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नमस्कार दोस्तो, आज मैं आप लोगों के सामने अपने जीवन का पहला और सच्चा किस्सा बताने जा रहा हूँ।

मैं उदय मूल रूप से जिला शहडोल, मध्य-प्रदेश का रहने वाला हूँ।

मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव मुझे मेरी भाभी ने ही दिया है तब से ही मैं शादीशुदा औरतों का दीवाना हूँ।

मेरी उम्र बीस साल और मेरी भाभी की उम्र अठाईस साल है

मैं अपने भैया-भाभी के यहाँ शहडोल में ही रह कर पढ़ाई कर रहा हूँ।

जबसे मुझे अपने दोस्तो के साथ ब्लू-फिल्म देखने का चस्का लगा है तब से मैं भाभी को कुछ अलग ही नज़रों से देखने लगा हूँ।

भैया जब भी भाभी की चुदाई करते थे तो उनकी चुदाई की हल्की गूँज मेरे कमरे तक भी सुनाई देती थी।

मेरे और भैया के कमरे के बीच एक छोटी सी खिड़की भी है जिससे मैं उनकी चुदाई का आँखों देखा हाल देख सकता था

भैया भाभी की चुदाई करीब पांच मिनट तक करते थे, उसके बाद वो कभी-कभी ही भाभी को दुबारा चोदते थे।

मैं देखता था कि कई बार भाभी संतुष्ट नहीं हो पाती थी और जिस दिन वो भैया से खुश नहीं हो पाती थी उसके अगले दिन उनका दिमाग ख़राब (मूड ऑफ) होता था।

भैया अक्सर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं और जब भैया घर से बाहर रहते थे तो भाभी का दिमाग ख़राब रहता था।

मेरी भाभी बहुत ही सेक्सी हैं उनके बड़े-बड़े बूब्स और मटकती हुई गांड को जब भी मैं देखता हूँ तो मेरा लंड सलामी मारने लगता है।

मुझे लगता है कि कई बार भाभी का ध्यान भी मेरे लंड की तरफ चला ही जाता है क्यूंकि मैंने कई बार भाभी को मेरे लंड की तरफ निहारते हुए देखा है।

बात २०१० की गर्मियों की है जब मैं कॉलेज के पहले साल में था, भैया काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे।

मैं और भाभी ही घर में थे। मैं अपने कमरे में बैठा हुआ अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा था तभी भाभी ने मुझे खाना खाने के लिए आवाज़ लगायी।

मेरा लंड खड़ा हुआ था मैंने ध्यान नहीं दिया और खाना खाने पहुँच गया। मैंने देखा की भाभी मेरे लंड की तरफ देख रही हैं, मैं तुरंत जाकर खाना खाने बैठ गया।

मैं और भाभी साथ बैठ कर खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद मैं और भाभी टी.वी. देखने लगे, भाभी कुछ ही समय बाद वहीं सोफे पर सो गयीं।

भाभी ने आज एक कसा हुआ ब्लाउस पहना हुआ था जिसके ऊपर का एक बटन खुला हुआ था और भाभी के दूध का काफी हिस्सा मुझे दिखाई दे रहा था।

मैं भाभी के बूब्स को घूर रहा था तभी भाभी कि आँख खुली और उन्होंने मुझे अपने तरफ घूरते हुए देख लिया।

उन्होंने पूछा, क्या हुआ? मैंने कहा, कुछ नहीं।

उन्होंने कहा कि उदय जरा बाम ला के मेरे सिर की मालिश कर दो। मैंने कहा, जी भाभी।

मैं बाम लाकर भाभी कि सिर की मालिश करने लगा।

मैं भाभी के सिर पर मालिश करते समय भी भाभी के बूब्स को ही घूर रहा था। अचानक ही भाभी की आँख खुली तो उन्होंने मुझे अपने दूध की ओर घूरते हुए पाया।

उन्होंने कहा, उदय क्या तुम्हे ये पसंद हैं? मैंने कुछ नहीं कहा।

फिर अचानक से भाभी ने मेरे बालों को पकड़ा और मेरे होंठों से होंठ सटा दिये।

मैं तो कुछ समय के लिए अचंभित रह गया भाभी मेरे होंठों को चूसने लगीं।

अब मैं भी अपने प्यारी भाभी का साथ देने लगा। भाभी ने मेरे बाल पकड़ के मेरा सिर अपने दूध से सटा दिया मैं बेतहाशा उनके बड़े-बड़े स्तनों को चूसने और चूमने लगा।

