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एक गाँव की मजबूर लड़की की चुदाई - मजबूरी का फायदा उठाया और घोड़ी बना कर चोदा

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ट्रेन से उतरते ही सीता की जान में जान आ गई। वो भगवान का शुक्रिया अदा की। बिहार की ट्रेन में भीड़ ना हो ये कभी हो नहीं सकता। इसी भीड़ में गाँव की बेचारी सीता को अपने पति श्याम के साथ आना पड़ा। श्याम जो कि T.T.E. है। हालाँकि वो भी गाँव का ही है मगर नौकरी लगने के बाद उसे शहर रहना पड़ा। 6 महीने पहले दोनों की शादी हुई थी। शादी के बाद श्याम ज्यादा दिन तक अकेला नहीं रह पाया । काम के दौरान वो काफी थक जाता था। फिर घर आकर खाना बनाने का झंझट। मन नहीं करता खाना बनाने का पर क्या करता? होटल में अच्छा खाना मिलता नहीं । कभी कभी तो भूखा ही रह जाता। ऐसा नहीं है कि वो महँगे होटल में नहीं जा सकता था। मगर सिर्फ पेट की भूख रहती तब ना। उसे तो नई नवेली पत्नी सीता की भी भूख लग गई थी। आखिर क्यों नहीं लगती? सीता थी ही इतनी सुंदर । पूरे गाँव में तो उतनी सुंदर कोई थी ही नहीं। तभी तो उसकी शादी एक नौकरी वाले लड़के से हुई । श्याम जब सीता को पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। एकदम चाँद की तरह चमकती गोरी रंग, नशीली आँखें, गुलाबी होंठ,कमर तक लम्बे लम्बे बाल,नाक में लौंग, कान में छोटी छोटी बाली, गले में पतली सी Necklace जिसमें अँगूठी लटकी थी।सफेद रंग की समीज-सलवार में सीता पूरी हुस्न की मल्लिका लग रही थी। दोनों के परिवार वाले देख चुके थे, पर सबकी इच्छा थी कि ये दोनों भी एक-दूसरे को देख लें तो अच्छा रहेगा। सीता अपने भैया-भाभी के साथ श्याम को देखने गाँव से 5 किलोमीटर दूर एक मंदिर में गई थी।गाँव में शादी से पहले लड़के का घर पर आना तो दूर, बात करना भी नहीं होता है। पर श्याम के परिवार वाले की जिद के कारण एक मुलाकात हो सकी ।
तय समय पर श्याम अपने एक दोस्त के साथ सीता से मिलने गाँव के बाहर मंदिर पर पहुँच गया था। अभी तक सीता नहीं पहुँची थी। दोनों वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठ कर सीता के आने का इंतजार करने लगे। श्याम के मन में काफी सवाल पैदा हो रहे था। अजीब कशमकश था, पता नहीं गाँव की लड़की है कैसी होगी? रंग तो जरूर सांवली होगी। खैर रंग को गोली मारो, अगर शारीरिक बनावट भी अच्छी मिली तो हाँ कर दूँगा। पर अब हाँ या ना करने से क्या फायदा। जब माँ-बाबूजी को रिश्ता मंजूर है तो मुझे बस एक आज्ञाकारी बेटा की तरह उनकी बात माननी थी। सब कह रहे हैं अच्छी है तो अच्छी ही होगी।अच्छा
वो आएगी तो मैं बात क्या करूँगा? साथ में उसके भैया-भाभी भी होंगे तो ज्यादा बात भी नहीं कर पाऊंगा।अगर पसंद आ भी गई तो बात नहीं कर पाऊंगा।फिर तो शादी तक इंतजार करना पड़ेगा। शहर में ही ठीक था। आराम से मिल सकते थे,बात करते, date पर जाते वगैरह वगैरह। पर यहाँ बदनामी की वजह से कुछ नहीं कर सकते भले ही आपकी उससे शादी क्यूँ ना हो रही हो
तभी मोटरगाड़ी की तेज आवाज से श्याम हड़बड़ा गया।सामने देखा सीता अपने भैया-भाभी के साथ पहुँच गई ।सीता को देखते ही श्याम को जैसे करंट छू गया हो। उसके मन में अब एक ही सवाल रह गया था," गाँव की लड़की इतनी सुंदर कैसे? मैं तो बेकार में ही इतना सोच रहा था"
तभी उसे अपने दोस्त का ख्याल आया। उसकी तरफ देखा तो उसे तो एक और झटका लगा। साला मुँह फाड़े एकटक देख रहा था, मन तो किया दूँ साले को एक जमा के। पर चोरी से ही एक केहुनी दे दिया तो लगा वो भी सो के उठा हो। फिर मेरी तरफ देख के शैतानी मुस्कान दे रहा था साला। खैर हमने उसे एक तरफ करके भैया भाभी को प्रणाम किया। फिर भैया कुछ बहाने से गाड़ी से 5 मिनट में आ रहा हूँ बोल के चले गए।
"आपका नाम?" भाभी मेरे दोस्त की तरफ देखते हुई पूछी
"जी..मैं... मैं... रमेश। श्याम की दोस्त।" आशा के विपरीत हुए सवाल से साला अपना Gender भी भूल गया।
पर भाभी मुस्कुराती हुई बोली,
"रमेश जी, इन्हें कुछ देर के लिए अकेले बात करने देंगे तो अच्छा रहेगा।तब तक हम दोनों कहीं एकांत में चलते हैं।"
रमेश चुपचाप भाभी की तरफ बढ़ने लगा।
"और हाँ श्याम जी... अभी सिर्फ बात करना और कुछ नहीं । मैं पास में ही हूँ, बातें नहीं सुन सकती पर देख जरूर रहुँगी ही..ही...ही" भाभी हँसती हुई रमेश के साथ मंदिर के बाहर निकल गई।
अब मैं भला क्या बात करता? सामने साक्षात परी जैसे लड़की खड़ी जो थी। मैं सिर्फ नाम ही पूछ सका। आवाज भी इतनी मीठी कि कोयल भी शर्मा जाए। बाकी के 10 मिनट तो बस सीता को देखता ही रहा। गजब की थी सीता। ऊपर से नीचे तक देखा पर कहीं से भी मुझे कमी नजर नहीं आई।वो अपनी नजरें नीची किए हुए मंद मंद मुस्कुराती रही। कभी कभी जब मेरी तरफ देखती तो लगता अपने आँखों से ही मुझे घायल कर देगी।
तभी मुझे भाभी और रमेश आते हुए दिखे। मुझे तो उम्मीद ना की ही थी, फिर भी फोन के लिए पूछ लिया। वो ना में गर्दन नचा दी। पर मैं फिर भी काफी खुश था।
"क्यों श्याम जी, बात तो कुछ किए नहीं! लगता है आपको हमारी सीता पसंद नहीं आई। घर जाकर बाबूजी को मना कर दूँ क्या?" भाभी आते के साथ ही पूछ बैठी।
"नहीं..नहीं.. भाभी जी। मुझे तो पसंद है बाकी इनसे पूछ लो" हड़बड़ाते हुए मैंने कहा जैसे किसी बच्चे से टॉफी माँगने पर बच्चा हड़बड़ा जाता हो।
मेरी बात सुनते ही सब ठहक्का लगा कर हँसने लगे। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ तो मैं भी शर्मा के मुस्कुरा दिया।
"तब तो लगता है कि जल्द ही आप दोनों फँसोगे क्योंकि सीता को भी आप पसंद आ गए" भाभी बोली
"पर भाभी जी आपने तो इनसे पूछा ही नहीं फिर कैसे आप समझ गई?" तभी रमेश बोल पड़ा।
"क्यों ? आपके दोस्त के पास क्या कमी है जो पसंद नहीं आएँगे? अच्छे खासे गबरु जवान लग रहे हैं। बॉडी भी काफी अच्छा है। दिखने में भी अच्छे हैं। सरकारी नौकरी करते हैं। मैं अगर कुवांरी रहती तो मैं ही शादी कर लेती इनसे।" एक बार फिर हम सबको हँसी आ गई भाभी की बात पर। तभी मोटरगाड़ी की आवाज सुनाई दी। भैया भी तब तक आ गए। हमें एक अच्छे लड़के की तरह घर जाना ठीक लगा अब। मैंने उन लोगों से इजाजत ले कर रमेश के साथ निकल गया।
दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। श्याम अपने सुहागरात को ले काफी व्याकुल था। आखिर क्यों ना हो इतनी सुंदर बीबी जो मिली ।लाल जोड़ों में तो सीता और भी कहर ढा रही थी। सुहागरात के लिए सीता कोई खास सोची नहीं थी
थोड़ी सी डर जरूर थी कि पहली बार सेक्स करूँगी तो पता नहीं कितना दर्द होगा। भाभी कहती थी कि पहली बार दर्द होती है, मैं सह भी पाऊंगी या नहीं। अगर ना सह पाई तो कहीं नाराज हो गए तो क्या करूँगी।हमें तो ठीक से मनाना भी नहीं आता।इसी उधेड़बुन में खोई सीता पलंग पर बैठी थी।
तभी हल्की आहट से दरवाजा खुला और श्याम अंदर आ गए।सीता देखते ही उठ के खड़ी हो गई।
"अरे ! खड़ी क्यों हो गई?" श्याम प्यार भरी व्यंग्य से सीता से पूछा।
कुछ सोचने के बाद सीता फिर से बैठ गई और श्याम को हल्की नजरों से देखने लगी।
श्याम तो बेसब्र था ही अपने मिलन को लेकर, पर सीता को महसूस नहीं होने देना चाहता था कि मैं व्याकुल हूँ। उसने एक गंजी और तौलिया पहन रखा था। वो सीता के पास आकर बैठ गया और सीता को देखने लगा। सीता अपने तरफ देखते देख शर्मा कर अपनी नजरें दूसरी तरफ कर ली।
"क्या हुआ? डर लग रहा है क्या?" श्याम धीरे से पूछा
कोई जवाब ना पाकर श्याम बोला," मैडम, हम दोनों शादी किए हैं।कोई प्रेमी नहीं हैं जो डर रही हैं। आज हमारी पहली रात है तो थोड़ी शर्म हमें भी आ रही है।अगर आपकी इजाजत हो तो हम ये शर्म दूर कर लें।" श्याम ने सलाह और सवाल दोनों एक साथ कर दिए।
अब बेचारी सीता क्या कहती? श्याम कुछ जवाब ना पाकर सीता के और निकट हो गया और गले से लगा लिया। सीता का चेहरा शर्म के मारे लाल हो गया था। आज जिंदगी में पहली बार किसी मर्द ने छुआ था। मर्द की बाँहेँ औरत को कितना आनंद देती है, बेचारी सीता को क्या मालूम? अभी तो वो बस श्याम के सीने में सहमी सटी हुई थी।
सीता की तरफ से कोई Response ना पाकर श्याम थोड़ा परेशान होने लगा, मगर आज पहली मुलाकात की वजह से ज्यादा कुछ करना ठीक नहीं समझा। उसने सीता के दोनों कंधे पकड़ कर हल्के से अलग किया। फिर अपना चेहरा सीता के काफी निकट ले जाकर धीमी आवाज में कहा," I Love you सीता ! पता है पहली बार तुम्हें देखते ही मुझे प्यार हो गया था। उस दिन से मैं तुम्हारा पल-पल इंतजार कर रहा हूँ।अपने दिल का हाल कहना था तुमसे।ढेर सारा प्यार करना चाहता हूँ तुमसे और तुम्हारी ढेर सारी बातें सुननी थी हमें।"
सीता नजरें नीची किए मूक बनी बैठी थी
सीता के बगल में बैठा श्याम कंधों पर हाथ रखकर सीता के गालोँ को सहलाने लगा। स्पर्श पाकर सीता अजीब रोमांच से भर गई। श्याम अब अपना चेहरा सीता के कंधों पर रख दिया जो कि सीता के गालोँ से सट रही थी। सीता का रोम रोम श्याम के गर्म साँसोँ से सिहर गया। सीता के जिस्म की खुशबू श्याम को मदहोश कर रही थी। श्याम अपना दूसरा हाथ बढ़ाकर सीता के चेहरे को अपनी तरफ किया जिससे सीता के होंठ श्याम के होंठ के काफी निकट हो गए। दोनों की गर्म साँसें टकरा रही थी। सीता आगे होने वाली का चित्रण को याद कर तेज साँसें लेने लगी और उसके होंठ कंपकंपाने लगे। श्याम ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और होंठ सीता के तपते होंठों से चिपका दिए।
