली – पता नहीं. दिल्ली शहर उसके लिए बिलकुल नया है और वो अपने गाँव से कभी भी बाहर नहीं निकली है. तब मैंने उसे पूछा, कि अगर तुम्हे एतराज़ ना हो, तो तुम मेरे साथ मेरे घर पर चल सकती हो. उसने भी मना नहीं किया. उसके पास कोई और चारा भी तो नहीं था. हम दोनों साथ में घर गये. मेरे दोस्त ने सारा अरेंजमेंट किया हुआ था. घर में सिर्फ २ ही रूम थे और घर पहुच कर मैं फ्रेश होने चला गया.
वो एक कोने में ही बैठी थी. मैं वापस आया. तो उसे भी फ्रेश होने को कहा. उसने कहा, कि उसके पास कपडे भी नहीं है. मैंने उसे अपना कुरता – पयजामा दिया. उसने पहन लिया और रात को मैं हॉल में और किचन में सोयी. दुसरे दिन, मैं सुबह ड्यूटी पर चले गया और वो घर में पूरा दिन. जब मैं शाम को लौटा, तो देखा उसने पूरा घर साफ़ करके रखा और मेरे लिए खाना भी बना दिया था. मैं तो बहुत खुश हो गया.
मैंने उससे को कहा, कि चलो कहीं बाहर चलते है. ताकि मैं तुम्हे कुछ कपड़े दिला दू और तुम वो पहन सको. मैं उसे एक पास के शौपिंग मॉल में ले गया और कुछ कपडे लिए, उसके लिए. इस तरह थोड़े दिन गुज़र गये. फिर एक दिन, मैं काम से जल्दी घर आ गया और उसे कहीं बाहर घुमाने के लिए ले गया. जब मैंने उसको अपनी बाइक पर बैठने को कहा, तो उसने मना किया और कहा – उससे इस से डर लगता है. तब मैंने उसे कहा – तुम डरो मत, मुझे पीछे से कस कर पकड़ लेना.
मेरे इस तरह से कहने से वो बाइक पर बैठ गयी. तब पहली बार, मुझे कुछ अनोखा महसूस हुआ. पूरा दिन काम में बिजी होने की वजह से, मैंने कभी उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया. लेकिन उसमें कुछ तो बात जरुर थी. जब वो मेरे साथ बाइक पैर बैठी, उसके नरम नीबू मेरी पीठ को छु रहे थे. मुझे भी मज़ा आ रहा था. हम होटल गये. कुछ खाया, थोड़ा घुमे और फिर घर वापस आ गये.
रास्ते में खूब बारिश होने लगी. हम पुरे भीग गये थे. हम घर पहुचे, तब मैंने उसको देखा. उसका पूरा बदन भीगा हुआ था और वो काँप रही थी. मैंने उससे कपड़े बदलने को कहा. वो किचन में गयी और कपड़े बदलने लगी. मैंने भी चेंज किया और तभी लाइट चली गयी और जोर से बिजली कड़कने लगी और वो भाग कर आई और मुझसे लिपट गयी. उसने कहा, कि उसे बिजली से बहुत डर है.
उसने मुझे कास कर पकड़ा हुआ था. मैंने भी मना नहीं किया. क्या बताऊ यारो.. मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा. उसका पूरा बदन मेरी बाहों में था. उसके छोटे – छोटे नीम्बू मेरे सीने को छु रहे थे. तभी लाइट वापस आ गयी. मैंने देखा, कि वो सिर्फ कमीज़ में है और उसने सलवार भी नहीं पहनी हुई थी. मैं सिर्फ शॉर्ट्स में था. वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी. मैंने भी मौके का फायदा उठाया. उसकी कमर पर हाथ फेरा, तो देखा उसकी पेंटी पूरी भीगी हुई थी.
मैंने उसके चुतड जोर से दबाये. उसने मना नहीं किया. मैंने उससे कहा, तुम इसे उतार दो. मैंने उसे कमीज़ उतारने के लिए मद्दत भी करी. वो अब मेरे सामने बिलकुल नंगी खड़ी हुई थी. मेरा लंड तो बम्बू की तरह खड़ा हो गया था. मैंने देर ना करते हुए, उसके होठो पर होठ रखे और जोर से चूसने लगा.