मैं भाभी के स्तनों को बीच में दांतों से काट भी देता जिससे भाभी एक मज़ेदार दर्द से कराह उठती थीं।

मैंने ऐसा ब्लू-फिल्मों में देखा था। मैं धीरे-धीरे भाभी के पेट को चूमते हुए उनके कमर तक आ पहुँचा।

मैंने देखा कि भाभी कि चूत पर हल्के बाल थे, शायद उन्होंने कुछ दिन पहले शेविंग की थी।

भाभी के पैर खुद ही फ़ैल गए भाभी ने मेरे बालों को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने चूत से सटा दिया।

मैं उनके चूत को किसी वफादार कुत्ते की तरह जीभ से चाटने और चूसने लगा भाभी सीत्कार उठी, चीत्कार उठी, आह्ह्हह्ह.. उईईई..

भाभी जोर-जोर से चिल्लाने लगीं आ ह मार डा ला आआआ।

अब भाभी उठीं और मुझे नंगा होने को कहा। उन्होंने अपने हाथों से मेरे कपड़े उतार दिये और जब उन्होंने मेरा साढ़े सात इंच का लंड देखा तो मुस्कुराते हुए कहा कि तुम्हारा तो तुम्हारे भैया से भी बड़ा है।

इतना कह कर भाभी ने लंड की चमड़ी को एक-दो बार आगे-पीछे किया और लुंड को मुँह में ले कर चूसने लगी।

उस समय मुझे जो आनंद आया मैं उसको किसी शब्द में बयां नहीं कर सकता बस मेरे मुँह से कई बार आह निकल कर रह गया।

अब मैं और भाभी ६९ कि पोजीशन में आ गए थे, हम इस तरह करीब दो-तीन मिनट रहे। वो सी.. अह.. ह.. जान और जोर से मेरी जान.. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।

मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी।

एक हाथ से भाभी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर-जोर से हिला रही थीं। उनके ऐसा करने में इतनी गर्माहट थी कि मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाऊँगा।

तभी भाभी ने लंड को चूसना छोड़ दिया और बोलीं, उदय मुझे आज कसके चोद दो। बहुत प्यासी हूँ।

मैं तैयार था, झट से उन्हें सीधा लिटाया और अपना लंड उनकी मलाईदार चूत पर टिका दिया।

चाटने की वजह से चूत रस से भरी हुई थी।

लेकिन पहली बार होने कि वजह से मैं सही ढंग से नहीं कर पा रहा था तब भाभी ने मुझपर मुस्कुराते हुए मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर टिका दिया और कहा, अब धीरे-धीरे धक्का लगाना शुरू करो।

मैंने वैसे ही किया, भाभी आह्ह्हह्ह.. उईईई.. करके सिहरने लगीं।

भाभी के मुँह से आह्ह्हह्ह.. उईईई.. ऊउम्मम्म.. ऊऊम्म.. हे माँ! मार डाला.. आआअह्ह्ह्ह्ह.. की आवाजें आने लगीं।

मैंने और जोर से झटके देने शुरू कर दिए। इतने में भाभी ने मुझे जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और मैं और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।

भाभी बोलने लगीं, हाय! उदय मैं मर गई और एक दम तेज धार से उसकी चूत से पानी झड़ने लगा।

मैं रुका नहीं और मैंने झटके चालू रखे। मैं चरम सीमा पर पहुँच चुका था और मेरा झड़ने वाला था।

मैंने और जोर से लण्ड चूत में हिलाते हुए उसको जकड़ लिया। मेरा लण्ड चप-चप करता हुआ एकदम कस कर भाभी की चूत में झड़ गया और मैंने भाभी को कसकर जकड़ लिया।

हम दोनों शांत हो चुके थे। अब भाभी कि वासना शांत हो चुकी थी।

मैं और भाभी एक दुसरे को चूमते रहे। फिर हम दोनों एक दूसरे में उलझ कर सो गए।

उस दिन के बाद हमने भैया के आने तक कई बार चुदाई की।

अब जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई का खेल खेला करते हैं।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो मुझे अपने विचार मेरी ईमेल पर भेजें।