श्याम तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया सीता के अनछुई होठोँ का रस पाकर। सीता के तो अंग अंग सिहर गए अपने जीवन की पहली चुंबन से। अंदर से वो भी काफी उत्तेजित हो गई थी मगर शर्म की वजह से बर्दाश्त कर रही थी। मगर बकरा कब तक अपने जीवन की खैर मनाती। श्याम जैसे ही सीता के चुची पर अपना हाथ रखा, सीता चिहुँक के श्याम को दोनों हाथों से जकड़ ली। श्याम तो अब और कस के होठोँ को चुसने लगा और चुची को धीमे धीमे दबाने लगा।कुछ ही देर में जोरदार चुंबन से सीता की साँसे उखड़ने लगी थी। मगर श्याम इन सब से अनभिज्ञ लगातार चूसे जा रहा था। अंततः सीता बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने होंठ पीछे खींचने लगी तब श्याम को महसूस हुआ। श्याम के होंठ अलग होते ही सीता जोर जोर से साँस लेने लगी और सामान्य होने की कोशिश करने लगी। श्याम के हाथ अभी भी सीता के चुची को सहला रहा था।
कुछ सामान्य होने पर श्याम ने सीता को प्यार से पूछा," जान, तुम इतनी मीठी हो कि हमें पता ही नहीं चला कि अब ज्यादा हो गया है और तुम्हें दिक्कत हो रही है।"
अब तक शायद सीता में भी कुछ हिम्मत आ गई थी। वो शर्माती हुई बोली," कम से कम साँस भी तो लेने देते।"
"ओह जान सॉरी ! आगे से ख्याल रखूँगा।"कहते हुए सीता को अपनी बाँहो में समेट लिया। सीता भी मुस्कुराती हुई श्याम के सीने से चिपक गई।
"जान! जब होंठ इतने रसीले हैं तो और चीज कितनी रसीली होगी।" श्याम थोड़ा मजाकिया मूड में पूछा
सीता शर्म से कुछ बोल नहीं पा रही थी,बस मुस्कुरा रही थी।
कुछ देर चिपके रहने के बाद श्याम हटा और अपना गंजी खोलते हुए कहा,"जान अब इन कपड़ों का कोई काम नहीं है सो अब तुम भी हटाओ अपने कपड़े।" श्याम अब सिर्फ अंडरवियर में था जिसमें उसका लण्ड अंगराई ले रहा था। सीता तिरछी नजरों से देखी तो एक बारगी डर गई मगर चेहरे पर भाव नहीं आने दी।श्याम सीता के पास आ कर साड़ी के पल्लू खींच दिया। सीता की तो सिसकारी निकल गई।अगले ही पल साड़ी जमीन पर बिखरी पड़ी थी। सीता की पीठ पर एक हाथ रख अपने से चिपका लिया और ब्लाउज के हुक खोलने लगा। ब्लाउज खुलते ही मध्यम आकार की चुची बाहर आ गई जो कि सफेद रंग की ब्रॉ में कैद थी।श्याम ब्रॉ के ऊपर से ही चुची जोर से मसल दिया। सीता की उफ्फ निकल गई।
अगले ही क्षण तेजी से श्याम ने पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया। सीता तो शर्म से मरी जा रही थी। श्याम पति है मगर पहली बार पति के साथ भी लड़की को काफी शर्म आती है। यही हाल सीता की भी थी। बेचारी शर्म से श्याम के सीने से चिपक गई। श्याम ने भी मौका मिलते ही ब्रॉ भी अलग कर दिया। अब दोनों सिर्फ पेन्टी में चिपके थे।
सीता तो साक्षात काम देवी लग रही थी। पैरों में पायल, हाथ में मेँहदी, कलाई में चूड़ी, गले में मंगलसूत्र जो चुची तक लटक रही थी, नाक में छोटी सी रिंग, कान में झुमका,माथे पे माँगटीका, कपड़ों में मात्र एक छोटी सी पेन्टी। कुल मिलाकर इस वक्त सीता किसी मुर्दे का भी लण्ड खड़ा कर देती। श्याम तो जिन्दा था। उसे तो लण्ड के दर्द से हालत खराब थी। अब अंडरवियर के अंदर रखना मुश्किल था तो उसने बाहर कर दिया और सीता के नरम हाथों में थमा दिया। सीता तो चौंक पड़ी लण्ड की गरमी से। उसे तो लग रहा थी कि हाथ में छाले पड़ जाएँगे।
"जान, अपना हाथ आगे-पीछे करो ना।"गालोँ को काटते हुए श्याम बोला
सीता तो इन सब से अनजान थी तो भला वो क्या करती। फिर भी अनमने ढंग से करने लगी।
कुछ ही क्षण में लण्ड के दर्द से श्याम कुलबुलाने लगा। सीता का हाथ हटा दिया और गोद में उठा बेड पर सुला दिया। बेड के नीचे से ही श्याम ने पेन्टी को निकाला। ओफ्फ ! चूत देखते ही श्याम को नशा लग गया। एकदम चिकनी गुलाबी रंग, हल्की हल्की बाल, कसी हुई फाकेँ, पूरी मदहोश करने वाली थी।एक जोरदार चुंबन जड़ दिया श्याम ने। सीता तड़प उठी। श्याम ने चुंबन के साथ ही अपना जीभ चलाने लगा।सीता अपना सर बाएँ दाएँ करके तड़पने लगी। श्याम के बाल पकड़ के हटाने लगी मगर श्याम तो चुंबक की तरह चिपका था। उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी। नमकीन पानी मिलते ही और जोर जोर से चुसने लगा। सीता ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकी।
चंद मिनट में ही सीता की चीख निकल गई और झड़ने लगी। श्याम सारा पानी जल्दी जल्दी पीने लगा। जीभ से पानी की एक एक बूँद श्याम ने चाट के साफ कर दिया। सीता बदहवास सी आँखे बंद कर जोर जोर से साँसे ले रही थी। श्याम मुस्कुराता हुआ उसके बगल में आ के लेट गया और सीता को अपनी बाँहो में भर के उसके माथे को चूमने लगा।
श्याम का लण्ड अभी भी पूरा तना हुआ था। उसने एक पैर सीता के पैरों पर चढ़ा दिया, जिससे लण्ड सीधा सीता की गुलाबी चूत पर दस्तक दे रही थी। श्याम सीता को चूमते हुए कहा,"जानू, तुम तो इतनी जल्दी खल्लास हो गई। अभी तो असली मजा तो बाकी ही है।"
सीता बस मुस्कुरा कर रह गई।
श्याम उठ के सीता के मुँह के पास बैठ गया जिससे उसका तना लण्ड सीता के होंठ के काफी नजदीक ठुमके लगा रहा था।पर सीता आँखें बंद की अभी भी पड़ी थी।
श्याम ,"जान, अब मैं तुम्हें एक पूरी औरत का एहसास दिलाना चाहता हूँ, अपनी आँखें खोलो और इसे प्यार करो।"
सीता सुनते ही एकबारगी तो चौंक पड़ी। फिर आँखें खोली तो सामने लण्ड देख जल्दी से अपना मुँह दूसरी तरफ कर ली।
श्याम,"अरे! क्या हुआ? जब तुम मेरे लण्ड को प्यार नहीं करोगी तो मैं इसे तुम्हारी चूत में कैसे डालूँगा और तुम्हें पूरी औरत कैसे बनाऊंगा।"
सीता शर्माती हुई बोली,"गंदा मत बोलो ना और आप नीचे हो जाओ मैं हाथ से कर देती हूँ।"
श्याम,"हाथ से नहीं डॉर्लिँग मुँह से प्यार करना है और गंदा क्या है लण्ड को लण्ड ना बोलूँ तो क्या बोलूँ?"
सीता के शरीर में तो मानो 1000 वोल्ट का करंट लग गया।आज तक बेचारी एक किस तक नहीं की थी उसे मुँह में लण्ड लेने को कहा जो जा रहा था।सीता सकुचाते होते हुए बोली,"छीः! मुँह में गंदा नहीं लूँगी।"
"कुछ गंदा नहीं है मेरी रानी। मुँह में लोगी तो और मस्त हो जाओगी। आज मना कर रही हो अगली बार खुद ही लपक कर लोगी।"
"नहीं आज नहीं प्लीज।और जो करना है कर लीजिए मगर ये नहीं कर सकती" सीता बोली।
अब श्याम ज्यादा दबाव नहीं देना चाहता था क्योंकि आज पहली रात थी दोनों की।
"OK. बस एक किस ही कर दो और ज्यादा कुछ नहीं प्लीज" श्याम अब और ज्यादा प्यार से कहा।
सीता भी श्याम को नाराज नहीं करना चाहती थी।हल्की मुस्कान के साथ बोली," केवल एक किस।"
श्याम को तो जैसे मन की सारी इच्छा इतनी में ही पूरी हो गई पूरा चहकते हुए बोला," हाँ हाँ डॉर्लिँग बस एक किस ।"
"ठीक है तो अपनी आँखें बंद कीजिए ।मुझे शर्म आएगी" सीता बोली।
श्याम अब ये मौका जाने नहीं देना चाहता था तो उसने जल्दी से अपनी आँखें बंद कर ली। सीता अभी भी लण्ड को मुँह से नहीं लगाना चाहती थी मगर हाँ कर दी थी तो क्या करती? अब अगर मना करती है तो कहीं श्याम नाराज हो गए तो? फिर भी काफी हिम्मत करके एक हाथ से लण्ड पकड़ी और अपने होंठ लण्ड के निकट ले जाने लगी। श्याम की तो सिर्फ छूने से ही सिसकारी निकल रही थी। जैसे ही सीता के होंठ लण्ड को छुआ श्याम की आह निकल पड़ी। सीता श्याम को मस्ती में देख कुछ देर तक अपना होंठ लण्ड पर चिपकाए रखी।सीता को अच्छा नहीं लग रहा था मगर वो श्याम के लिए ऐसा कर रही थी।कुछ देर बाद सीता हटने की सोची तो उसने पूरा सुपाड़ा अपने होठोँ में ले किस की आवाज के साथ हटा ली और जल्दी से अपना चेहरा हाथ से ढँक ली।
श्याम को तो ऐसा लग रहा था कि उसका लण्ड अब पानी छोड़ देगा। किसी तरह रोक के रखा और सीता की गालोँ पर चुंबन के साथ शुक्रिया अदा किया।
श्याम अब उठा और सीता के मेकअप बॉक्स में से क्रीम निकाला और अपने लण्ड पे मलने लगा। फिर वो सीता की चूत को चूमते हुए उसकी चूत में भी क्रीम लगाने लगा। सीता को ठंड महसूस हुई तो हल्की नजरो से देखने लगी कि क्या लगा रहे हैं। अपनी तरफ देखती पाकर श्याम बोला,"डॉर्लिँग, क्रीम लगा रहा हूँ ताकि आपको दर्द कम हो।" और श्याम मुस्कुरा दिया।
सीता शर्माती हुई एक बार फिर चेहरा ढँक ली।
श्याम ने सीता के दोनों पैरों को मोड़कर सीने से सटा दिया। अब सीता की फाकेँ काफी हद तक खुल रही थी काफी कसी चूत के कारण पूरी नहीं खुली थी वर्ना इस मुद्रा में तो अक्सर की चूत खुल जाती है।सीता की तो साँसें अब रुक रही थी आगे होने वाले स्थिति को सोचकर।श्याम ने अपनी उँगली से चूत की दरार को फैला कर अपना लण्ड टिका दिया और हल्का धक्का लगाया। मगर लण्ड फिसल गया। पुनः उसने चूत और ज्यादा से खोल कर थोड़ा जोर का धक्का लगाया।
सीता जोर से अपनी आँखें भीँचते हुए चिल्ला पड़ी," आआआआआआहहहहह..... ओह ओहओफ्फ ओफ्फ ई ई ईईईईईईई मर गईईईईईई प्लीज निकालीए बाहरररर आहआह..."