उसने भी मना नहीं किया. बहुत मजेदार होठ थे उसके. नरम गुलाब की पंखुड़ी की तरह. फिर उसकी चूची पर हाथ फेरने लगा. क्या नरम थी यारो. एकदम मुलायम और उसको मुह में लेकर चूसने लगा. वो उफफ्फ्फ्फ़ उफफ्फ्फ्फ़ आआअह्हह्हह ऊऊओह्हह्हह करने लगी थी. करीब १५ मिनट तक ये ही चलता रहा. वो एकदम मदहोश होकर मेरा साथ देने लगी थी. मैंने फिर उसे अपने बेड पर लिटाया और उसके पुरे बदन को चाटने लगा. नीचे आया, तो देखा; उसकी चूत पर हलके – हलके बाल थे.
उसकी चूत एकदम लाल, बिलकुल कश्मीरी शीप की तरह थी. मैंने देर ना करते हुए, उसकी चूत पर मुह रख दिया. वो बुरी तरह से मचल उठी. उसकी चूत – चूत पानी छोड़ने लगी थी. क्या खुशबु थी यारो.. वो कुछ भी नहीं बोल रही थी. चुपचाप मज़ा ले रही थी और अजीब तरह की आवाज़े निकाल रही थी अहहहः अहहहः एकदम उसका बदन अकड़ने लगा और वो झड़ गयी. हम थोड़ी देर तक शांत रहे और फिर मैंने अपना लंड निकाला और उसे चूसने को कहा. तो एकदम दंग रह गयी.
उसने पहले तो मना किया, कि उसने कभी पहले इतना लम्बा लंड नहीं देखा था. लेकिन मेरे कहने पर उसने अपने मुह में लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी. मेरी गोटियो से खेलने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. करीब १० मिनट ये ही चलता रहा. बाद में झड़ गया और उसने मेरे लंड को मुह से निकाला और पानी जमीन पर फेंक दिया. अजीब सा लगा, मुझे ये देख कर. पर ये सब उसका पहली बार था. फिर मैंने देर ना करते हुए, उसे लिटाया और उसके ऊपर लेट गया. अब मैंने अपना लंड उसकी कंवारी चूत पर रखा और वो एकदम से डर गयी और बोली – प्लीज मत करो. बहुत दर्द होगा मुझे.
मैंने उससे कहा – डरो मत. कुछ नहीं होगा. मैंने क्रीम लिया और थोड़ा उसके चूत पर लगाया और थोड़ा मेरे लंड पर. फिर मैंने धीरे से चूत के अन्दर डाला. जैसे ही मेरा टोपा उसकी चूत के अन्दर गया, उसने मुझे धक्का दे दिया और कहने लगी, बहुत दर्द हो रहा है. मैंने और क्रीम लगाया और एक हल्का सा धक्का लगाया, तो उसने एक तेज चीख मारी – ऊऊऊऊईईईईइमा…. मर गयीईईईइ … और ये कह कर रोने लगी. मैंने भी बेरहम होकर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समां गया.
अब वो जोर – जोर से रोने लगी थी और कुछ देर बाद जब शांत हुई, तो मैंने फिर उसे चोदना शुरू किया. अब मैं अपने पुरे लंड को उसकी चूत से अन्दर – बाहर कर रहा था. उसकी चूत मस्त टाइट थी यार… एकदम गरम और वो जोर – जोर से चिल्ला रही थी अहहः अहहहः ऊऊऊऊईईईईइमा ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़् … मेरे बिस्तर की चादर पूरी भीग चुकी थी. वो थोड़े समय के लिए बेहोश भी हो गयी थी. फिर मैंने लंड वापस से उसकी चूत में डाला और इस बार उसे उतना दर्द नहीं हुआ.
मैंने अपने होठो से उसके होठो को दबा लिया और चोदने लगा. वो पूरी तरह से काँप रही थी, जैसे मछली बिना पानी के. पूरा घर छप – छप – छप – छप – छप की आवाजो से गूंज रहा था. वो मदहोश होकर गांड उठा – उठा कर मेरा साथ दे रही थी. करीब १० मिनट में वो झड़ गयी. पर मैं उसे चोदता रहा और थोड़े समय के बाद, मैं भी झड गया. फिर मैंने उसके अपनी गोद में उठाया और सीज़र पोजीशन में चोदा.
उसे भी बहुत मज़ा आने लगा था और मैंने उसे उल्टा लिटाया और उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रखा और धीरे से घुसाया. एकदम प्यार से, ताकि उसे ज्यादा दर्द ना हो. हमने अलग – अलग तरीके से चुदाई की और अब वो मेरी रखैल बन गयी. अब जब भी मुझे मन करता, मैं उसे चोदता रहता हु, चाहे दिन हो या रात. वो मुझे कभी मना नहीं करती.

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