"बस रानी थोड़ा बर्दाश्त कर लो फिर मजा आएगा" श्याम पुचकारते हुए कहा।
श्याम का लण्ड 2 इंच तक घुस गया था।
श्याम ने अपना लण्ड खींचते हुए एक और झटका दे दिया। इस बार 4 इंच तक घुस गया।
"ओफ्फ....माँआआआआईईईईईईई मरररर गईईईईईईईई अब और नहीं सह पाऊंगी। प्लीज बाहर निकालीएएएए" सीता रोनी सूरत बनाते हुए बोली।
"अच्छा अब नहीं करूँगा।" श्याम कहते हुए सीता की होंठ चुसने लगे और चुची मसलने लगे। कुछ देर चुसने के बाद जब सीता थोड़ी नॉर्मल हुई तो श्याम ने सीता के होठोँ को कस के चुसते हुए अपना लण्ड पीछे खींचा और बिना कहे पूरी ताकत से धक्का दे मारा।
"आआआआआआआ मम्मी मर गईईईईईईई आह आह ओफ्फ ओह प्लीज मैं आपके पैर पकड़ती हूँ बाहर निकाल लीजिए आआआआइसइस" सीता की आँखें आँसू से भर गई थी और छूटने की प्रयास कर रही थी।जिंदगी में पहली बार उसे इतना दर्द हुआ था वो भी चुदाई में, कल्पना भी नहीं की थी बेचारी। ऐसा लग रहा था मानो चाकू से किसी ने उसकी चूत चीर दिया हो।श्याम का पूरा लण्ड सीता की छोटी सी चूत में समा गया था और उसके बॉल सीता की गांड के पास टिकी थी।श्याम सीता के होंठ चूमते हुए कहा," बधाई हो सीता रानी। अब आप लड़की से पूरी औरत बन गई हैं।"
सीता बेचारी कुछ ना बोल सकी।श्याम लण्ड पेले ही सीता की चुची मसल रहा था और होंठ लगातार चूसे जा रहा था। काफी देर बाद जब दर्द थोड़ी कम हुई तो श्याम ने अपना पूरा लण्ड बाहर निकाला और जोर से पेल दिया।
"आहहहहहह उम्मउम्मउम्म" सीता एक बार फिर कराह उठी
"बस रानी। आज पहली बार है ना इसलिए दर्द ज्यादा हो रहा है।आज सह लो फिर पूरी जिंदगी मजे लेती रहना।"श्याम ने कहा और कहकर सीता को पेलने लगा।
लण्ड अब लगातार सीता की चूत को चीर रही थी। सीता अभी भी दर्द से बेहाल थी।वो लगातार कराह रही थी मगर श्याम तो अब और जोर जोर से पेलने लगा। अपना लण्ड पूरा बाहर निकालता और एक ही झटके में जड़ तक घुसेड़ देता। वो सीता की कुंवारी चूत की लगातार धज्जियाँ उड़ा रहा था।
कुछ पलोँ में श्याम की रफ्तार तेज हो गई।उसकी मुँह से भी आवाजें निकल रही थी अब।
"आह सीता ओहहहहह मेरी जान। कितनी प्यारी हो तुम। ओफ्फ ओह कितना मजा आ रहा है तुम्हें चोदने में।क्या रसीले होंठ पाई है एकदम मीठी। आहआह आह आह मैं तो धन्य हो गया तुम्हें पाकर।" श्याम ऐसे ही बोलते हुए सीता को अब तेज तेज धक्के लगा रहा था।
अचानक श्याम की चीख निकलनी शुरू हो गई। श्याम अपने गर्म गर्म पानी से सीता की चूत को भर रहा था। उस पानी की गर्मी को सीता बर्दाश्त नहीं कर सकी और वो भी श्याम को जोर से गले लगाती हुई पानी छोड़ने लगी। सीता को लग रहा था जैसे उसकी चूत में पिचकारी छोड़ रहा हो कोई। दोनों झड़ने के काफी देर बाद तक यूँ ही पड़े रहे। फिर श्याम उठकर बाथरूम में साफ करने चला गया। सीता उठ के अपनी चूत की तरफ देखी तो बेहोश होते होते बची।पूरी तरह सूज गई थी और उसमें से खून और लण्ड के पानी का मिश्रण टपक रही थी। बेडसीट भी खून से पूरी तरह लाल हो चुकी थी। बेचारी सीता को अपनी इस हालत को देखकर रोना आ गया और सुबकने लगी। सीता कुछ समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे? इतने में श्याम बाथरूम से वापस आ गया। श्याम का लण्ड सिकुड़ गया था फिर भी सीता को डर लग रहा था। सीता को सुबकती देख पूछे,"जान, दर्द तेज हो रही है क्या? पहली बार चुदाई में इतना ही दर्द होता है। मेरा लण्ड भी देखो छिल गया है। चलो बाथरूम साफ करते हैं।"
श्याम ने सीता की बाँह पकड़ उठने में सहायता की। फिर गोद में उठाकर बाथरूम में ले जाकर एक टेबल पर बैठा दिए। फिर पानी से सीता की चूत को अच्छी तरह से साफ किया। बेचारी सीता तो सोची भी नहीं थी कि कोई उसकी चूत को इतना प्यार देगा। वो तो शर्म से मरी जा रही थी। फिर तौलिया से चूत को अच्छी तरह पोँछा। फिर सहारा देकर बेडरूम तक ले आया।सीता की पैर जवाब दे चुकी थी। कोई भी देखता तो जरूर कहता कि इसकी तबीयत से चुदाई हुई है। अंदर आकर श्याम ने सीता को सुला दिया। सीता साड़ी उठाकर पहनना चाह रही थी मगर श्याम ने रोक दिया,"जान, तुम ऐसे ही काफी सुंदर लग रही हो तो कपड़े पहनने की क्या जरूरत?"
सीता शर्मा कर रह गई और फिर दोनों नंगे ही सो गए।
सुबह 5 बजे मेरी नींद खुली तो अपनी हालत देख खुद शर्मा गई। मैं पूरी मादरजात नंगी श्याम के नंगे जिस्म से चिपकी थी। मैं उठी तो मेरी नजर बेडसीट पड़ी, बेडसीट पर खून और वीर्य के काफी गहरी दाग बन चुकी थी। मैंने अपने कपड़े पहने।फिर श्याम को नींद से जगाई तो वो भी देख मुस्कुरा दिए। मैंने जल्दी से बेडसीट बदली और दूसरी बिछा दी। तब तक श्याम भी अपने कपड़े पहने और फिर सो गए। नींद तो हमें भी आ रही थी किंतु नई जगह थी तो देर तक सोती तो पता नहीं सब लोग क्या सोचते?
कुछ देर बाद घर के सारे सदस्य भी जग चुके थे। मैं भी नहा-धो कर फ्रेश हो गई और नाश्ता कर अपने रूम में आ गई।
सुबह 11 बजे तक श्याम सोते रहे। फिर उठ कर फ्रेश हुए और बाहर अपने दोस्तों के साथ निकल गए। उनके जाते ही हमारी ननद पूजा आ धमकी। सुबह से तो श्याम थे तो शायद इसीलिए नहीं आई।
"भाभी, भैया को सोने नहीं दिए क्या रात में जो इतनी देर तक सोते रहे?"पूजा हँसती हुई बोली।
उसकी बात सुन मुझे भी हँसी आ गई।
पूजा सबकी लाडली थी घर में। अभी वो 12वीं की परीक्षा दी थी।दिखने में भी सुंदर थी काफी। हमेशा हँसती हुई रहती थी। शारीरिक संरचना भी अच्छी थी।
पूजा अब बेड पर चढ़कर मुझे पीछे से बाँहों में भर ली। फिर अपनी गाल मेरी गाल से सटाते हुए बोली,"भाभी बताओ ना प्लीज, रात में क्या सब की?"
"आप अपने भैया से पूछ लीजिए कि रात में क्या सब किए ?" मैं हँसती हुई कह दी
"क्या...भाभी....? भैया से कैसे पूछ सकती।बताओ ना प्लीज।"
"नहीं पूछ सकते तो रहने दीजिए। आपकी भी शादी होगी तो खुद जान जाइएगा।"
"1 मिनट भाभी। ये आप आप क्या लगा रखी है। मैं अपनी भाभी से दोस्ती करने आई हूँ और आप हैं कि....?"
"ओके पूजा।"
"Thanks भाभी। अच्छा ये तो बताओ मेरी बेडसीट कहाँ है जो कल बिछाई थी"
"क्या? वो तुम्हारी बेडसीट थी।"
"हाँ मेरी सीता डॉर्लिँग। जरा दिखाओ तो क्या हालत कर दी।" कहते हुए पूजा मेरी गालोँ को चूम ली
"नहीं, अभी वो देखने लायक नहीं है। मैं साफ कर दूंगी तब देखना"
"सीता भाभी, तुम तो अभी कपड़े साफ करोगी नहीं। अगर जल्दी साफ नहीं होगी तो दाग ज्यादा आ जाएँगे। सो प्लीज हमें दे दो मैं साफ कर दूंगी। प्लीज निकालो।"
"ठीक है मगर किसी को दिखाना नहीं वर्ना सब हँसेगे।"मैंने खुद को पूजा की बाँहों से अलग होते हुए कहा।
"क्या? देखेंगे नहीं तो कैसे समझेंगे कि दुल्हन संस्कारी है।"
"पागल कहीं की मरवाएगी हमें।जाओ हमें नहीं साफ करवानी।" मैं पलंग पर बैठते हुए बोली।
"ही ही ही ही ही। मजाक कर रही थी भाभी। वो सब दिखाने वाली चीज होती है क्या। अब दो" पूजा जोर से हँसती हुई बोली।
मैंने अपनी सूटकेस खोल के ज्योंही बेडसीट निकली, पूजा लपक के ले ली और फूर्ति से बेडसीट पलंग पर फैला दी और चिल्ला पड़ी।
"हाय! मेरी प्यारी भाभी की कितनी धुनाई हुई है पूरी रात । बेडसीट देख कर तो हम जैसी तो डर से शादी भी नहीं करूँगी।.....भाभी, रात में ज्यादा फटी तो नहीं ना।"
मैं शर्म से लाल हो गई और फिर जल्दी से बेडसीट समेटने की कोशिश करने लगी।पूजा तेजी से मेरे दोनों हाथ पकड़ ली और मुझे पलंग की धक्का देती हुई खुद भी मेरे शरीर पर गिर पड़ी। मैं नीचे पड़ी थी और पूजा ऊपर से दबाये थी।
"भाभी, रात में जब मजे ले रही थी तब तो शर्म नहीं आई, फिर अभी शर्म क्यूँ आ रही है।" पूजा अपना चेहरा मेरे चेहरे से लगभग सटाती हुई बोली।
"पागल मरवाएगी हमें अगर आपके भैया को मालूम पड़ेगी तो पता है क्या होगा?" मैं भी आराम से पूजा को समझाने की कोशिश की।
"कुछ नहीं होगा क्योंकि हम दोनों में से कोई भैया को कुछ नहीं कहने वाले हैं। वैसे भाभी आपकी होंठ काफी मस्त हैं। मन तो होती है चिपका दूँ...."
पूजा आगे कुछ करती उससे पहले ही मैंने धक्का देते पूजा को अपने से दूर किया। पूजा अलग होते हुए जोर से हँसने लगी। मैं भी मुस्कुरा दी।
फिर पूजा बेडसीट समेट ली और अपने साथ लाई बैग में डाल ली।
"भाभी, अपने दोस्त के यहाँ जा रही हूँ। वहीं दोस्त के यहाँ साफ कर दूंगी। चिन्ता मत करना किसी को नहीं दिखाऊँगी। शाम तक आ जाऊंगी।" पूजा बैग कंधे पर टिकाती हुई बोली।
मैं भी मुस्कुरा दी और बोली,"ठीक है। जल्दी आना, अकेले बोर हो जाऊंगी।"
फिर पूजा बाय कह कर निकल गई।
11 बज गए थे। अब हमें भी नींद आने लगी थी। बेड पर पड़ते ही मुझे नींद आ गई और मैं सो गई........।
रात की थकावट से मैं सोई तो बेसुध सोती रही। अचानक मुझे अपने होंठ पर कुछ गीला सा महसूस हुआ मगर मेरी नींद नहीं खुली। तभी मेरी होंठ में तेज दर्द हुई जिससे मैं हड़बड़ा के नींद से जगी।
ओह....गॉड, एक लड़की मुझे अपनी बाँहों में जकड़ी होंठ चुस रही थी। मैं पहचान नहीं सकी। किसी तरह उसे धक्का दे कर अपने से अलग किया। अलग होते ही वो और पूजा जोर से हँसने लगी। मुझे तो गुस्सा भी आ रही थी मगर पूजा को देख अपने आप पर कंट्रोल की।
"भाभी, ये लो बेडसीट। पूरी तरह साफ हो गई।ये मेरी दोस्त है, इसी के यहाँ साफ करने गई थी। काफी मेहनत करनी पड़ी हम दोनों को तब जाकर साफ हुई है।" पूजा हँसती हुई बोली।
"वो तो ठीक है मगर ये गंदी हरकत क्यों की तुम दोनों।" मैंने लगभग डाँटते हुए पूछा।
"भाभी, इतनी मेहनत से साफ की आपकी बेडसीट तो क्या बिना कुछ लिए थोड़े ही छोड़ दूंगी। पिँकी तो अपना हिस्सा ले ली, अब हमें भी जल्दी से दे दो।"पूजा मेरी पलंग पर चढ़ते हुए बोली।
मैं कुछ बोलती उससे पहले ही पिँकी बोल पड़ी," भाभीजी, सोते हुए आप इतनी प्यारी लग रही थी कि मैं बर्दाश्त नहीं कर सकी और चिपका डाली। वो तो पूजा ही लेने वाली थी मगर मैंने ही रोक दी वर्ना और बुरी हालत कर देती ये"
दोनों की चुहलबाजी सुन के मेरी भी गुस्सा शांत हो गई।
"तुम दोनों पागल हो गई हो। कम से कम जगा तो देती।"मैंने हँसते हुए दोनों से एक साथ सवाल कर दी।
इतना सुनते ही पूजा झट से मेरी तरफ लपकी। मैं कुछ समझती या करने की सोचती, तब तक मैं पलंग पर पड़ी थी और पूजा मेरे दोनों हाथ जकड़ी चढ़ी थी मुझ पर। हम सब को हँसी आ गई पूजा की इस हरकत से। पूजा की हरकतेँ अच्छी लगने लगी थी हमें सो मैं भी बिना कुछ किए पूजा के नीचे पड़ी थी।
पूजा की चुची मेरी चुची को दबा रही थी। फिर पूजा मेरी गालोँ को चूमते हुए बोली,"सीता डॉर्लिँग, आप मना भी करती तो मैं ले ही लेती। मगर मान गई ये आपके लिए अच्छी बात हुई वर्ना वो हाल करती जो भैया भी नहीं किए हैं....."
"चल चल...बड़ी आई हालत खराब करने वाली। आपके भैया भी इसी तरह बोलते थे मगर थोड़ी तकलीफ के बाद सब ठीक हो गई।" मैं भी ताने देते हुए बोली।
हम दोनों की बातें सुन पिँकी भी हँसती हुई पास आई और बोली," भाभीजी,अब तो आपकी खैर नहीं। पूजा वो सब करती है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकती और आपकी ऐसी हालत कर देगी कि आप तड़प तड़प के छोड़ने की भीख मांगोगी।"
तभी बाहर से मम्मी जी की आवाज सुनाई दी। पूजा जल्दी से उठी, मैं भी जल्दी से उठी और और अपने कपड़े ठीक की।
"पूजा, केवल बात ही करोगी। बहु सुबह ही खायी थी,अभी कुछ नाश्ता बना दो और पिँकी को भी खिला दो।काफी दिन बाद आई है।"मम्मी आती हुई बोल पड़ी।
"ठीक है मम्मी।"पूजा बोली
इतना आदेश दे कर मम्मी जी चली गई।शायद उन्हें कहीं जाना था।
"पूजा,मैं अब लेट हो जाऊंगी। मैं भी चलती हूँ" पिँकी भी हम दोनों की तरफ देखते हुए बोली।
"क्यों, इतनी जल्दी क्या है? नाश्ता कर लीजिए फिर चले जाइएगा।"मैंने पिँकी से पूछ बैठी।
"नहीं भाभीजी, फिर आऊंगी तो खाना ही खाऊंगी आपके साथ। आज मम्मी को कुछ काम है इसलिए जाना होगा।पूजा से पूछ लीजिए।"पिँकी अपनी सफाई देते हुए बोली। मैं पूजा की तरफ देखने लगी। पूजा भी हाँ बोली और पिँकी को छोड़ने बाहर निकल गई।
कुछ देर बाद पूजा के बैग से मोबाइल के कंपन की आवाज आने लगी। मैंने पूजा को बुलाने गेट की तरफ लपकी मगर तब तक दोनों बाहर निकल चुकी थी। मैं बाहर जा नहीं सकती थी।खिड़की से बाहर देखी तो दोनों सड़क किनारे बात कर रही थी। अब तो मेरी आवाज निकल भी नहीं सकती थी। इधर तब तक मोबाइल कट चुकी थी। मैं बैग से मोबाइल निकाली और देखने लगी कि किसका फोन था। कोई नया नम्बर था। तभी फिर से फोन आने लगी।बाहर पूजा को देखी तो वो अभी भी बात कर रही थी। मैं सोची उठा कर देखती हूँ कि कौन है और कह दूंगी कि कुछ देर बाद बात कर लेना पूजा से।
मैंने फोन रिसीव की और कान में लगाई।
"क्यों शाली, फोन क्यों नहीं उठाती हो"
मैं तो सन्न रह गई।किसी मर्द की आवाज थी। मर्द तक तो बर्दाश्त करने लायक थी मगर उसकी ऐसी भाषा। से तो मेरी गले से नीचे नहीं उतर रही थी।फिर मैंने थूक निगलते हुए पूछी,"आप कौन बोल रहे हैं और कहाँ फोन किए हैं?"
"तुम पूजा ही हो ना?" उधर से आवाज आई।
अब तो मेरा दिमाग काम करना लगभग बंद हो चुकी थी।मैंने पूजा को देखी तो वो अब वहाँ पर नहीं थी। शायद बातें करते हुए आगे निकल गई। मैंने अपने आप पर काबू पाने की कोशिश की और सोचने लगी कि क्या कहूँ? कुछ देर सोचने के बाद मैंने फैसला ले ली और फोन को कान में सटा ली।
"हाँ मैं पूजा ही हूँ,मगर आपको पहचान नहीं पा रही।"
"शाली नाटक मत कर वर्ना तेरे घर आकर इतना चोदूँगा कि नानी याद आ जाएगी"
मैं तो इतना सुन के पानी पानी हो गई। फिर भी हिम्मत कर बोली,"सच कह रही हूँ, आपकी आवाज चेँज है सो नहीं पहचान पा रही हूँ।" मैं उसका नाम जानने की कोशिश कर रही थी।
"हाँ रात में कुछ ज्यादा ही शराब पी लिया था तो आवाज थोड़ी भारी हो गई।"
अब मेरी तीर निशाने पर लग रही थी। मैंने थोड़ी रिक्वेस्ट करते हुए बोली,"हाँ तभी तो नहीं पहचान रही हूँ कि कौन बोल रहे हैं।"
"शाली लण्ड तो अँधेरे में भी पहचान लेती है और लपक के चुसने लगती है। आवाज क्यूँ नहीं पहचान रही है।"
मैं तो ऐसी बातें सुन के शर्म के मरी जा रही थी मगर कुछ कुछ मजे भी आने लगी थी। हल्की मुस्कान आ गई मेरे चेहरे पर।
"प्लीज बता दीजिए ना!"
"बता दूँगा मगर मेरी एक शर्त है। वो माननी पड़ेगी तुम्हें"
"कैसी शर्त?"
"कल शाम में मैं घर आ रहा हूँ तो तुम अपने दोस्त पिँकी के साथ मेरा लण्ड लेने के लिए तैयार रहेगी।"
मेरी तो हलक सूख गई।ये पूजा और पिँकी क्या क्या गुल खिलाती है। मुझे तो गुस्सा भी आ रही थी। मगर मैं नाम जानना चाहती थी और थोड़ी थोड़ी मजे भी आ रही थी।मैं ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहती थी,
"मैं तो तैयार हूँ मगर पिँकी से पूछ के कहूँगी।"
"तो ठीक है उस रण्डी से जल्दी पूछ के बताना।"
"अब तो नाम बता दीजिए।"
"शाली चूत मरवाने के लिए हाँ कैसे कह दी बिना पहचाने। एक नम्बर की रण्डी हो गई है।"
मुझे भी हँसी आ गई इस बात पर।क्यों नहीं आती आखिर वो सही ही तो कह रहे थे। हँसते हुए मैंने पुनः रिक्वेस्ट की नाम बताने की।
फिर उन्होंने अपना नाम बताया। नाम सुनते ही मैं तो बेहोश होते होते बची।मैं तो पूजा को मन ही मन गाली देना शुरू कर दी थी। शाली पूरे गाँव में और कोई नहीं मिला अपनी चूत मरवाने के लिए। मैंने फोन काट दी। मगर फोन फिर से बजने लगी। मैं उठा नहीं रही थी। फोन लगातार आ रही थी। मैं बाहर पूजा को देखी तो अभी भी पूजा कहीं नहीं दिखाई दे रही थी। कुछ देर बाद मैंने पुनः फोन रिसीव की।
"क्यों रण्डी, फोन क्यों काट दी?"
फोन उठाते ही नागेश्वर अंकल की तेज आवाज मेरी कानों में गूँज पड़ी।
नागेश्वर अंकल जो कि हमारे ससुर जी के चचेरे भाई हैं। उनकी उम्र करीब 45 है। वे 3 पंचवर्षीय से इस गाँव के मुखिया हैं। अब सुन रही हूँ कि वे विधायक का चुनाव लड़ेँगे। उनको मैं सिर्फ एक बार ही देखी हूँ। ऊँचा कद, गठीला बदन,लम्बी मूँछेँ,गले में सोने की मोटी चैन,हाथ की सारी उँगली में अँगूठी। जब मैं पहली बार देखी तो डर ही गई थी।
उनके साथ 12वीं की पूजा। ओफ्फ! मैं तो हैरान थी कि भला पूजा कैसे सह पाती होगी इनको।तभी मेरे कानों में पुनः जोर की "हैलो" गूँजी।
"हाँ अंकल सुन रही हूँ" हड़बड़ाती हुई बोली।
"चुप क्यों हो गई?"
"वो मम्मी आ गई थी ना इसलिए" अब मैं पूरी तरह पूजा बन के बात करने लगी।
"वो शाली बहुत डिस्टर्ब करती है हमें। एक बार तुम हाँ कहो तो उसको भी चोद चोद के शामिल कर लें। फिर तो मजे ही मजे।"
ओह गॉड ! मुझ पर तो लगातार प्रहार होती जा रही थी।मम्मी के बारे में इतनी गंदी.....।मैं संभलती हुई बोली," प्लीज मम्मी के बारे में कुछ मत कहिए।"
"अच्छा ठीक है नहीं कहूँगा।"
फिर उन्होंने पूछा,"अच्छा वो तेरी नई भाभी की क्या नाम है ?"
मैं अपने बारे में सुन के तो सन्न रह गई।मेरे हाथ पाँव कांप गई। फिर किसी तरह अपना नाम बताई।
"हाँ याद आया सीता। शाली क्या माल लगती है।गोरी चमड़ी,रस से भरी होंठ, गोल व सख्त चुची,चूतड़ निकली हुई,काले और लम्बे बाल, ओफ्फ शाली को देख के मेरा लण्ड पानी छोड़ने लगता है।"
मैं अपने बारे में ऐसी बातें सुन के पसीने छूट रहे थे।मुँह से आवाजें निकलनी बंद ही हो गई थी। बस सुनती रही।
"पूजा, प्लीज एक बार तुम सीता को मेरे लण्ड के नीचे ला दो। मैं तुम्हें रुपयों से तौल दूँगा।श्याम तो उसकी सिर्फ सील तोड़ा होगा, असली चुदाई के मजे तो उसे मेरे लण्ड से ही आएगी। जब उसकी कसी चूत में तड़ातड़ लण्ड पेलूँगा तो वो भूल जाएगी श्याम को। जन्नत की सैर करवा दूँगा। बोलो पूजा मेरे लण्ड के इतना नहीं करोगी?"
मैं तो अब तक पसीने से भीँग गई थी।क्या बोलूँ कुछ समझ नहीं आ रही थी। कुछ देर तो मूक बनी रही, फिर जल्दी से बोली," ठीक है, मैं कोशिश करूँगी। मम्मी आ रही है शायद मैं रखती हूँ, बाद में बात करूँगी।"
सिर्फ इतनी बातें ही बोल पाई और जल्दी से फोन काट दी। मेरी साँसे काफी तेज हो गई थी मानो दौड़ के आ रही हूँ।मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रही थी। अचानक मुझे चूत के पास कुछ गीली सी महसूस हुई। मैंने हाथ लगा कर देखी तो उफ्फ ! मेरी चूत तो पूरी तरह भीँगी हुई थी।
हे भगवान! ये क्या हो गया?
अंकल की बातें सुन के मैं गीली हो गई। मैं भी कितनी पागल थी जो आराम से सुन रही थी। एक बात तो थी कि अंकल की बातें अच्छी लग रही थी तभी तो सुन रही थी। पूजा की बातें तक तो नॉर्मल थी पर जब अपनी बातें सुनी तो पता नहीं क्या हो गया हमें। एक अलग सी नशा आ गई मुझमें। मैं मदहोश हो कर सुन रही थी और नीचे मेरी चूत फव्वारे छोड़ रही थी। इतनी मदहोश तो रात में चुदाई के वक्त भी नहीं हुई थी।
पूजा तो जानती होगी कि अंकल मुझे चोदना चाहते हैं। जानती होगी तभी तो वो हमसे दोस्ती की वर्ना आज के जमाने में ननद-भाभी में कहीं दोस्ती होती है।अगर होती भी होगी तो इतनी जल्दी नहीं होती।
अगर पूजा इस बारे में कभी बात की तो क्या कहूँगी? ना.. ना.. मैं ये सब नहीं करूँगी। मेरी शादी हो चुकी है, अब तो श्याम को छोड़ किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती।
मैं यही सब सोच रही थी कि दरवाजे पर किसी के आने की आहट हुई। सामने पूजा आ रही थी।मैं तो एकटक देखती ही रह गई। कितनी मासूम लग रही है दिखने में, मगर काम तो ऐसा करती है जिसमें बड़ी बड़ी को मात दे दे। ऊपर से नीचे गौर से देखने लगी पूजा को। मैं तो कल्पना भी नहीं कर पाती थी कि इतनी प्यारी और छोटी लड़की भला एक 45 साल के मर्द को चढ़ा सकती है अपने ऊपर।
"क्या हुआ सीता डॉर्लिँग, किस सोच में डूबी हुई हैं।डरिए मत, मैं अपनी मेहनताना लिए बिना छोड़ूँगी नहीं।" कहते हुए खिलखिलाकर हँस पड़ी। मैं भी हल्की मुस्कान के साथ उसका साथ दी।
"आती हूँ नाश्ता बना कर फिर लूँगी।" पूजा अपना उठा के जाने के लिए मुड़ी।
"पूजा, तुम्हारी फोन!"
इतनी बातें सुनते ही पूजा के चेहरे की रंग मानो उड़ सी गई हो। वो जल्दी से आई और फोन मेरे हाथ से ले ली। फिर मेरी तरफ ऐसे देखने लगी मानो पूछ रही हो कि किसका फोन आया था।
मैं मुस्कुराती हुई बोली," तुम्हारी किसी सहेली का फोन था शायद। मैं बात करना नहीं चाहती थी,तुम्हें आवाज भी दी पर तब तक तुम बाहर निकल चुकी थी। कई बार रिंग हुई तो मैं बात कर ली।"
पूजा मेरी बात को सुनते हुए कॉल लॉग चेक करने लगी। नम्बर देखते ही वो पसीने से लथपथ सी हो गई। फिर मेरी तरफ देखने लगी।
उसकी आँखे गुस्से से लाल पीली हो रही थी, मगर बोली कुछ नहीं।
"कल शाम को तुम्हें और पिँकी से मिलना चाहते हैं।" मैं सीधी टॉपिक पर आ गई। इतना सुनते ही वो पैर पटकती हुई निकल गई। मुझे तो उसकी हालत देख कर हँसी भी आ रही थी। तुरंत में मेरे सर पे बैठने वाली लड़की पल भर में बिल्ली बन गई।वैसे मेरा इरादा उसके दिल पे ठोस पहुँचाने वाली नहीं थी। मैं तो उसे एक दोस्त की तरह सारी बातें जानना चाहती थी, फिर समझाना चाहती थी।
मैं पीछे से आवाज दी," पूजा, मेरी बात तो सुनो।"
मगर वो तो चलती चली गई अपने रूम की तरफ और अंदर जा कर लॉक कर ली।
अब मैं क्या करूँ? बेचारी नाराज हो गई हमसे।
बेकार ही फोन रिसीव की थी।
कम से कम नाश्ता तो करवा देती।
खैर; मैं बात को ज्यादा बढ़ाना ठीक नहीं समझी।
फिर रात का खाना श्याम के साथ खाकर सोने चली गई। पूजा सरदर्द का बहाना बना कर खाने से मना कर दी।
रात में श्याम ने दो बार जम के चोदा, फिर सो गए। दर्द तो ज्यादा नहीं हुई पर थक ज्यादा गई तो सुबह नींद देर से खुली। जल्दी से फ्रेश हुई और किचन की तरफ चल दी। सोची शायद पूजा होगी तो मनाने की कोशिश करूँगी।
मगर वहाँ मम्मी जी और पूजा दोनों साथ खाना बना रही थी। मैं भी खाना बनाने में हाथ बँटाने लगी। इस दौरान पूजा मेरी तरफ एक बार भी पलट के देखी भी नहीं।
मैंने भी ज्यादा कोशिश नहीं की वहाँ बात करने की। किचन का काम खत्म कर मैं अपने रूम में आ गई। तब तक श्याम भी फ्रेश हो गए थे। वे खाना खा कर निकल गए।
11 बजे तक सब खाना खा चुके थे।मम्मी जी आराम करने अपने रूम में चले गए। मैं अब पूजा से बात करने की सोच रही थी। मैं उठी और पूजा की रूम की तरफ चल दी।
मम्मी,पापा,श्याम और मैं नीचे रहते थे जबकि पूजा ऊपर बने कमरे में रहती थी। सीढ़ी चढती हुई मैं रूम तक पहुँची और दरवाजा खटखटाया।
" कौन? " अंदर से पूजा की आवाज आई।
" पूजा मैं। दरवाजा खोलो।"
कुछ देर बाद लॉक खुली तो मैं गेट को हल्की धक्के देती हुई अंदर आई और गेट पुनः बंद कर दी।
अंदर की नजारा देखी तो मुझे एक झटका सा लगा। रूम की सजावट और हर एक चीज एकदम नई और लेटेस्ट थी। मैं क्या कोई भी सोच नहीं सकता था कि गाँव में ऐसी बेडरूम हो सकती है।पूरे कमरे में टाइल्स लगी थी जिसपे एक कालीन बिछी थी। नई L.E.D. दीवार पर टंगी थी। रूम में फ्रिज, water-purifier,A.C.,Fan,etc. सब एक दम नई लगी थी। काँच की टेबल पर एकदम लेटेस्ट Nightlamp रखी थी। बेड देख के तो दंग रह गई। आज तक ऐसी बेड तो मैं छुई भी नहीं थी।
मैं तो मानो स्वर्ग में आ गई थी रूम में फैलाइ गई स्प्रे से। मैं अब तक तो भूल गई थी कि यहाँ क्यों आई हूँ।
अचानक L.E.D. से आवाज आने लगी जिससे मेरी होश टूटी। देखी तो पूजा बेड पर बैठी कोई धारावाहिक चालू कर दी। मेरी तरफ तो देख भी नहीं रही थी। मैं चुपचाप उसके पास जा कर बेड पर बैठ गई।
कुछ देर तक देखी कि पूजा कुछ पूछेगी कि क्या बात है या क्यों आई हो यहाँ? मगर वो कुछ नहीं बोल रही थी।अंत में मैं ही बोली।
" पूजा । हमसे बात नहीं करोगी? "
मैं पूजा के जवाब की इंतजार करने लगी मगर पूजा तो मानो कुछ सुनी ही ना हो।
" मैं तो एक दोस्त की तरह तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ, जो ना केवल अच्छी बातें ही बताए बल्कि हर एक चीज सुने और सुनाए।
मैं तो वैसी दोस्त चाहती हूँ जो अगर मेरे बारे में कुछ सुने या जाने तो पहले हमसे पूछे, ना कि बिना कुछ जाने समझे नाराज हो जाएँ।
पता है आज तक मुझे वैसी दोस्त कभी मिली ही नहीं, जिस कारण मैं अभी तक बिना दोस्त की हूँ।
कल जब मैं तुमसे पहली बार मिली तो ऐसा लगा, मुझे जिसकी तलाश थी वो अब पूरी हो गई। "
मैं लगातार बोले जा रही थी । मगर पूजा ज्यों की त्यो सिर्फ सुन रही थी।
" कल जो कुछ भी हुआ उसकी जिम्मेदार मैं ही हूँ। मुझे बिना पूछे फोन रिसीव नहीं करनी थी। मैं तो ये सोच के रिसीव की थी कि दोस्त की ही तो फोन है, रिसीव कर भी ली तो कुछ करेगी थोड़े ही।आएगी तो कह दूंगी। मगर मैं गलत थी। अगर पता होता कि मेरी वजह से किसी को ठेस पहुँचती है तो कतई मैं ऐसा नहीं करती।
पूजा , कल की गलती के लिए मैं काफी शर्मिँदा हूँ सो प्लीज मुझे माफ कर देना। मैं वादा करती हूँ कि ऐसी गलती कभी नहीं करूँगी। बस एक मौका दे दो क्योंकि मैं एक अच्छी दोस्त खोना नहीं चाहती। और कल वाली बात भी मैं सदा के लिए भूला दी हूँ। सो प्लीज......"
कहते कहते पता नहीं मुझे क्या हो गया। मैं रूआंसी सी हो गई थी, मेरी आवाजें अब कांप रही थी।ऐसा लग रहा था मानो अंदर ही अंदर रो रही हूँ। अब मुझे लग रहा था कि मैं यूँ ही पूजा के पास नहीं आई हूँ। वो 1 दिन में ही मेरे दिल तक पहुँच गई थी। भले ही वो कितनी ही गंदी काम क्यों ना करती हो। गंदी क्या करती है? वो तो शायद अपने दिल की सुनती है,दिल से कहती है। अब दिल ऐसा कर दिया करने को तो कर दी। वैसे दिल से कोई भी किया काम कभी गंदा नहीं होता।
मैंने पूजा की तरफ देखी कि शायद कुछ बोलेगी मगर वो तो गालोँ पर हाथ रखी टी.वी. देखने मैं मग्न थी। कुछ देर इंतजार करने के बाद मैं उठी और बोली, "पूजा, मैं नीचे जा रही हूँ। अगर माफ नहीं करोगी तो कोई बात नहीं।पर दोस्त से नहीं तो कम से कम भाभी से बात कर लेना। मेरे नसीब में दोस्त नहीं लिखी होगी तो कहाँ से मिलेगी?" इतना कह मैं वहाँ से चल दी।
गेट खोल कर ज्यों ही बाहर निकलने की कोशिश की तभी पूजा पीछे से दौड़ के आई और जोर से लिपट के रोने लगी। मैं तो चौंक गई कि क्या हो गया इसे।
मैं उसके हाथ को थोड़ी ही ढीली करते हुए मुड़ी और उसे गले से लगा ली। वो लगातार रोये जा रही थी। उसके बालों को सहलाते हुए पूछी, " ऐ पूजा, क्या हुआ? रो क्यों रही हो?"
मगर वो तो रोये ही जा रही थी।
कुछ देर तक यूँ ही उसकी बालों को सहलाती रही।
" पहले चुप हो जाओ प्लीज, वर्ना मैं भी रो दूंगी।" अब पूजा कुछ शांत हुई मगर अभी भी सुबक रही थी।
" बात क्या है ? तुम रो क्यों रही हो!मेरी बातों से रो रही हो या फिर कोई और बात है?" मैंने प्यार से पूछने की कोशिश की।
" सॉरी भाभी, मैं आपको गलत समझ रही थी। मुझे लगा कहीं आप किसी को कह देंगे तो मैं तो मर ही जाती।" इतना कह फिर से वो सुबकने लगी।
" इतनी पागल लगती हूँ क्या? मैं तो वही जानने चाहती थी कि तुम क्या कहती हो इस बारे में। दोस्त का काम संभालना होता है, ना कि परेशानी में डालना। चलो पहले रोना बंद करो फिर बात करते हैं। "
पूजा को लेकर मैं वापस बेड की तरफ आई और साथ लेकर बैठ गई। कुछ देर में वो चुप हो गई। फिर उठी और बाथरूम में जाकर हाथ मुँह धो फ्रेश होकर आई और मेरे पास आकर बैठ गई।
मुझे पता क्या सूझी। उससे सट के एक हाथ उसकी बगलेँ में ले जाकर जोर से गुदगुदा दी। पूजा ना चाहते हुए भी हँस के उछल पड़ी। मैं भी हँसते हुए बोली, " देखो हँसते हुए कितनी प्यारी लगती हो। कल शाम से ऐसे मुँह फुलाए थी कि जैसे किसी ने किडनी निकाल लिया हो।"
अब मैं पूजा से थोड़ा खुलना चाहती थी और पूजा को भी बेहिचक बुलवाना चाहती थी। मैंने पूजा को बाँहों में भरते हुए बेड पर पसर गई और पूछी," क्यों पूजा रानी? जरा हमें भी तो बताओ कि नागेश्वर अंकल में ऐसी क्या बात है जो दीवानी हो गई।"
पूजा मेरे नीचे दबी मुस्कुरा रही थी। उसकी चुची मेरी चुची से दब रही थी, और मेरी होंठ लगभग सट रही थी। हम दोनों की साँसें आपस में टकरा रही थी।
पूजा जब कुछ देर तक नहीं बोली तो मैंने अपनी नाक उसके होंठ पर रगड़ते हुए बोली,"पूजा, अंकल से मिलने कब और कहाँ जाएगी ये तो बता दो।"
"मैं नहीं जाने वाली भाभी।"पूजा मुस्कुराती हुई बोली।
"क्यों ?" मुझे थोड़ी अजीब लगी सुनकर।
"मैं थोड़े ही हाँ बोली हूँ जो जाउँगी। तुम बोली हो तो जाओ तुम" बोलते हुए पूजा जोर से हँस दी।
हमें भी हँसी आ गई। मैंने पूजा की गोरी गालोँ को दाँतो से दबाते हुए बोली,"साली, शर्म नहीं आती भाभी को ऐसे बोलते। खुद तो फँसेगी ही हमें भी फँसाओगी। और वैसे भी जब घर में मिल जाए तो बाहर जाने की क्या जरूरत?"
"भाभी, अंकल वैसे आदमी नहीं हैं जो बदनाम कर दे। वो पूरी तरह सुरक्षित हैं।"
"रहने दे। मैं यहीं काफी खुश हूँ। और हाँ अंकल को बोल देना कि वो मुझ पर से अपना ध्यान हटा लें क्योंकि मैं कभी नहीं ये सब करने वाली।"
पूजा मेरी बात सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"मेरी सीता डॉर्लिंग है ही इतनी खूबसूरत कि अंकल क्या कोई भी मचल जाए एक दीदार को।"
मैं पूजा की ऐसी रोमांचित बातें सुन आपा खो दी और अपने होंठ पूजा की होंठ से सटा दी। पूजा भी बिना किसी हिचक के साथ देने लगी।
कुछ ही देर में पूजा पूरी तरह से गर्म हो कर जोर से चूसने लगी।मेरी साँसे भी तेजी से चलने लगी थी पर पीछे नहीं हटना चाहती थी।
अगले ही पल पूजा अपनी बाहोँ में मुझे कसते हुए पलटी। अब मैं पूजा के नीचे दबी थी। हाथ को उसने मेरी गर्दन के नीचे रखी थी जिससे मैं चाह कर भी होंठ नहीं हटा सकती थी। अचानक एक हाथ खींच कर मेरी चुची पर रख दी।मैं चौंक गई और तेजी से अपने हाथ से उसकी हाथ पकड़ी। पर हटा नहीं पाई क्योंकि मुझे भी अच्छा लग रहा था।
पूजा अब चूसने को साथ साथ मेरी चुची भी दबाने लगी। मैं तो आनंद को सागर मैं गोते लगा रही थी। 2 दिन में तो मेरी जिंदगी बदल गई थी।
अचानक पूजा होंठ को छोड़ दी और नीचे आ कर एक चुची को मुँह में कैद कर ली।मेरी तो आह निकल गई। ब्लॉउज के ऊपर से ही मेरी चुची की चुसाई और घिसाई जारी थी। मैं तो स्वर्ग मैं उड़ रही थी।कुछ देर बाद पूजा अपना मुँह मेरी चुची से हटाते हुए बोली,"भाभी आपको यकीन नहीं होगी कि आज मैं कितनी खुश हूँ। सच भाभी आप काफी अच्छी हो।"
मैंने पूजा को ऊपर खिंची और उसकी होंठों को चूमते हुए बोली," खुश तो मैं भी हूँ कि मुझे इतनी अच्छी दोस्त और प्यारी ननद मिली है।चल अब तो बता कि सारे लड़के मर गए थे क्या जो तूने अंकल से दोस्ती कर ली।"
"नहीं भाभी, कॉलेज में एक बॉय फ्रेंड भी है पर उसके साथ सिर्फ बात करती हूँ। पता है, जब सिर्फ बात करती हूँ तो सारा कॉलेज जान गया। अगर उसके साथ सेक्स की तो पता नहीं कौन-कौन जान जाएगा।"
"ऐसी बात है तो उसे छोड़ क्यों नहीं देती?"
"नहीं भाभी,अगर ब्रेकअप कर लूँगी तो रोज 10 लड़के मेरे पीछे पड़े रहेंगे। अभी तो कम से कम आराम से कॉलेज आ जा तो रही हूँ ना।जब तक कॉलेज है बात करूँगी, बाद में अलग हो जाऊंगी।"
"हम्म। दिमाग तो बहुत चलती है,पर ऐसा करना तो धोखा देना है।" कुछ हद तक तो सही ही कह रही थी।
"नहीं नहीं! मैं पहले ही बोल चुकी हूँ कि नो शादी, नो सेक्स।"
पूजा हंसती हुई कहने लगी," वो भी मेरे टाइप का ही है। उसे जब भी मन होती है तो सेक्स करने वाली को ले के चला जाता है।"
"चल ठीक है।कुछ भी करना पर बदनामी वाली कोई हरकत मत करना।"
"नहीं भाभी, मैं ऐसी वैसी कोई काम नहीं करती।"
"अच्छा,सच बता तो अंकल को चांस कैसे दे दी अपनी इस आम को चुसवाने के लिए?"मैं नीचे दबी ही पूजा की चुची को मसलते हुए बोली।
"वो सब जाने दो । बस इतना जान लो कि नागेश्वर अंकल काफी अच्छे हैं।मैं उन्हें बचपन से ही काफी पसंद करती थी। जब कॉलेज जाने लगी तो देखी अंकल की नजरें भी कॉलेज के लड़कों जैसी ही मुझे निहारती थी। तो मैं भी हिम्मत कर के आगे बढ़ने लगी और एक दिन ऐसा हुआ कि मैं उनकी पूरी तरह दीवानी हो गई। "
पूजा अब मेरे सीने से लग के बोली जा रही थी और मैं उसकी पीठ सहला रही थी।
"पूजा। एक बात और बता, अंकल जब चढ़ते होंगे तो कैसे संभाल पाती होगी तुम।" कहते हुए मैं हँस दी।
पूजा भी हंसती हुई बोली,"एक बार तुम भी चढवा लो अंकल को फिर देखना कैसी संभालती हूँ।"
"ना ना मुझे नहीं देखनी। मुफ्त में मारी जाउँगी।"
"भाभी, अंकल आपके कितने से दीवाने हैं ये तो सुन ही चुकी हो अंकल से। बस तुम हाँ कह दोगी तो फिर तुम भी दीवानी हो जाओगी।और उनसे बातें करना तो आपको पसंद भी है "
मैं तो सोच में पड़ गई कि क्या पूजा अंकल को बता दी कि उस समय मैं बात कर रही थी। मेरे तो पसीने निकलने लगी थी।मुझे सोच मे देख पूजा कान में धीरे से बोली,"ओह भाभी, टेँशन क्यों लेती हो। मेरी फोन में ऑटो रिकॉर्डिंग होती है। उसी में सुनी हूँ। अंकल से अभी तक बात नहीं की हूँ।अगर आप कहोगी तो कर लूँगी वर्ना जाने दो। अब आप हो तो अंकल की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।"
पूजा की बातें सुन ढेर सारा प्यार जग गई मेरे अंदर। खुद को संभालती हुई बोली,"बात कर लेना अंकल से।और प्लीज मेरा नाम मत लेना। अब मम्मी जी आएगी तो मैं नीचे जा रही हूँ"
"भाभी, एक बार अंकल से बात तो कर लो फिर चली जाना।"पूजा हंसती हुई मेरे शरीर से उठती हुई बोली।
मैं भी हँस के बोल पड़ी,"पहले तुम कर लो फिर बाद में मैं कर लूँगी।"
मैं उठी और कपड़े ठीक कर के जाने लगी।
तभी नीचे से मम्मी जी की आवाज सुनाई दी।पीछे से पूजा बोली,"और कुछ करने की इच्छा हुई तो बेहिचक दोस्त की तरह बताना।"
मैं बिना कुछ बोले मुस्कुराती हुई नीचे आ गई।
शाम के 4 बजे चुके थे। श्याम आए तो उन्हें नाश्ता दी। वे रूम में बैठ कर नाश्ता कर रहे थे। मम्मी जी नाश्ता करके पड़ोस वाली आंटी के यहाँ बैठी गप्पे लड़ा रही थी।
तभी बाहर से किसी के बोलने की आवाज आई। वो श्याम को बुला रहा था।
श्याम उनकी आवाज पहचान गए थे।
"हाँ अंकल, अंदर आइए ना। पटना से कब आए?" श्याम मुँह का निवाला जल्दी से अंदर करते हुए बोले।
इतना सुनते ही मेरी तो रूह कांप उठी। मैं अनुमान लगा ली कि शायद नागेश्वर अंकल आए हैं। तब तक अंकल अंदर आ गए। चूँकि मैं रूम में ही थी तो देख नहीं पाई परंतु उनके पदचाप सुन के मालूम पड़ गई थी।
"क्या बेटा? हर वक्त घर में ही घुसे रहते हो। मैं तो तुम्हारी शादी कर के पछता रहा हूँ। मैं यहाँ आँगन तक आ गया हूँ और तुम हो कि अभी भी घर में ही हो।"
हम दोनों की हँसी निकल पड़ी। श्याम हँसते हुए बोले," नहीं अंकल, अभी अभी आया हूँ बाहर से। भूख लग गई थी तो नाश्ता कर रहा हूँ। आप बैठिए ना तुरंत आ रहा हूँ मैं।"
"हाँ हाँ बेटा, अब तो ऐसी ही 5 मिनट पर भूख लगेगी। चलो कोई बात नहीं मैं बैठता हूँ।" अंकल भी हँसते हुए बोले और वहीं पड़ी कुर्सी खींच कर बैठ गए।
मेरी तो हँसी के मारे बुरी हालत हो रही थी। किसी तरह अपनी हँसी रोक कर रखी थी।
"पूजा और मम्मी कहाँ गई है? दिखाई नहीं दे रही है।" अंकल कुछ देर बैठने के बाद पुनः पूछे।
"अंकल मम्मी अभी तुरंत ही आंटी के यहाँ गई है और पूजा अपने कमरे में होगी टीवी देख रही।" श्याम बोले
"क्या? जाएगी कम्पीटिशन की तैयारी करने और अभी से दिन भर टीवी से चिपकी रहती है।" अंकल आश्चर्य और नाराजगी से मिश्रित आवाज में बोले और पूजा को आवाज देकर बुलाने लगे। पर पूजा शायद सो रही थी जिस वजह से वो कोई जवाब नहीं दी।
तभी श्याम बोले," रूकिए अंकल, मैं बुलवा देता हूँ।" और श्याम हमें पूजा को बुलाने कह दिए। मैं तो डर और शर्म से पसीने पसीने होने लगी, पर क्या करती?
मैंने साड़ी से अच्छी तरह शरीर को ढँक ली और लम्बी साँस खींचते हुए जाने के आगे बढ़ी। क्योंकि पूजा के रूम तक जाने के लिए जिस तरफ से जाती उसी ओर अंकल बैठे थे।
मैं रूम से निकलते ही तेजी से जाने की सोच रही थी पर मेरे कदम बढ़ ही नहीं रही थी। ज्यों ज्यों अंकल निकट आ रहे थे त्यों त्यों मेरी जान लगभग जवाब दे रही थी।
अंकल के निकट पहुँचते ही मेरी नजर खुद-ब-खुद उनकी तरफ घूम गई। चूँकि मैं घूँघट कर रखी थी जिस से उनके चेहरे नहीं देख पाई और ना ही वे देख पाए। देखी तो सिर्फ उनके पेट तक के हिस्से।
क्षण भर में ही मेरी नजर उनके पेट से होते हुए नीचे बढ़ गई और उनके लण्ड के उभारोँ तक जा पहुँची। मैं तो देख कर सन्न रह गई।
अंकल एक सभ्य नेता की तरह कुरता-पाजामा पहने थे तो उनका लण्ड लगभग पूरी तरह तनी हुई ठुमके लगा रही थी, एकदम साफ साफ दिख रही थी।
मैंने तुरंत नजर सीधी की और तेजी से आगे बढ़ गई। लगभग दौड़ते हुए पूजा के कमरे तक जा पहुँची।
कुछ क्षण यूँ ही रुकी रही फिर गेट खटखटाई। एक दो बार खटखटाने के बाद अंदर से पूजा बोली," आ रही हूँ।"
मैं गेट खुलने का इंतजार कर रही थी कि फिर से मेरी नजर नीचे बैठे अंकल की तरफ घूम गई।
ओह गोड! ये क्या। अंकल अभी भी मेरी तरफ देख रहे थे और अब तो उनका एक हाथ लण्ड पर था। मैं जल्दी से नजर घुमा ली कि तभी गेट खुली। मैं सट से अंदर घुस गई और बेड पर धम्म से बैठ के हांफने लगी। पूजा मेरी तरफ आश्चर्य से देख रही थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी कि क्या हुआ।
"क्या हुआ भाभी?" पूजा जल्दी से मेरे पास आकर बैठ गई और आश्चर्य मुद्रा में पूछी।
मैंने अपनी साँसें को काबू में करते हुए सारी बातें एक ही सुर में कह डाली।
पूजा मेरी बातें सुनते ही जोर से हँस पड़ी।मेरी भी हल्की हँसी छूट पड़ी। तभी नीचे से एक बार फिर अंकल की आवाज आई।
"पूजा बेटा, जल्दी नीचे आओ मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।"
"बस आ रही हूँ अंकल 1 मिनट में।" पूजा भी लगभग चिल्लाते हुए जवाब दी।
"चलो भाभी, अंकल से मिलते हैं।" पूजा मेरी तरफ देखते हुए बोली।
"नहीं.नहीं. मैं यहीं रुकती हूँ। तुम मिल कर आओ।"मैंने तपाक से जवाब दी।
"चलती हो या बुलाऊँ यहीं अंकल को।" धमकी देते हुए पूजा बोली।
मैं सकपका कर तुरंत ही चलने की हामी भर दी। मैं और पूजा नीचे उतरी। पूजा अंकल के पास बैठ गई पर मैं तो एक्सप्रेस गाड़ी की तरह रूम में घुस गई। पीछे से दोनों की हँसी आ रही थी, जिसे सुन मैं भी हँस पड़ी। श्याम अब तक नाश्ता कर बाहर जाने के लिए खड़े हाथ मुँह पोँछ रहे थे। फिर वे भी बातों को ताड़ते हुए हँस पड़े और निकल गए।
श्याम बाहर जाकर अंकल से दो टुक बात किए और जरूरी काम कह के निकल गए।
अब तो दोनों पूरी तरह फ्री थे। दोनों बात करने लगे, मैं सुनना चाहती थी मगर उनकी आवाज इतनी धीमी थी कि कुछ सुनाई नहीं दे रही थी।
मैं तो अब और व्याकुल हो रही थी सुनने के लिए। लेकिन क्या कर सकती थी।
कोई 10-15 मिनट बात करने के बाद पूजा मेरे कमरे में आई और बोली," भाभी, बाहर चलो। अंकल बुला रहे हैं।"
मेरी तो पूजा की बात सुनते ही दिमाग सुन्न हो गई।
"किस लिए?"फिर भी हकलाते हुए पूछी।
मेरी हालत देख पूजा हँस दी।
"चलो तो, मुझे थोड़े ही पता है किस लिए बुला रहे हैं। वे बोले बुलाने के लिए तो आई हूँ"
"नहीं पहले बताओ क्यों बुला रहे हैं तो जाऊंगी।"
"तुम तो बेकार की परेशान हो रही हो भाभी। कल वाली बात अंकल को नहीं पता है। कोई और काम है इसलिए बुला रहे हैं।" पूजा मुझे मनाते हुए बोली।
"फिर क्या बात है?तुम तो जानती होगी।" मैं अब थोड़ी नॉर्मल होते हुए पूछी।
पूजा दाँत पीसती हुई मेरी चुची पकड़ के मसलते हुए बोली,"तुम्हारी चूत फाड़ने के लिए बुला रहे हैं।"
मैं दर्द से कुलबुला गई। किसी तरह मेरी चीख निकलते निकलते बची।
मैं थोड़ी नाराज सी होते हुए बोली,"जाओ मैं नहीं जाती।"
पूजा को भी मेरी तकलीफ महसूस हुई तो मेरी गालोँ पर किस करते हुए बोली," भाभी प्लीज, कोई भी गलत बात नहीं होगी। वे आपसे मिलना चाहते हैं इसलिए बुला रहे हैं। चलो ना अब।"
कुछ देर तक मैं सोचती रही कि क्या करूँ? पता नहीं क्यों बुला रहे हैं? पूजा लगातार प्लीज प्लीज करती रही। अंतत: मैंने चलने की हामी भर दी।
मैंने अच्छी तरह से घूँघट की और पूजा के बाहर निकल गई।मैं तो अभी तक अंदर ही अंदर डर रही थी। कहीं कल वाली बात अगर जान गए होंगे तो पता नहीं क्या होगी! यही सब सोचते मैं पूजा के पीछे पीछे चल रही थी।
अंकल के पास पहुँचते ही उनके पैर छू कर प्रणाम की और पूजा के पीछे खड़ी हो गई।अंकल के दाएँ तरफ हम दोनों खड़ी थी। मेरी तो दिल अब काफी तेजी से चल रही थी कि पता नहीं अब अंकल क्या पूछेँगे?
तभी पूजा अंकल के सामने लगी कुर्सी पर जाकर बैठ गई। अंकल के बाएँ और पूजा के दाएँ तरफ एक और कुर्सी लगी थी। शायद अंकल पहले ही पूजा द्वारा मंगवा लिए थे।
पूजा और अंकल पहले से ही तय कर लिए थे शायद कि मुझे बीच में बैठाएंगेँ।
मैं अकेली खड़ी रही, अंदर से तो शर्म से पानी पानी हो रही थी।
"पूजा, मैं तो अपनी बेटी से मिलने आया था और तुम किसे ले आई हो।"तभी अंकल पूजा से हँसते हुए पूछे। पूजा अंकल की बातें सुन जोर से हँस पड़ी,पर बोली कुछ नहीं।
"सीता बेटा, बुरा मत मानना, मैं मजाक कर रहा था। आओ पहले बैठो फिर बात करते हैं।"
कहते हुए अंकल उठे और मेरी दोनों बाजू पकड़ के कुर्सी के पास ले जाकर बैठने के लिए हल्की दबाव दिए।
मैं तो हक्की-बक्की रह गई। शरीर से तो मानो जान निकल गई थी और अगले ही क्षण कुर्सी पर बैठी थी। अंकल के छूने से मेरी एक एक रूह कांप गई थी। तभी अंकल बोले,"देखो बेटा, हम लोग एक ही घर के हैं तो यहाँ पर्दा करने की कोई जरूरत नहीं है, करना होगा तो दुनिया वालों के लिए करना पर्दा।जैसे पूजा मेरी लाडली बेटी है वैसे ही तुम भी हो आज से। जब भी मेरी जरूरत पड़े तो बेहिचक कहना।" अंकल मेरी ओर थोड़े से झुक के बोले जा रहे थे।
मन ही मन सोच रही थी कि पूजा आपकी कितनी लाडली है ये तो मैं अच्छी तरह जान ही गई हूँ।
"अजीब बात है। मैं बोले जा रहा हूँ और तुम हो कि सारी बात सुनते हुए भी अभी तक घूँघट किए हो हमसे। औरों के लिए बहू होगी पर हम लोगो के लिए तो बेटी ही हो। सो प्लीज सीता...,"
तब तक पूजा उठ के मेरे पास आई और मेरी घूँघट उठाते हुए कंधे पर करते हुए बोली," क्या भाभी, अब तो शर्म छोड़ दो।"
फिर पूजा अपनी जगह पर जाकर बैठ गई।
पूरा चेहरा पसीने से भीग के लथपथ हो गई थी। ऊपर नजर करने की बात तो दूर, हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी मेरी।
तभी अंकल अपने जेब से रूमाल निकाल के देते हुए बोले," देखो तो, घूँघट रखने से कितना नुकसान होता है।इतनी खूबसूरत चेहरे पसीने से खराब हो रही थी सो अलग और तुम परेशान थी सो अलग। लो साफ कर लो पसीना।"
अंकल थे कि मुझे लगातार खुलने के लिए विवश कर रहे थे और एक मैं थी कि शर्म कम करना तो दूर और बढ़ा ही रही थी।
अब अगर अंकल की बात नहीं मानती तो वो मुझे यकीनन पुरानी ख्याल वाली लड़की समझ बैठते। सो थोड़ी हिम्मत कर के उनके हाथ से रूमाल ले ली और पसीने पोँछने लगी।चेहरा साफ करने के बाद अपना पल्लू माथे पर कर ली। अब घूँघट करने की बात तो सोच भी नहीं सकती थी।
"गुड बेटा, अब थोड़ी थोड़ी हमारी बेटी की तरह लग रही हो" कहते हुए अंकल हँस दिए। उधर पूजा सिर्फ हम दोनों की बातें सुन कर मुस्कुरा रही थी,बोल कुछ नहीं रही थी। पता नहीं पागल क्या सोच के चुप थी।कम से कम मेरे बदले तो कुछ बोलती।
मेरी भी डर अब भाग रही थी।
"क्या बातें हो रही देवर जी?"तभी पीछे से मम्मी जी आवाज सुनाई दी जो कि अंकल को देख कर पूछी थी।
मम्मी जी की तरफ सब घूम के देखने लगे।मैं उठ के खड़ी हो गई।
"अरे बेटी,तुम बैठो ना! पूजा कुर्सी ला दो। भाभी जी, बहू आ गई तो आप गायब ही रहती हैं। अब तो बच्चों के साथ ही गप्पे लड़ाना पड़ेगा।" अंकल मम्मी को ताना देते हुए बोले।
तब तक पूजा कुर्सी ला दी।मम्मी के बैठने के बाद मैं और पूजा भी बैठ गई।मम्मी जी के साथ साथ हम सब भी अंकल की बातें सुन हँस पड़ी।
"भाभी जी, मैं अपनी बेटी को फुर्सत के अभाव में मुँह देखाई नहीं दे पाया। बस इसी कारण आते ही यहाँ आया हूँ, वर्ना आप तो ताने देते देते मेरी जान ले लेते।"अंकल मुस्कुरा कर अपनी सफाई देते हुए बोले।
अब मेरी भी समझ में आ गई थी कि अंकल क्यों बुला रहे थे।
"ही ही ही. . आप अपनी बेटी को नहीं देते ऐसा कभी हो सकता है क्या? अगर ऐसा आप सोचते भी तो सच में आपकी जान ले लेती।" मम्मी जी भी हँसते हुए बोली।
सच कहूँ तो मैं सोची भी नहीं थी कि मेरे ससुराल में इतने अच्छे परिवार मिलेंगे। मेरे ससुर जी और अंकल दोनों भाई में अकेले ही थे, और चचेरे भाई में इतना लगाव आज पहली बार देखी।
तभी अंकल बाहर गए और कुछ ही देर में हाथ में एक बड़ा पैकेट लेते आए। वो शायद बाहर गेस्ट रूम में रखे थे। आते ही मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोले," लो बेटा, मेरी तरफ से एक छोटी सी भेंट। पसंद ना आए तो बता देना क्योंकि मैं अपनी मर्जी से लिया हूँ।"
मैं हल्की सी शर्माती हुई पैकेट ले ली।
मैं पूजा की तरफ नजर दौड़ाई तो वो मेरी तरफ देख कर अभी भी मुस्कुरा रही थी। मैं नजरें चुरा कर उसे चलने को कहा। वो भी बात को तुरंत समझ गई और उठती हुई बोली,"अंकल, आप लोग बात कीजिए मैं चाय लाती हूँ। चलो भाभी।"
इतना सुनते ही मैं जल्दी से खड़ी हुई और सीधे रूम की तरफ बढ़ गई। पूजा भी पीछे से हंसती हुई आई।
रूम में आते ही पूजा पीछे से लिपटती हुई बोली," भाभी, अभी मत खोलना पैकेट। मैं आती हूँ तो मैं भी देखूंगी सो प्लीज।"
मेरी हँसी निकल गई। मैं हँसते हुए बोली,"अच्छा ठीक है।"
फिर मेरी गालोँ पर किस कर पूजा चली गई। मैं भी पैकेट रख पूजा के आने तक बैठ के इंतजार करने लगी।
पैकेट में क्या हो सकती है, मैं खुद परेशान थी। पर मम्मी जी के सामने दिए थे तो कुछ राहत जरूर मिली कि कोई ऐसी-वैसी चीजें तो नहीं ही होगी। फिर भी मेरे अंदर एक अलग ही उत्सुकता थी जल्द से जल्द देखने की।
पर ये पूजा पता नहीं कहाँ मर गई थी। चाय बनाने गई या चूत मरवाने जो इतनी देर लगा रही है। किसी तरह अपने मन को शांत कर रही थी।
तभी पूजा धड़धड़ाती हुई अंदर आई और आते ही बोली," भाभी अब जल्दी से खोल के दिखाओ।"
उसकी बातों पर मुझे थोड़ी शरारत सूझी।
होंठों पर कुटील मुस्कान लाते हुई पूछी,"क्या खोल के दिखाऊँ?"
सुनते ही पूजा आँख दिखाते हुए बोली,"कमीनी, अभी तो पैकेट खोलो। और कुछ खोलने की इच्छा है तो अंकल को बुलाती हूँ, फिर खोलना।"कहते हुए पूजा जाने के लिए मुड़ी कि मैं जल्दी से उसे पकड़ी।
"पूजा की बच्ची,मार खाएगी अब तू। मैं तो यूँ ही मजाक कर रही थी और तुम तो सच मान गई। चल पैकेट खोलती हूँ।" अपनी बाँहों में कसते हुए बोली। पूजा मेरी बातें सुन मुस्कुरा दी और वापस आने के लिए मुड़ गई।
फिर हम दोनों बेड पर बैठ बीच में पैकेट रखी और उसकी सील हटाने लगी।
सील हटते ही पूजा उसमें रखी थैली उठा ली।
अंदर दो थैली थी,दूसरी थैली मैं उठा के खाली पैकेट को साइड में कर दी।
"भाभी, पहले ये वाली खोलो।"पूजा अपना पैकेट मुझे पकड़ाते हुए बोली।
मैं भी हंसती हुई पैकेट ले कर उसे खोलने लगी।
मैं जानती थी अगर पूजा को खोलने कहती तो वो कभी हाँ नहीं कहेगी। अब तक तो उसकी काफी चीज मैं जान गई थी। ऐसी लड़की कभी घमंडी या खुदगर्ज नहीं होती।
तभी तो मुझे पूजा इतनी अच्छी लगने लगी थी।
थैली खुलते ही लाल रंग के कपड़े नजर आई।
पूजा जल्दी से उठा के देखने के लिए बेड पर रख खोलने लगी।
पूरी तरह से खुलते ही हम दोनों की मुख से Wowwwww! निकल पड़ी।
बहुत ही खूबसूरत नेट वाली लहंगा साड़ी थी जो कि रेशम की थी।
Red और Maroon कलर की थी, जिस पर तिरछी डाली की तरह गोल्ड कलर की डिजाइन बनी हुई थी। जिसके ऊपर stones से काम की हुई थी, जो कि एक बिगुल की तरह लग रही थी। बॉर्डर पर काफी सुंदर Lace से काम किया हुआ था।
कढ़ाई भी बहुत अच्छी से की हुई थी। ठीक से देखने पर भी कोई त्रुटि नहीं मिलती।
मेरी हो आँखें फटी की फटी रह गई इतने महँगे साड़ी देख कर।
तभी पूजा के हाथों में ब्लॉउज देखी, जो कि देख के मंद मंद मुस्कान दे रही थी। मैं देखी तो एक बारगी शर्मा गई थी।
ब्लॉउज Off-Shoulder डिजाइन की थी, जिस पर नाम मात्र की हल्की Work की हुई थी। बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
मैं तो ये सोचने लगी कि ऐसी ब्लॉउज मैं गाँव में कैसे पहन सकती हूँ।
"भाभी, इस ड्रेस में पूरी कयामत लगेगी। जो भी देखेगा, देखता ही रह जाएगा।"पूजा हंसती हुई बोली।
मैं तो सोच के ही शर्मा गई।
"भाभी, जल्दी से एक बार पहन के दिखाओ ना। सच कहती हूँ काफी सुंदर लगोगी।"
"नहीं, मुझे नहीं पहननी।"
"प्लीज भाभी,सिर्फ एक बार।फिर जल्दी से खोल देना।"पूजा गिड़गिड़ाते हुए मनाने लगी।
मुझे तो काफी हँसी आ रही थी पूजा की इस प्यारी अदा को देख कर।
फिर मैं हामी भरते हुए बोली," अच्छा ठीक है, पर अभी दूसरी पैकेट बाकी है देखने की। उसे भी देख लेंगे फिर पहन के दिखा दूंगी।"
"Thanks भाभी।" पूजा कहते हुए जल्दी से साड़ी समेटने लगी। मैं भी साथ समेट कर उसी पैकेट में रख दी।
फिर दूसरी पैकेट खोलने के लिए बैठ गई।
पहली पैकेट में तो इतनी अच्छी साड़ी मिली जो कि Latest डिजाइन और बहुत ही खूबसूरत के साथ साथ काफी महँगी भी थी।
अब इस पैकेट में कितनी अच्छी और कितनी महँगी होगी।
मैं अगर कितनी भी अनुमान लगाती तो वो विफल ही होती। पूजा और मैं दोनों काफी उत्सुक थे देखने के लिए।
पैकेट खुलते ही मेरी तो आँखें चौँधिया गई।
पूजा भी Wowwww भाभी! कहती हुई एक टक देख रही थी।
गहने से भरी चमचमा रही थी।
पूजा एक एक कर निकालने लगी। मैं तो सिर्फ निहारे ही जा रही थी।
सारे गहने एक दम नई डिजाइन की थी।नेकलेस सेट तो देखने लायक थी। गोल्ड मीनाकारी कलर की बहुत ही खूबसूरत हार थी, जिस पर बहुत ही फैन्सी वर्क की हुई थी। साथ में लटकी हुई छोटी छोटी झुमकी और भी कयामत बना रही थी।
माँग टीका भी बहुत प्यारी थी जिस पर Stone और Diamond जड़ी हुई थी।
सोने की मध्यम सी मोटी मंगलसूत्र तो अद्भुत थी।
साथ ही कान के लिए 3 अलग अलग डिजाइन की रिंग और हुप्स थी। नाक की एक दम छोटी सी पिन, सभी उँगली के लिए अँगूठी, तारीफ के काबिल पायल।
मैं तो हर एक चीज देख हैरान थी। ऐसा नहीं था कि मेरे पास ये सब नहीं थी, थी मगर इतनी सुंदर और महँगी नहीं थी। मैं तो मंत्रमुग्ध हो एक टक देखी जा रही थी।
और ये सोने की घड़ी देख तो मैं मचल सी गई।
सच कहूँ तो मैं अब पूरी तरह से अंकल की दीवानी हो चुकी थी। कोई सगे भी इतनी महँगी गिफ्ट नहीं देता है।
मन तो कर रही थी कि अभी ये सारी गहने और कपड़े पहन के अंकल के बाँहों में जा गिरूँ।
मगर इतनी जल्दी अगर कहती भी तो पूजा जैसी लड़की कुछ और ही समझ लेती। भले ही अभी वो कुछ भी कह लेती मगर वो तो मुझे एक चालू लड़की की नाम जरूर दे देती जो सिर्फ दिखाने के लिए शरीफ बनती है। मन में ही अंकल के प्यार को कुछ दिनों के लिए दबा देने में ही भलाई थी।अंत में एक चीज देख तो हम दोनों एक साथ चौंक पड़ी।
फिर पूजा हंसती हुई हाथ में उठा ली।
एक दम नई मॉडल की मोबाइल फोन थी ये।पूजा जल्दी से ऑन की। ऑन होते ही उसके चेहरे पर एक नाराजगी सी आ गई। उसने फोन मेरे हाथ में पकड़ा के बाहर निकल गई।मैं भी मोबाइल में देखी कि आखिर क्या हुआ इसे।
ओह। इसमें Insert Sim लिखी थी। अब समझ में आ गई कि पूजा कहाँ गई है।मैं भी गेट के पास जा कर सुनने लगी कि क्या कहती है पूजा अंकल से।
"अंकल,फोन आप दिए तो उसमें Sim कौन डालेगा?" अंकल से गुस्से में बोली।
"ओह सॉरी पूजा, Sim मेरे जेब में ही रह गई।"
कहते हुए अंकल हँस दिए। साथ में मम्मी जी की भी हँसी सुनाई दी।
"पहले एक तंग करती थी और अब दो दो बेटी तंग करेगी। झेलते रहिएगा।"मम्मी बोली।

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